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Nupur Bitiya Ki Jigyasa Shant Ki Part 3 2

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नुपूर आई और घुटनो पर बैठ गई। मैं समझ गया कि अब वो होगा जो मैंने हमेशा सपने में होने की उम्मीद करता था। हाँ, नुपूर ने मेरे ढ़ीले लन्ड को पकड़ अपने मुँह में डाल लिया था और उस पर अपना जीभ चला रही थी। अचानक वो बोली-“चाचु, अब आपका बुढ़ा होने लगा हैं; देखिए आपका कई बाल सफ़ेद हो गया है।” वो मेरे झाँट के बारे में बात कर रही थी। उसे इस प्रकार बात करते देख अच्छा लगा कि अब ज्यादा मजा आयेगा पहली बार तो कुछ खास बात चीत हुई ना थी। मैंने उसे थोड़ा एनकरेज किया-“अभी बुढ़ा न कहो इसको। बारह घन्टे में दो जवान लौन्डिया चोदा है मेरा पट्ठा। एक की तो सील तोड़ी है। मर्द तो साठ साल में पट्ठा होता है – . साठा तब पाठा – सुना नहीं क्या? अभी पाँच मिनट रुको, पता चलेगा जब तेरी बूर की बीन बजाएगा ये काला नाग।” उसने अपनी आँख गोल-गोल नचाई-“हूँ, ऐसा क्या?”। सच उसकी यह अदा लाजवाब है। वो चुस-चुस कर मेरे लन्ड को कड़ा कर रही थी और काफ़ी अच्छा चुस रही थी। मैंने कहा-“अभी थोड़ा और चुसो आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह, नुपूर तुम तो सब बहुत जल्दी सीख गई”। उसने नजर मिला कर कहा-“मेरा प्यारा चाचु सिखाए और मैं ना सीखू, ऐसा कैसे होगा?” मैं-“आय हाय, बड़ी मस्त लौन्डिया हो रे तुम चाचा की भतीजी”। उसने मुझसे हँसते हुए पूछा-“मैं लौन्डिया हूँ?” मैंने जवाब दिया-“हाँ तुम लौन्डिया हो लौन्डिया, मेरी लौन्डिया, मेरी लौन्डी हो।” वो बोली-“अच्छा और क्या हूँ मैं?” और मेरे लन्ड को हल्के हल्के चुसती जा रही थी। मै मस्ती की मूड में आ गया-“दिखने में तो तुम माल हो माल, वो भी टौप क्लास का। आआआअह्ह्ह्ह्ह, मक्खन हो साली तुम। खिलती हुई गुलाब की कली हो जान। वाह बहुत अच्छा चुस रही हो, इइइइस्स्स्स्स,मजा आ रहा है। और चुस मेरी लौन्डी। कैसा लग रहा है, जरा बता ना साली। थोड़ा खेल भी हाथ में ले कर।” नुपूर ने लन्ड को अब हाथ से सहलाना शुरु किया, “बहुत बढ़ीया है आपका लवड़ा।” मैंने सुधारा-“लवड़ा नहीं लौंड़ा बोल इसे। चुदाते समय रन्डियों की तरह बोलना सीख”। वो मचल कर बोली-“तो सिखाओ ना कैसी रन्डी बोलती है, मुझे थोड़े न पता है। मैं तो सीधी-साधी लड़की हूँ, मम्मी-पापा ने इतने प्यार से पाला और अब आप मुझे ये सब कह रहे हो, कैसे होगा?” मैं बोला-“तुझे लड़की कौन बेवकुफ़ कहेगा। मैंने बताया न, तुम माल हो वो भी एक दम टंच माल। एक चुदाई के बाद जैसे लन्ड खा रही है, लगता है कि मम्मी-पापा के घर जाने तक तू पुरी रन्डी बन जाएगी।” नुपूर मेरी बात सुन कर बोली-“हाँ चाचु, मुझे सब सीखना है, जल्दी-जल्दी सीखाओ न अब, एक सप्ताह तो तुम बर्बाद कर दिए मेरा उदघाटन करने में। वो भी हुआ तब, जब मैं कौलगर्ल लाने को बोली, वर्ना तुम तो मुझे ऐसे ही अपने घर से विदा कर देते। मैं जब आई थी तब से यह सब सोच कर आयी थी। शुरु से तुमको लाईन दे रही थी और तुम साधु बने हुए थे। पहले दिन से ही मैंने तुम्हारे बाथरुम में अपना अन्डरगार्मेन्ट छोड़ना शुरु किया पर तुम थे कि आगे बढ़ ही नहीं रहे. थे।” मैं सब सुना और कहा-“हाँ बेटा, तुम सही कह रही हो। असल में मुझ लग रहा था कि थोड़ी-बहुत छेड़-छाड़ तो ठीक है, पर शायद तुम सेक्स के लिए ना कह दोगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी फ़िर तुमसे। यही सब सोच मैं आगे नहीं बढ़ रहा था। पर मैंने भी धीरे-धीरे ही सही पर तुम्हारी तरफ़ आगे बढ़ रहा था ये तो मानोगी। और पता है, रोज मास्टरबेट करके तुम्हारी पैन्टी पर अपना लन्ड का रस डाल देता था, तुम्हें पता चला कुछ?” वो मुस्कुराई-“सब पता है, सुखने पर भी थोड़ा तो अलग लगता है। अब ऐसे अपना क्रीम मत फ़ेंकना, मैं हूँ ना, सब खा जाऊँगी। कहीं पढ़ा है कि, मर्द के उस रस में बहुत पौष्टिक मैटेरीयल होता है।” मेरा लन्ड अब जैसे माल निकालने की स्थिति में आ गया था। मैंने समय लेने के लिए कहा-“अब बात बन्द कर और चल बिस्तर पर लेट। तेरे चूत का स्वाद लेना है अब मुझे।”. वो झट उठी और बेड पे लेट गई। मैं भी साथ ही आ गया और तुरंत उसकी चूत पर मुँह भिरा दिया। पुरे दस मिनट तक उसकी चूत को खुब चुभला-चुभला कर चुसा, चबाया। उसकी गीली चूत का नमकीन स्वाद मस्त था। साली खुब मस्त हो कर अपना चूत चटा रही थी। एक बार वो पानी भी छोड़ी, पर थोड़ा सा। इसके बाद वो थोड़ा शान्त हो गई, तब मैंने पुछा-“क्या हाल है? कैसा लगा इस चुतिया चाचा के मुँह का मजा?” बेचारी कुछ बोल न सकी, बस हाँफ़ती रही, और मुझे समझ आ गया की बछिया अब हार चुकी है। मैं एक बार फ़िर साँढ़ बन कर बछिया पर चढ़ गया और सिर्फ़ उसके चेहरा पर नजर गड़ा कर साली की जोरदार चुदाई शुरु कर दी। अब वो जैसे छोटे पिल्ले केंकीयाते हैं, वैसा आवाज मुँह से निकाल रही थी। आप सब ने ऐसी आवाज की चाईनीज या जपानी लड़की की चुदाई वाली ब्लु-फ़िल्म में सुनी होगी। उसकी चूत से निकलने वाला “राग मस्त-चुदाई” मुझे एक विशेष मजा दे रहा था। थोड़ी देर में मैंने पुछा-“क्या रे अब रोना-चीखना छोड़ और बोल कहाँ निकालूँ अपना वीर्य, अब मेरा छुटेगा।” वो संभली और बोली-“मेरे मुँह में चाचु, मेरे मुँह में।” ये सुन मैंने अपना लन्ड बाहर खींचा और उसके चेहरे की ओर आ गया। उसने अब अपना मुँह मराने के लिए खोला और मैं उसके मुँह में लन्ड घुसा अब उसकी मुँह मारने लगा। मैं अपने किस्मत पर खुश था, मुझे नुपूर जैसी हूर चोदने को भगवान ने दे दी थी। १०-१२ बार के बाद मेरे लन्ड ने पहली पिचकारी छोड़ी और फ़िर अगले ५ बड़े झटके में मेरा कम-से-कम एक बड़ा चम्मच वीर्य उसकी मुँह में गिरा। वो बड़े चाव से वो सब माल निगल गई, हाँफ़ रही थी पर शौक से खाई। फ़िर मेरे लौंड़े को चाट-चुस कर साफ़ भी किया। जब वो मेरा लन्ड चाट रही थी, तब मैं भी उसकी ताजा चुदी चूत को चाटा, और उसके नमकीन गीलेपन और कसैले-खट्टेपन से भरी गंध का मजा लिया। करीब १२ बजे हम दोनों साथ ही नहाए, और नंगे ही बाहर आए तो मैंने कहा कि जल्दी तैयार हो जाओ, आज बाहर हीं लंच लेंगे। वो जल्दी हीं आ गई। उसने एक सफ़ेद स्कर्ट और गोल गले का लाल टौप पहन रखा था, और पोनी टेल में बंधे बाल के साथ वो बहुत सुन्दर दिख रही थी। मैंने आँख मारी और कहा ऐसा जानमारूँ माल बन कर घर से निकलोगी, तो सड़क पर हंगामा हो जायेगा। वो हँस दी, और मैं उसकी मोहक मुस्कान पे फ़िदा हो उसके होठ पर एक हल्का सा चुम्बन जड़ दिया। हम अब एक अच्छे से रेस्ट्राँ में आए, और खाना खाया, फ़िर पास के ही एक मल्टीप्लेक्स में २ बजे के शो में एक अंग्रेजी रोमैंटिक फ़िल्म देखी। तीन शानदार बेडरुम सीन था। हौल में इधर-उधर कई सिस्की सुनाई दे जा रही थी। मैंने नुपूर का ध्यान एक जोड़े की तरफ़ किया। एक २१-२२ साल की लड़की नीचे झुक कर शायद अपने बायफ़्रेन्ड का लन्ड चुस रही थी। हम दोनों अब बीच-बीच में उस जोड़े की हरकतों का भी मजा ले. रहे थे। नुपूर ने भी मेरे लन्ड को अपने हाथ से मसल मसल कर झाड़ा, और जब मेरा वीर्य उसके हाथों पे फ़ैल गया तब उसने उसके चाट कर अपना हाथ साफ़ किया। फ़िल्म के बाद हम मार्केट गए और वहाँ पर मैंने नुपूर के लिए एक सुन्दर सा लाल और हरा का एक कामदार सलवार-सुट खरीदा। तभी नुपूर की मम्मी का फ़ोन आ गया कि अभी वो लोग एक सप्ताह और रुकेंगे। सुन कर हम दोनों खुश हो गए। उन्होनें जब नुपूर से पूछा की कोई परेशानी तो नहीं, तब नुपूर ने मेरी तरफ़ देख कर हँसते हुए कहा कि कोई परेशानी नहीं है, चाचा मेरा बहुत ख्याल रखते हैं, मुझे बहुत प्यार करते हैं। फ़िर भाभी जी मेरे से बात कीं और मुझसे माफ़ी माँगी कि उनके बाहर रहने से नुपूर के कारण मुझे परेशानी उठानी पर रही है। मैंने भी कहा कि वो संकोच ना करें, मुझे नुपूर से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि नुपूर की वजह से अब मैं ज्यादा घरेलु हो गया हूँ, शाम में घर आने पर अच्छा लगता है। नुपूर हीं मुझे चाय पिलाती है बना कर। भाभी जी संतुष्ट हो गयीं और फ़ोन काट दिया। नुपूर बोली-“मम्मी से तो ऐसे कह रहे थे जैसे मैं आपकी बीवी की तरह चाय पिला रही हूँ आपको?” मैंने तपाक जड़ दिया-“और. नहीं तो क्या? न सिर्फ़ बीवी की तरह चाय पिलाती हो, अब तो रोज़ बीवी की तरह चुदाती भी हो। कहो तो यह भी कह दूँ तेरी मम्मी से?” नुपूर शर्मा गई-“छिः, ये बात कहीं मम्मी से कही जाती है?”
स्रोत:इंटरनेट