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Nupur Bitiya Ki Jigyasa Shant Ki Part 2 Chudai Story 3

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मैंने मोनिका से पूछा-“बोलो बच्ची,चोदूँ तुम्हें।” और नुपूर की देख उससे पूछा-“दिखा साफ़-साफ़, नहीं तो एक बार फ़िर बाहर निकाल कर पेलूँ भीतर”। ये कहते हुए मैंने लन्ड बाहर खींचा और दुबारा से मोनिका की बुर में पेल दी। मोनिका के मुँह से दुबारा आआआह निकली। नुपूर इस बार खड़ी हो गई ताकि सब साफ़ देख सके। मोनिका ने नुपूर को खड़ा देख बोला-“आईए न दीदी आप भी। अंकल बहुत अच्छे. हैं।” आगे कुछ कहने से पहले हीं मैंने लन्ड को बुर के बाहर भीतर करके लौण्डिया की चुदाई शुरु कर दी। नुपूर का चेहरा चुदाई देख एक दम लाल हो गया था, पर वो सिर्फ़ खड़े-खड़े देख रही थी। मोनिका को पहली बार मेरे जैसे मर्द से वास्ता पड़ा था जो लड़की को खुब मजे ले कर चोदता है और लड़की को भी साथ में मजे देता है। मेरी आदत थी कि मैं रन्डी भी चोदता तो प्रेमिका बना कर। जब भी किसी को चोदा तो उसको अपने लिए भगवान का. उपहार माना और उसके शरीर को पुरे मन से भोगा। मैंने मोनिका से कहा-“मजा आया मोनिका?”उसकी आँख बंद थी, होठ से कांपती आवाज आई-“हाँ अंकल बहुत। आप बहुत अच्छे हैं। आअह अंकल अब थोड़ा जोर से धक्का लगा कर चोदिए न, जैसा धक्का लन्ड पेलते समय दिए थे।” असल में अभी ख्ब प्यार से धीरे धीरे लन्ड अंदर-बाहर करके उसको चोद रहा था। पुरा पैसा वसूल हो इसके लिए जरुरी था कि उसकी बुर कम से कम आध घंटा मेरे लन्ड से चुदे। उसके जोर का धक्का लगाने की फ़र्माईश पर मैंने ८-१० सौलिड धक्के लगाए और धक्के पर मोनिका के मुँह से आह की आवाज आई।. मैंने मोनिका से कहा-“आँख खोल और देख न कौन चोद रहा है तुझे। मुझसे आँख मिला, कुछ बात कर ना। रन्डी हो तो थोड़ा रन्डीपना दिखा।” उसे मेरी बात से ठेस पहुँची शायद, पर वो आँख खोल कर बोली-“हाँ साले बेटीचोद, लुटो मजा मेरे चूत का साले। मेरे बाप की उमर के हो और साले मुझे चोद रहे हो।” मुझे उसकी गालियों से जोश आ गया-“चुप साली फाड़ दुँगा तेरी चूत आज। साली कुतिया। मुझे बेटी-चोद बोलती है। बाप से चुदा-चुदा के जवान हुई हो साली और मुझे बोल रही है बेटी चोद…ले साली चुद, और चुद, और चुद, रन्डी साली।’ और मैंने कई जोरदार धक्के लगा दिए। ८-१० मिनट चोदने के बाद मैं थोड़ा थक गया तो लन्ड बाहर निकाल लिया और बोला-“अब बेटा तुम मेरे उपर बैठ कर चोदो, मुझे थोड़ा आराम से लेटने दो, फ़िर मैं चोदुँगा”। उसने कहा-“ठीक हैं अंकल” और मेरे उपर चढ़ कर बैठ गई। नुपूर बार-बार अपने पैर सिकोड़ रही थी, उसकी चूत भी गीली थी, पर उसमें गजब का धैर्य था। खड़े-खड़े ही वो हुम दोनों की चुदाई देख रही थी चुप चाप। मोनिका के मुँह से हुम्म्म हुम्म्म की अवाज निकल रही थी पर वो मेरे लन्ड पर उछल उछल कर खुद ही अपनी बुर चुदा रही थी। मैं ऐसी मस्त लौन्डिया को पा कर धन्य हो गया। कुछ देर बाद मैंने कहा-“चल साली, अब घोड़ी बन। घुड़सवारी करने का मन है।” वो बोली-“जरुर अंकल, आपके लिए तो आप जो बोलो करुँगी। आपने मुझे सच्ची मजा दिया है और मुझे पहली बार रन्डीपन का मजा मिल रहा है।” और वो बड़े प्यार मेरे उपर से उठी और फिर बेड से उतर कर जमीन पर हाथ-घुटनों के सहारे झुक गई। वो अब नुपूर के. बिल्कुल पास झुकी हुई थी। उसकी खुली हुई बुर अपने भीतर की गुलाबी कली के दर्शन करा रही थी।. मैं भी बेड से उतर कर पास आ गया और नुपूर से पूछा-“मस्ती तो आ रही होगी, कम से कम अपनी ऊँगली से ही कर लो मेरी बच्ची”, मैंने प्यार से उसके गाल सहला दिए। फिर मोनिका पर सवार हो गया। मेरा लन्ड अब मजे से उसकी गीली चूत के भीतर की दुनिया का मजा ले रहा था। करीब ४० मिनट हो गया था, हम दोनों को खेलते हुए। मोनिका को एक और और्गैज्म हो चुका था। मेरा भी अब झड़ने वाला था तो मंने उससे पूछा-“कहाँ निकालूँ मोनिका?” वो तपाक से बोली-“मेरे मुँह में, मेरे मुँह में अंकल। आपका एक बुँद भी बेकार नहीं करुँगी।” मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल और उसके मुँह की तरफ़ आया। उसने अपना मुँह खोला और मैं उसके मुँह को अब चोदने लगा। १०-१२ धक्के के बाद मेरे लन्ड से पिचकारी निकलने लगी, जिसे मोनिका अपना होठ बन्द करके पुरा का पुरा माल मुँह में ली और फ़िर मैंने लन्ड बाहर खींच लिया तब उसने मुँह खोल कर मेरे माल को अपने मुँह में दिखाया और फिर मुँह बन्द करके निगल गई। मैंने उसको जमीन से उठाया और फ़िर अपने गले लगा लिया और कहा-“तुम बहुत अच्छी हो मोनिका, मैंने जो गालियाँ तुम्हें दी, उसके लिए माफ़ करना। चोदते समय ये सब तो होता ही हैं।” वो भावुक हो गई, उसकी आँखों में आँसू तैर गए। भरी आवाज में बोली-“नहीं सर, आप बहुत अच्छे हैं। मैं रन्डी हूँ, पर आपने इतना इज्ज्त दिया, वर्ना बाकी लोग तो मेरे बदन से सिर्फ़ पैसा वसूल करते हैं। थैंक्यू सर।” उसकी यह बात दिल से निकली थी, मैंने उसकी पीठ थपथपायी-“सर नहीं अंकल। अब मैं तुम्हारा अंकल हीं हूँ। जब भी परेशानी में रहो, मुझे बताना। मैं पुरी मदद करुँगा।” एक-एक बूँद आँसू उसकी गालों पर बह गए। उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढ़क लिया। ५-६ सेकेण्ड बाद मुस्कुराते हुए हाथ हटाए और बोली-“बेटीचोद” और मेरे गले से लिपट गयी। नुपूर की. आँख भी गीली हो गई। उसकी नजरों में भी मेरे लिए अब प्यार दिख रहा था। वो बोली-“मैं आप दोनों के लिए पानी लाती हूँ” और वो बाहर चली गई।. जब वो पानी का ट्रे ले कर आई तब मैं कुर्सी पर बैठा था और मोनिका बिस्तर ठीक कर रही थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थी। मेरा लन्ड एक दम शांत और भोला बच्चा बन गया था। पानी आगे करते हुए नुपूर बोली-“चाचु. अब आप दोनों सो जाएँ, ११.
३० से ज्यादा हो रहा है। अब कल सुबह मैं चाय लाऊँगी आप दोनों के लिए।” फ़िर हँसते हुए रुम में से भाग गयी।  . अगली सुबह नुपूर ही रुम में आ कर मुझे और मोनिका को जगाई। मैने देखा कि नुपूर के हाथ की ट्रे में दो गिलास पानी और पेपर है। मैं और मोनिका अभी भी नंगे थे जैसे कि हम रात को सो गए थे। मोनिका पानी पी कर. बाथरुम की तरफ़ चल दी, और मैंने उसका तकिया उठा कर अपने गोद में रख लिया जिससे मेरे लन्ड को नुपूर नहीं देखे। नुपूर यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई। मैं पेपर खोल लिया। जब नुपूर चाय ले कर आई,तब तक मोनिका भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी। नुपूर सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने मोनिका की तरफ़ बढ़ा दिया। मोनिका ने चाय लिया बाकी चाय के बारे में पुछा। अब जो नुपूर ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई। बड़ी सेक्सी आवाज में हल्के से फ़ुस्फ़ुसा कर नुपूर बोली-“तुम पीयो चाय, चाचू को आज मैं अपना दूध पिलाऊँगी”, और उसने अपने टौप को नीचे से पकड़ कर उठाते हुए एक ही लय में अपने सर के उपर से निकाल दिया। मेरे मुँह से निकल गया-“जीयो जान, क्या मस्त चुची निकली है तेरी।” सच उसकी संतरे जैसी गोल-गोल गोरी-गोरी चुची गजब का नजारा पेश कर रही थी, और उस पर गुलाबी-गुलाबी लगभग आधे आकार को घेरे हुए चुचक बेमिसाल लग रहे थे। नुपूर के बदन के गोरेपन का जवाब न था। वो इसके बाद मेरे बदन पर ही चढ़ आई।. Chudai Story के अन्य भाग–. पार्ट 2. नुपूर के इस सेक्सी सफ़र के साथ चलिए My पर.
स्रोत:इंटरनेट