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Nupur Bitiya Ki Jigyasa Shant Ki Part 1 Desi Kahani

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इस Hindi Sex Story की हीरोइन मेरे जिगरी दोस्त की बेटी है जो मुझे चाचा कह के बुलाती है| मैंने कभी ध्यान नही दिया था की नुपूर जवान हो गयी है| उसकी जवानी का वो हिस्सा मुझे तब पता चला जब वो किसी वजह से. मेरे साथ अकेले रहने आई थी.. इस सुपर हॉट desi kahani से आप अपने अंजाम तक जरुर पहुचोगे.. बहुत बार! अब मैं sexy story पर आता हूँ- Desi Kahani के अन्य भाग–. पार्ट 1. पार्ट 2. मैं हूँ रमेश, उम्र ४३ साल, अविवाहित पर सेक्स का मजा लेने में खुब उस्ताद। मेरी इस कहानी में जो लड़की है उसका नाम है – नुपूर। वो मेरे एक दोस्त प्रोफ़ेसर प्रकाश सिंह की बेटी है। नुपूर के पिता और मैं दोनों कौलेज के दिनों से दोस्त हैं। उनकी शादी एम०ए० करते समय हीं हो गई। खैर मैं तो नुपूर के बारे में कहने वाला हूँ उसके माँ-बाप में तो शायद हीं आप-लोगों को रुचि हो। नुपूर १८ साल की बी०कौम० फ़र्स्ट ईयर. की छात्रा है। बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन है। एक दम गोरी, ५’५” लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती-बलखाती जब वो सामने से चलती तो मेरे दिल में एक हूक सी उठती। मेरे जैसे चूतखोर मर्द के लिए उसका बदन एक पहेली था, कैसी लगेगी बिना कपड़ों के नुपूर? तब मैं भूल जाता कि वो मेरे गोद में खेली है, उसके बदन को जवान होते मैने देखा है। उसकी चुची नींबू से छोटे सेव, संतरा, अनार होते देखा है, महसूस किया है। सोच-सोच कर मैंने पचासों बार अपना लंड झाड़ा होगा। पर उसका मुझे चाचा कहना, मुझे रोक देता था कुछ भी करने से। उसके दिल की बात मुझे पता नहीं थी न। वैसे नुपूर का चक्कर दो-तीन लड़कों से चला था, घर पर उसे खुब डाँट भी पड़ी थी, पर उन लोगों ने हद पार की थी या नहीं मुझे पता न चल पाया, और जब भी मेरे दोस्त और भाभी जी ने इस बात की चर्चा की, तब उनके भाषा से मुझे कुछ समझ नहीं आया। और एक बार…भगवान की दया से कुछ ऐसा हुआ कि…. हुआ ये कि नुपूर के नाना की तबियत खराब होने की खबर आई, और नुपूर के मम्मी-पापा को उसके ननिहाल मेरठ जाना पड़ा, और नुपूर की क्लास चलते रहने की वजह से वो उसको नहीं ले जा सके। उनके घर में नीचे के हिस्से में जो किरायेदार थे वो भी अपने गाँव गए हुए थे, सो नुपूर को अकेला वहाँ न छोड़, उन लोगों ने उसको एक सप्ताह मेरे साथ रहने को कहा। असल में ये प्रस्ताव मैंने ही उन लोगों को परेशान देख कर दिया था। वो तुरंत मान गए। मेरे दोस्त ने तब कहा भी कि यार मैं भी यही सोच रहा था पर तुम अकेले रहते हो, लगा कहीं तुम्हें कोई परेशानी ना हो। बात-चीत करते हुए प्रकाश ने हल्की आवाज में बताया कि एक बार पहले भी वो नुपूर को अकेले तीन दिन के लिए छोड़े थे तो आने पर किरायेदार से पता चला कि दो दिन लगातार नुपूर के साथ कोई लड़का रहा था, जो उसके साथ स्कूल में पढ़ता था, अब कहीं इंजीनियरिंग पढ़ रहा है। वो अपनी परेशानी मुझे बता रहा था और मैं सोच रहा था कि जब नुपूर अपने घर पर एक लड़के को माँ-बाप के नहीं रहने पर रख सकती है, तो घर के बाहर तो वो जरूर ही चुदवायी होगी। खैर…, अगले दिन सुबह कोई ७ बजे वो लोग नुपूर को मेरे अपार्ट्मेंट पर छोड़े, चाय पिया और मेरठ चले गये। नुपूर तब अपने स्लीपिंग ड्रेस में ही थी – एक ढ़ीला सा कैप्री और काला गोल गले का टी-शर्ट। उसको को ९ बजे कौलेज जाना था, दो घंटे के लिए। मेरी नौकरानी नास्ता बना रही थी, जब नुपूर किचेन में जा कर उससे पूछी कि कोई साबुन है या नहीं। असल में अकेले रहने के कारण मेरे रूम के बाथरूम में तो सब था पर दुसरे रूम, जिसमें नुपूर का सामान रखा गया था, वह बाथरूम कपड़े धोने के लिए ही इस्तेमाल होता था। मैं ही तब कहा-“नुपूर, तुम मेरे रूम का बाथरूम युज कर लो, मुझे अभी समय है”। और नुपूर अपना कपड़ा ले कर मुस्कुराते हुए चली गई। मैं बाहर वाले रूम में अखबार पढ़ रहा था, जब नुपूर तैयार हो, नास्ता करके आई और बोली-“चाचा, मैं करीब १२ बजे लौटूँगी, तब तो घर बंद रहेगा।” मैंने उसको भींगे बालों से घिरे सुन्दर से चेहरे को देखते हुए कहा- “कोई परेशान होने की बात नहीं है, तुम एक चाभी रख लो”, और मैने नौकरानी से चाभी ले कर उसको दे दी, (मैंने एक चाभी उसको इसलिए दी थी कि वो शाम को आ कर काम कर जाए और मेरा खाना पका जाए) साथ हीं नौकरानी को शाम की छुट्टी कर दी कि शाम को हम लोग होटल में खाना खा लेंगे। थोड़ी देर में नकरानी भी काम निपटा कर चली गई, और मैं तैयार होने बाथरूम में आया। और.. बाथरूम में नुपूर की कैप्री और टी-शर्ट खूँटी से टंगी थी, और नीचे गीली जमीन पर नुपूर की ब्रा-पैन्टी पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि उसने उन्हें धोया तो है, पर सुखने के लिए डालना भूल गई। मेरे लन्ड में सुरमाथुर जगने लगी थी। मैंने उसके अन्तर्वस्त्र उठा लिए और उनका मुआयना शुरु कर दिया। सफ़ेद ब्रा का टैग देखा-लवेबल ३२बी०। सोचिए, ५’५” की नुपूर कितनी दुबली-पतली है। मैंने अब उसकी पैन्टी को सीधा फ़ैला दिया। वो एक पुरानी पन्टी थी-रुपा सौफ़्ट्लाईन ३२ साईज। इतनी पुरानी थी कि उसके किनारे पर लगे लेस उघड़ने लगे थे और वो बीच से हल्का-हल्का घिस कर फ़टना शुरु कर चुकी थी। मैंने उसे सूँघा, पर उसमें से साबुन की हीं खुश्बू आई। फ़िर भी मैंने ऐसे तो कई बार उसके नाम की मुठ मारी थी, पर आज उसकी पैन्टी से लन्ड रगड़-रगड़ कर मूठ मरा और अपना माल उसके पैन्टी के घीसे हुए हिस्से पर निकला और फ़िर बिना धोये ही पैन्टी-ब्रा को सुखने के लिए डाल दिया। मेरे दिमाग में अब ख्याल आने लगा कि एक बार कोशिश कर के देख लूँ, शायद नुपूर पट जाए। पर मुझे अब देर हो रही थी सो मैं जल्दी-जल्दी तैयार हो कर निकल गया। शाम को करीब ७ बजे मैं घर आया, नुपूर बैठ कर टीवी देख रही थी। उसने ही मुझे चाय बना कर दी। हम दोनों साथ चाय पी रहे थे, जब मैंने कहा-“तैयार हो जाओ, आज बाहर हीं खाना है।” खुशी उसके चेहरे पे झलक गई, और मैं उसके उस सलोने से चेहरे से नजर हटा न पाया। हम लोग इधर-उधर की बात कर रहे थे, तभी उसे ख्याल आया, बोली-“सौरी चाचा, आज आपके बाथरूम में गलती से मेरा कपड़ा रह गया। असल में मेरे जाने के बाद मम्मी जब सारे घर को ठीक करती है, तो वो ये सब भी कर देती है। कल से ऐसा नहीं होगा।” उसके चेहरे पे सारी दुनिया की मासुमियत थी। मैंने भी प्यार से कहा-“अरे, कोई बात नहीं बेटा, मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। तुम तो धो कर गई ही थी, मैंने तो सिर्फ़ सुखने के लिए तार पर डाल दिया।” फ़िर थोड़ी शरारत मन में आई तो कह दिया-“वैसे भी तुम तो खुद १० किलो की हो, तो तुम्हारी ब्रा-पैन्टी तो १० ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए न। उसको सुखने डालने में कोई मेहनत तो करना नहीं पड़ा मुझे।” उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखो को गोल-गोल नचाया-“पुरे ४१ किलो हूँ मैं”। मैंने तड़ से जड़ दिया-“ठीक है फ़िर. तो मैं सुधार कर देता हूँ, फ़िर ४१ ग्राम होगी ब्रा-पैन्टी।” वो मुस्कुरा कर बोली-“मेरा मजाक बना रहें हैं, मैं तैयार होने जा रहीं हूँ।” और वो अपने रूम में चली गई, मैं अपने रूम में। कोई आधे घन्टे बाद हम घर से निकले। नुपूर ने एक गहरे हरे रंग की कैप्री और गुलाबी टौप पहनी थी। बालों को थोड़ा उपर उठा पोनीटेल बनाया था, पैर में बिना मोजा रीबौक के जूते। मैं उसकी खुबसुरती पर मुग्ध था। हम लोग पैदल हीं एक घंटा घुमे और फ़िर करीब ९ बजे एक चाईनीज रेस्ट्रां मेम खाना खा कर १० बजे तक घर आ गए। थोड़ी देर टीवी देखने के बाद अरीब ११ बजे नुपूर अपने रूम में और मैं अपने रूम में सोने चले गए। नुपूर के. बारे में सोचते सोचते बड़ी देर बाद मुझे नींद आई। अगले दिन करीब ६ बजे नुपूर ने मुझे जगाया, वो सामने चाय ले कर खड़ी थी। मेरे दिमाग में पहला ख्याल आया कि आज का दिन अच्छा हो गया, उसकी सलोनी सूरत देख। हमने साथ चाय पी। वो तब मेरे बिस्तर पे बैठी थी। उसने एक नाईटी पहनी हुई थी जो उसके घुटने से थोड़ा नीचे तक थी। रेडीमेड होने के कारण थोड़ा लूज थी, और उसके ब्रा के स्टैप्स दिख रहे थे। आज उसे ८.
३० बजे निकलना था, सो वो बोली-“आप बाथरूम से हो लीजिए तब मैं भी नहा लूँगी, आज थोड़ा पहले जाना है”। मैं जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि उसने मेरा बिस्तर ठीक कर दिया है, और अपने कपड़े के साथ मेरे बेड पे बैठी है। जब वो बाथरूम की तरफ़ जाने लगी तब मैंने छेड़ते हुए कहा, आज भी अपना ४१ ग्राम छोड़ देना। वो यह सुन जोर से बोली-छीः, और हल्के से हँसते हुए बाथरूम का दरवाजा लौख कर लिया। मैं बाहर बैठ पेपर पढ़ रहा था, जब वो बोली-“मैं जा रही हूँ चाचु, करीब १ बजे लौटूँगी, मेरा लंच बनवा दीजिएगा, नस्ता मै कैंटीन में कर लूँगी।” मैं उसको पीले टाईट सलवार कुर्ते में जाते देखता रहा, जब तक वो दिखती रही। उसकी सुन्दर सी गांड हल्के हल्के मट्क रही थी।.
स्रोत:इंटरनेट