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थोड़ी देर में मेरी नौकरानी अनिता आ गई, और अपना काम करने लगी, मैं भी तैयार होने बाथरूम में आ गाया। मुझे थोड़ा शक था कि आज शायद मुझे ब्रा-पैन्टी ना दिखे, पर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मैने देखा कि आज फ़िर उसने अपनी ब्रा-पैन्टी धो कर कल की तरह ही जमीन पर छोड़ दी है। कल शायद उससे गल्ती से छूट गया था, पर आज के लिए मैं पक्का था कि उसने जान-बूझ कर छोड़ा है। मुझे लगने लगा कि ये साली पट सकती है। मैंने आज फ़िर उसकी पैन्टी लंड पे लपेट मूठ मारी और माल उसके पैन्टी में डाल दिया। ये वाली पैन्टी कल वाली से भी पुरानी थी, और उसमें भी दो-एक छोटे छेद थे। पर मुझे मजा आया। मैंने अपने माल से लिपसे पैन्टी को ब्रा के साथ सुखने को डाल दिया। शाम को मुझे आने में थोड़ी देर हो गई, अनिता हम दोनों का खाना बना कर जा चुकी थी। मैं जब आया तो नुपूर चाय बनाई और हम दोनों गपसप करते हुए चाय पीने लगे। नुपूर ने ही बात छेड़ दी-“आज फ़िर आपको मजा आया मेरी सेवा करके?” मैं समझ न सका तो उसने कहा, “वही ४१ ग्राम, सुबह” और मुस्कुराई। मैंने भी कहा- “हाँ, मजा तो खुब आया, पर नुपूर, इतने पुराने कपड़े पहनो, फ़टे कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता”। वो समझ गई, बोली- “ठीक चाचु, आगे से ख्याल रखूँगी।” मैंने देखा कि बात सही दिशा में है तो आगे कहा-“अच्छा नुपूर, थोड़ा अपने पर्सनल लाईफ़ के बारे में बताओ। प्रकाश कह रहा था कि तुम्हारा किसी लड़के के साथ चक्कर था। अगर न बताना चाहो तो मना कर दो।” वो थोड़ी देर चुप रही फ़िर उसने दीपक के बारे में कहा, जो उसके साथ स्कूल में ५ साल पढ़ा था। दोनो अच्छे दोस्त थे। पर ऐसा कुछ नहीं किया कि उसको इतना डाँटा जाए, दीपक तो फ़िर उस डाँट के बाद कभी मिला भी नहीं। अब तो वो उसको अपना पहला क्रश मान ली थी। मैं तब साफ़ पूछ लिया-“क्यों, क्या सेक्स-वेक्स नहीं किया उसके साथ?” वो अपने गोल-गोल आँख घुमा कर बोली-“छीः, क्या मैं आपको इतनी गन्दी लड़की लगती हूँ, दीपक मेरा पहला प्यार था, अब कुछ नहीं है?” मैंने मूड को हलका करने के लिए कहा-“अरे नहीं बेटी तुम और गन्दी, कभी नहीं, हाँ थोड़ी शरारती जरूर हो, बदमाश जो अपनी ब्रा-पैन्टी अपने चाचु से साफ़ करवाती हो।” वो बोली-“गलत चाचु, साफ़ तो खुद करती हूँ, आप तो सिर्फ़ सुखने को डालते हो।” हम दोनों हँसने लगे। फ़िर खाना खा कर टहलने निकल गए। बातों बातों में वो अपने कौलेज के बारे में तरह तरह की बात बता रही थी, और मैं उसके साथ का मजा ले रहा था।
तीसरे दिन भी सुबह नुपूर के चेहरे पर नजर डाल कर ही शुरु हुई। उस दिन अनिता थोड़ा सवेरे आ गयी थी, नुपूर का नास्ता बना रही थी। मैं भी अपने औफ़िस के काम में थोड़ा बीजी था, कि नुपूर तैयार हो कर आई। मैंन घड़ी देखे -८.
३०। नुपूर बोली- “चाचु आज भी रख दिया है मैंने आपके लिए ४१ ग्राम….
और आज धोई भी नहीं हूँ”, और वो चली गयी। मैंने भी अब जल्दी से फ़ाईल समेटी और तैयार होने चला गया। आज बाथरूम में थोड़ी सेक्सी किस्म की ब्रा-पन्टी थी और उससे बड़ी बात कि आज नुपूर ने उसपर पानी भी नहीं डाला था। दोनो एक सेट की थी, गुलाबी लेस की। इतनी मुलायम की दोनों मेरी एक मुठी में बन्द हो जाए। मैंने पैन्टी फ़ैलाई-स्ट्रिन्ग बिकनी स्टाईल की थी। उसके सामने का भाग थोड़ा कम चौड़ा था, करीब ४ इंच और नीचे की तरफ़ पतला होते होते चुत के उपर २ इंच का हो गया था, फ़िर पीछे की तरफ़ थोड़ा चौड़ा हुआ पर ५ इंच का होते होते कमर के इलास्टिक बैंड मे जा मिला। साईड की तरफ़ से पुरा खुला हुआ, बस आधा इंच से भी कम की इलस्टिक। मैंने प्यार से उस गन्दी पैन्टी का मुआयना किया। चुत के पास हल्का सा एक दाग था, जो बड़े गौर से देखने पर पता चलता, मैने उस धब्बे को सुंघा। हल्की सी खट्टेपने की बू मिली और मेरा लन्ड को सुरुर आने लगा। मैने प्यार से उसी धब्बे पर अपना लन्ड भिड़ा, पैन्टी को लन्ड पे लपेट मजे से मूठ मारने लगा, और सारा माल उसी धब्बे पर निकाला, फ़िर उस पैन्टी-और ब्रा को सिर्फ़ पानी से धो कर सुखने डाल दिया।
शाम ७.
३० बजे घर आया, साथ चाय पीने बैठे तो मैंने बात छेड़ दी-“आज तो नुपूर बेटी, तुमने कमाल कर दिया।” वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कह दिया-“बिना धोयी हुई ब्रा-पैन्टी से तुम्हारी खुश्बू आ रही थी।” वो शर्माने लगी, तो मैने कहा-“सच्ची बोल रहा हूँ, मैंने सुँघ कर देखा था। तुम्हारे बाप की उम्र का हूँ, पर आज वाली ४१ ग्राम की खुश्बू ने मेरे दिल में अरमान जगा दिये।” वो थोड़ा अनईजी दिखी, तो मैंने बात थोड़ा बदला, “पर मैंने भी दिल पे काबू कर लिया, तुम परेशान न हो।” वो मुस्कुराई, तब मैंने कहा-“पर आज वाली तो बहुत सेक्सी थी, अब कल क्या दिखाओगी मुझे?” वो मुस्कुराई-“कल ३० ग्राम मिलेगा”। मै-“क्यों?” वो बोली-“क्योंकि आज मैंने नीचे पहनी ही नहीं है। वो दोनो पुरानी वाली पहननी नहीं थी, और ये वाली तो आज धुली है, कल पहनुँगी।” मैंने कहा-“ऐसे बात है, चल आज ही खरीद कर लाते हैं। मैंने आज तक कभी लेडीज पैन्टी नहीं खरीदी, आज ये भी कर लेते हैं।” वो थोड़ा सकुचाई, तो मैंने उसको हाथ पकड़ कर उठा दिया, बोला जल्दी तैयार हो जाओ। मैं तब जींस और टीशर्ट में था, और वो अपने नाईटी में। वो दो मिनट में चेंज करके आ गई-नीले स्कर्ट और पीले टौप में वो जान-मारू दिख रही थी। उसने आते हुए कहा-“स्कर्ट में सुविधा होगी, एक तो वहीं पहन लूँगी, और एक और ले लूंगी।” बहुत मस्त लौन्डिया थी वो। मेरे जैसे मर्द को खुब टीज करना जानती थी। जब भी मैं ये सोचता कि साली नंगी चुत ले कर बाजार में है, मेरे दिल से एक हूक निकल जाती। हम एक लेडीज अंडरगार्मेंट्स स्टोर में गए। मेरे लिए ये पहला अनुभव था। दो-तीन और लेडीज ग्राहक थीं। हमारे पास एक करीब २८-३० साल की एक सेल्सगर्ल आई, तो मैने, उसे एक ब्र-पैन्टी सेट दिखाने को कहा। क्या साईज, और कोई खास स्टाईल, कहते हुए उसने एक कैटेलग हमें थमा दिया। एक से एक मस्त माल की फ़ोटो थी, तरह तरह की ब्रा-पन्टी में। मैं फ़ोटो देखने में बीजी था, कि नुपूर बोली-“सिर्फ़ पैन्टी लेते हैं ना”। मैंने नजर कैटेलग पे ही रखते हुए कहा-“एक इसमें से ले लो, फ़िर दो-तीन पैन्टी ले लेना।” सेल्सगर्ल ने पूछा-“दीदी के लिए लेना है या मैडम के लिए?”, मैंने नुपूर की तरफ़ इशारा किया। वो मुस्कुराते हुए बोली-“किस टाईप का दूँ, थोड़ी सेक्सी, हौट या सोबर?” मैंने जब उसे थोड़ा सेक्सी टाईप दिखाने को बोला तो वो मुस्कुराई। वो समझ रही थी कि मैं उस हूर के साथ लंपटगिरी कर रहा हूँ।. उसने कुछ बहुत ही मस्त सेट निकल दिए। एक तो बस सिर्फ़ पैन्टी के नाम पर २”x१” का सफ़ेद पारदर्शी जाली थी ब्रा भी ऐसा कि जितना छुपाती नहीं उतना दिखाती। मुझ वो ही खरीदने का मन हुआ, पर नुपूर ने एक दुसरा पसंद किया। जब मैने कहा कि एक वह सेक्सी टाईप ले कर देखे, तो वो बोली, नही पर अगर आपका मन है, तो सिर्फ़ पैन्टी में ऐसा कुछ देख लेंगे, पैसा भी कम लगेगा। नुपूर की पसंद की पैन्टी उसकी सेक्सी पैन्टी से थोड़ी और छोटी थी। चुतड़ तो लगभग ९०% बाहर ही रहता, पर चुत ठीक ठाक से कवर हो जाती। उसने उसका चटख लाल रंग पसंद किया। फ़िर उसने हेन्स की स्ट्रींग बिकनी पैन्टी माँगी, तो सेल्सगर्ल ने एक ३ का सेट दिया। अब मैंने उस सेक्सी पैन्टी के बारे में कहा और जोर दे कर एक सफ़ेद और एक काली पैन्टी खरीद ली। नुपूर ने हेन्स की एक पैन्टी पैक से निकाली और ट्रायल रूम में चली गई और पहन ली। सामान पैक करते समय सेल्सगर्ल ने. नुपूर से उसकी पुरानी पैन्टी के बारे में पूछा तो नुपूर ने कहा-“इट्स ओके, आई हैडन्ट बीन वीयरिन्ग एनी (सब ठीक है, मैने नहीं पहना हुआ था)। सेल्सगर्ल ने भी चुटकी ली-“आजकल के बच्चे भी ना…, इस तरह बिना चड्ढ़ी बाजार में निकल लेते हैं।” दुकान पर मौजूद तीनों सेल्सगर्ल और मैंने भी हँस दिया,और नुपूर झेंप गई।
स्रोत:इंटरनेट