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Naukrani Alhad Jawani Mast Desi Kahani

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मंजरी तो राकेश की मर्दानगी को भड़काए जा रही थी, पर अपना लौंडा भी कम नहीं था.
उसके हर वार का जवाब था उसके पास.. पर इधर मेरी हालत ख़राब हो रही थी.. इस mast desi kahani का आखिरी भाग.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. दोनों पागल प्रेमी एकदूसरे से चिपक गए और एक अत्यंत गहरे घनिष्ठ अन्तरङ्ग चुम्बन में लिप्त हो गए। राकेश का लण्ड तब दोनों के बदन के बिच मंजरी की जांघों के बिच था। वह मंजरी की गीली चूत पर जोर दे रहा था।. उनका चुम्बन पता नहीं कितना लंबा चला। थोड़ी देर के बाद मंजरी ने राकेश का मुंह अपने मुंह से अलग किया। मुझे दोनों की गहरी साँसे कमरे के बाहर खड़े हुए भी सुनाई पड़ रही थी। इतना लंबा चुम्बन करने के समय दोनों. की साँसे रुकी हुई थी सो अब धमनी की तरह ऑक्सीजन ले रही थी।. मंजरी ने राकेश की आँखों में आँखें मिलाई और थोड़ा सा मुस्कुरा कर बोली, ‘देख पगले! कुछ पाने के लिए मेहनत तो करनी पड़ती है। अब मुझे देखता ही रहेगा या फिर अपनी मर्दानगी का अनुभव मुझे भी कराएगा? मैं भी तो देखूं, तू कैसा मर्द है?” राकेश चुप रहा। उसने फिर झुक कर मंजरी के लाल होठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ा सा उठकर अपने घोड़े से लण्ड को ऊपर उठाया। मंजरी ने राकेश का लण्ड अपनी हथेली में लिया और उसे हलके से हिलाते हुए धीरे से अपनी. चूत के केंद्र बिंदु पर रखा। फिर थोड़ा ऊपर सर करके मंजरी राकेश के कानों में बोली, “देख, अब तू तेरे यह मरद को धीरे धीरे ही घुसेड़ियो। तेरा लण्ड कोई छोटा नहीं है। मेरी बूर को फाड़ न दे।”  . मंजरी फिर पहली बार राकेश से डरी, दबी हुई प्यार भरे लहजे में बोली, “देख यार, अच्छी तरह उसे गीला करके हलके हलके डालियो। ध्यान रखना अब मैं और मेरी यह चूत सिर्फ मेरी नहीं है। यह तेरी भी है। अब यह जनम जनम के लिए तेरी हो गयी। जब तू चाहे इसका मजा ले सकता है।”. राकेश मंजरी को देखता ही रहा। उसकी समझ में नहीं आरहा था की उस दिन तक जो मंजरी उसकी रातों की नींद हराम कर रही थी और जो मंजरी उससे भाग रही थी उस को अपने पास फटक ने नहीं दे रही थी वही मंजरी कैसे उससे इतने. प्यार से भीगी बिल्ली की तरह अपनी टांगें उठाकर उसे बिनती कर रही थी और उससे चुदवाने के लिए उत्सुक हो रही थी।.  . राकेश को भी एहसास हुआ की अब वह कोई साधारण छैला नहीं रहा। अब उसकी सपनों की रानी उस दिन से तन और मन से उसकी हो गयी थी। अब उसे मंजरी के पीछे दौड़ने की जरुरत नहीं थी। वह जान गया की जवानी की जो आग उसके बदन. में लगी हुई थी वही आग मंजरी के बदन में भी लगी हुई थी। उस सुबह वह मंजरी के पीछे भागने वाला सड़क छाप रोमियो नहीं बल्कि मंजरी का प्रेमी बन गया था। मंजरी अब जनम जनम की उसकी संगिनी बनाना चाहती थी। राकेश भी. तो यही चाहता था। पर शायद राकेश प्यार की जो शरारत भरी हरकतें मंजरी ने उसके साथ और उसने मंजरी के साथ तब तक की थीं उसकी उत्तेजना खोना भी नहीं चाहता था।.  . राकेश ने भी उसी प्यार भरे लहजे में कहा, “देख मेरी छम्मो। तुझे तो मेरी बनना ही है। मैं तुझे छोडूंगा नहीं। पर इसका मतलब यह नहीं है की हमारे बिच जो यह लुका छुपी कहो या पकड़म पकड़ी का खेल चलता आ रहा था वह ख़तम हो जाए। यह तो जारी रहना चाहिए। तुझे तेरे पीछे भागके पकड़ कर चोदने ने का जो मजा है वह मैं खोना नहीं चाहता।”. यह सुनकर मंजरी का अल्हडपन सुजागर हो गया। वह राकेश के नंगे पेट पर अपना अंगूठा मार कर बोली, “साले, एक तरफ मुझे चोदना चाहता है, और फिर कहता है की मैं भाग जाऊं और तू मुझे पकड़ ने आये? अरे साले तू मंजरी को नहीं जानता। मेरे पीछे भागने वाले बहुत हैं। तू मुझे क्या पकड़ता। यह तो मुझे तुझ पर तरस आ गया और मैं जानबूझ कर तुझसे पकड़ी गयी। अब चल जल्दी कर वरना मैं कहीं भाग निकली तो तू फिरसे हाथ मलता रह. जाएगा।”.  . राकेश अपनी मुस्कान रोक न सका। उसे अच्छा लगा की उसकी मंजरी कोई साधारण औरत नहीं थी की वह किसी भी मर्द की चगुल में आसानी से फँसे। उसे यह भी यकीन हो गया की आगे की उसकी राह उतनी आसान नहीं रहने वाली की जब. उसका जी चाहे तो मंजरी उससे चुदने के लिए अपने पाँव फैलाकर सो जायेगी। उसे वही मशक्कत करनी पड़ेगी जो उसने तब तक की थी।.  . राकेश ने कहा, “ठीक है मेरी रानी। अब ज़रा मैं तेरी जवानगी का और तु मेरी मर्दानगी का मजा तो लें! हाँ मैं तेरा जरूर ध्यान रखूंगा तू चिंता मत करियो। ”  . ऐसा कह कर राकेश ने अपना कड़ा छड़ जैसा मोटा लण्ड मंजरी की फैली हुई टांगों के बिच में उसकी उभरी हुई चूत के होठोंको के केंद्र बिंदु पर धीरे से सटाया।.  . मंजरी ने अपनी उँगलियों से अपनी चूत के होठों को फैलाया और राकेश के फौलादी लण्ड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर थोड़ी देर के लिए अपनी चूत पर रगड़ा ताकी दोनों का पुरजोर झर रहा पूर्व रस से राकेश का लण्ड और उसकी. चूत पूरी तरह सराबोर हो जाए और मंजरी को राकेश के लण्ड के अंदर घुसनेसे ज्यादा पीड़ा न हो।.  . उसके बाद मंजरी ने अपना पेंडू को ऊपर की और धक्का देकर राकेश को यह संकेत दिया की वह उसका लण्ड अंदर घुसेड़ सकता है। राकेश ने जैसे ही अपना लण्ड मंजरी की चूत में थोड़ा सा घुसेड़ा की अनायास ही मंजरी के मुंह से. निकल गया, “धीरे से साले यह मेरी चूत है। तेरे बाप का माल नहीं है।”  . राकेश अपनी हंसी रोक न सका। उसने एक धक्का मारा और अपना लण्ड थोड़ा और घुसेड़ा। मंजरी अपनी आखें मूँदे राकेश के छड़ का उसकी चूत में घुसने का इंतजार कर रही थी। मुझे दोनों की यह प्रेमक्रीड़ा का पूरा आनंद लेना. था। मेरा लण्ड भी एकदम कड़क और खड़ा हो गया था।. मैं दरवाजे करीब पहुँच गया और छुप कर दोनों को देखने लगा। मेरा पलंग दरवाजे के एकदम करीब ही था और मुझे दोनों प्रेमियों की हर हरकत साफ़ दिख रही थी और उनका वार्तालाप साफ़ सुनाई दे रहा था। मैं सोच रहा था की. शायद वह दोनों मुझे देख नहीं रहे थे। पर मैंने एक बार देखा की मंजरी अपनी टांगें उठाकर राकेश के कन्धों पर रखे हुई थी और उसकी फैली हुई चूत मैं साफ़ देख रहा था तो उसने मुझे आँख मारी। मैं हतप्रभ रह गया। शायद. मुझे मंजरी ने चोरी से छिप कर उन दोनों को देखते हुए पकड़ लिया था।.  . पर उसके बाद जब राकेश ने अपना लण्ड मंजरी की चूत में थोड़ा और घुसेड़ा तब मंजरी के मुंह से सिसकारी निकल ही गयी। उसे बोले बिना रहा नहीं गया, “साले कितना मोटा है तेरा लण्ड। मेरी चूत फाड़ देगा क्या? साले धीरे धीरे डाल।”.  . मंजरी की दहाड़ सुन कर मुझे हँसी आगयी। मैं अपने मन में सोच रहा था, “यह लड़की कमाल की है.
चुदते हुए भी अपनी दादागिरी और अल्हड़पन से वह बाज नहीं आती। कोई और लड़की इसकी जगह होती तो चुप रहकर चुदने का मजा ले रही होती।”.
स्रोत:इंटरनेट