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जैसा की उम्मीद थी, नुपूर अपने चाचू का लौड़ा लेने को तैयार थी। पर उसके बाद नुपूर ने जो ख्वाहिश जाहिर की, वो सुनके चाचू के भी होश उड़ गए| पढ़िए नुपूर की Hindi Sex Stori का गरमा गरम अपडेट। याद रहेगा आपको..
Hindi Sex Story के अन्य भाग–.
पार्ट 3.
अगली सुबह नुपूर ही रुम में आ कर मुझे और मोनिका को जगाई। मैने देखा कि नुपूर के हाथ की ट्रे में दो गिलास पानी और पेपर है। मैं और मोनिका अभी भी नंगे थे जैसे कि हम रात को सो गए थे। मोनिका पानी पी कर. बाथरुम की तरफ़ चल दी, और मैंने उसका तकिया उठा कर अपने गोद में रख लिया जिससे मेरे लन्ड को नुपूर नहीं देखे। नुपूर यह सब देख बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुराई, फ़िर चाय लाने चली गई। मैं पेपर खोल लिया। जब नुपूर चाय ले कर आई,तब तक मोनिका भी बाहर आ गई थी और अपने कपड़े जमीन पर से समेट रही थी। नुपूर सिर्फ़ एक कप चाय लाई थी, जिसे उसने मोनिका की तरफ़ बढ़ा दिया। मोनिका ने चाय लिया बाकी चाय के बारे में पुछा। अब जो नुपूर ने कहा उसे सुन कर मेरी नसें गर्म हो गई। बड़ी सेक्सी आवाज में हल्के से फ़ुस्फ़ुसा कर नुपूर बोली-“तुम पीयो चाय, चाचू को आज मैं अपना दूध पिलाऊँगी”, और उसने अपने टौप को नीचे से पकड़ कर उठाते हुए एक ही लय में अपने सर के उपर से निकाल दिया। मेरे मुँह से निकल गया-“जीयो जान, क्या मस्त चुची निकली है तेरी।” सच उसकी संतरे जैसी गोल-गोल गोरी-गोरी चुची गजब का नजारा पेश कर रही थी, और उस पर गुलाबी-गुलाबी लगभग आधे आकार को घेरे हुए चुचक बेमिसाल लग रहे थे। नुपूर के बदन के गोरेपन का जवाब न था। वो इसके बाद मेरे बदन पर ही चढ़ आई।. मैंने पहले उसके चेहरे को पकड़ा और फ़िर उसके गुलाबी होठों का रस पीने लगा। उसका बदन हल्का सा गर्म हो रहा था, जैसे बुखार सा चढ रहा हो। बन्द आँखों के साथ वो हसीना अब टौपलेस मेरे बाहों में थी। मैंने मोनिका की तरफ़ देखा। वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी, और चाय की चुस्की ले रही थी, जब मैंने नुपूर को अपने बदन से थोड़ा हटाया और फ़िर उसकी दाहिनी चुची की निप्पल मुँह में ले उसे चुभलाने लगा। नुपूर आँख बंद करके सिसकी भर रही थी, और मैं मस्त हो कर उसके चुचियों से खेल रहा था, चुस रहा था। वो भी मस्त हो रही थी। मैंने अपने हाथ थोड़ा आगे कर उसके कैप्री के बटन खोले और फ़िर उसको अपने सामने बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। भीतर काली पैन्टी की झलक मुझे मिल रही थी। प्यार से पहले मैंने कैप्री उत्तार दी। फ़िर मक्खन जैसी जाँघों को सहलाते हुए भीतर की तरफ़ जाँघ पर २-४ चुम्बन लिया। उसका बदन अब हल्के से काँप गया था। और जब मैं उसकी पैन्टी. नीचे कर रहा था तब उसने शर्म से अपना चेहरा अपने हाथों से ढ़क लिया। इस तरह से उसका शर्माना गजब ढ़ा गया। चूत को उसने एक दिन पहले ही साफ़ किया था, सो उसकी गोरी चूत बग-बग चमक रही थी। मैंने उसके चूत को पुरा अपने मुट्ठी में पकड़ कर हल्के से दबा दिया, तो वो आआह्ह्ह्ह कर दी। मैंने अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और वो चुसाई की, वो चुसाई की गोरी-गोरी चूत की कि वो एक दम लाल हो गई जैसे अब खून उतर जाएगा। वो अब चुदास से भर कर कसमसा रही थी, कराह रही थी। उसकी हालत देख मैंने मोनिका की तरफ़ आँख मारी और कहा-“नुपूर बेटा, अब जरा तुम भी मेरा चुसो, अच्छा लगेगा”। वो काँपते आवाज में बोली-“नहीं चाचु, अब कुछ नहीं अब बस आप घुसा दो मेरे भीतर अब बर्दास्त नहीं होगा, प्लीज…”
मैंने उसको छेड़ा-“क्या घुसा दूँ, जरा ठीक से बोलो ना।” मोनिका मेरे बदमाशी पर हँस दी, बोली-“अंकल, क्यों दीदी को तड़पा रहे हो, कर दो जल्दी।” नुपूर लगातार प्लीज घुसाओ प्लीज कर रही थी। मैंने फ़िर कहा-“बोलो भी अब क्या घुसा दूँ,कहाँ घुसा दूँ, मुझे समझाओ भी जरा।” नुपूर सच अब गिड़गिराने लगी, बोली-“चाचा, प्लीज…” वो अपने हाथ से अपना चूत सहला रही थी। मैंने भी कहा-“एक बार कह दो साफ़ साफ़ डार्लिंग, उसके बाद देखो, जन्न्त की सैर करा दुँगा, बस तुम्हारे मुँह से एक बार सुनना चाहता हूँ पहले।” अब नुपूर बोल दी-“मेरे अच्छे चाचु, प्लीज अपने लन्ड को मेरे चूत में दाल कर मुझे चोद दो एक बार, अब रहा नहीं जा रहा।” मेरा लन्ड जैसे फ़टने को तैयार हो गया था ये सब सुन कर। वषों से यही सोच सोच कर मैंने मुठ मारी थी सैकड़ों बार। मैं जोश में भर कह उठा-“ओके, मेरे से चुदाना चाहती हो, ठीक है खोलो जाँघ”। और मैं उसके जाँघों के बीच बैठ कर लन्ड को उसकी लाल भभुका चूत की छेद से भिरा दिया। मैंने कहा-“डालूँ अब भीतर?” नुपूर चिढ़ गई-“ओह, अब चोद साले बात मत कर आह”। इस तरह जब वो बोल पड़ी तो मैं समझ गया कि अब साली को रन्डी बन जाने में देर ना लगेगी। मैंने एक जोर के धक्के के साथ आधा लन्ड भीतर पेल दिया। उसके चेहरे पर दर्द की रेखा उभरी, पर उसने होंठ भींच लिए। अगला धक्का और जोर का मारा और पुरा ८” जड़ तक नुपूर की चूत में घुसेड़ दिया। वो चीख पड़ी-“हाय माँ, मर गई रे….
।” उसका आँख बन्द था, और उस जोरदार धक्के के बाद मैं थोड़ा एक क्षण के लिए रुका कि मोनिका की आवाज सुनाई दी-“ओह माँ”। मैंने आँख खोली, देखा नुपूर के दोनों आँखों से एक-एक बूँद आँसू निकल कर गाल पर बह रहे थे, मोनिका साँस रोके अपने हाथों से मुँह ढ़के बिस्तर देख रही थी। और तब मुझे अहसास हुआ कि नुपूर कुँवारी कली थी, और मैंने उसका सील तोड़ा था अभी-अभी। बिस्तर पर उसकी कुँवारी चूत की गवाही के निशान बन गए थे, बल्कि अभी और बन रहे थे।
मैं समझ गया कि कितनी तकलीफ़ हुई है नुपूर को, सो अब मैंने उसको पुचकारा-“हो गया बेटा हो गया सब, अब कुछ दर्द ना होगा कभी”। मोनिका भी उसके बाल सहला रही थी-“सच दीदी, अब सब ठीक है, इतना तो सब लड़की को सहना होता है…”। नुपूर भी अब थोड़ा सम्भली और होंठ भींचे भींचे सर को हिलाया कि सब ठीक है। और तब मैंने अपना लन्ड बाहर-भीतर करना शुरु किया। ४-६ बार बाद लन्ड ने अपना रास्ता बना लिया. और फ़िर हौले-हौले मैं भी अब सही स्पीड से नुपूर की चुदाई करने लगा। वो भी अब साथ दे रही थी। ८-१० मिनट बाद मैंने अपना सारा माल चुत के उपर पेट की तरफ़ निकाल दिया। वो निढ़ाल सी बेड पर पड़ी थी। मोनिका ने बेडशीट. से ही उसकी चूत पोंछ दी, और फ़िर उसको सब दिखाया। नुपूर बोली-“अब तो पका हुआ ना कि मैंने दीपक के साथ कुछ नहीं किया था, पर ये सब मम्मी-पापा कैसे जान पाएँगें?” उसके आँखों में आँसू आ गए। मैंने उसे अपनी बाँहों में समेट लिया-“छोड़ो ये सब बात, आज तो सिर्फ़ अपनी जवानी का जश्न मनाओ।” मुझे अब पेशाब लग रही थी, सो मैं बिस्तर से उठ गया। अब दोनों लड़कियाँ भी उठ कर कपड़े पहनने लगीं। आधे घन्टे बाद चाय-बिस्कुट के साथ नुपूर अपने पहले चुदाई के अनुभव बता रही थी। मोनिका ने उसे समझाया कि “अभी एक-दो बार और दर्द महसुस होगा पर ऐसा नहीं मीठा दर्द लगेगा, उसके बाद जब बूर का मुँह पुरा खुल जायेगा तब बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा, चाहे जैसा भी लन्ड भीतर डलवा लो। मुझे अब बिल्कुल भी दर्द नहीं होता”।
करीब ९ बजे मोनिका चली गई। नुपूर ने उससे वादा लिया कि वो फ़िर एक बार आयेगी, तब शुक्रवार को आने की बात कही, क्योंकि शनि और रविवार को रजिन्दर उसकी मेरे साथ बूकिंग के बाद एक घन्टे में अगले ५ सप्ताह की बूकिंग कर चुका था। मुझे भी मोनिका बहुत अच्छी लगी थी। जाते-जाते वो मुझे कह गई-“अंकल आपको जब मन हो फ़ोन कर दीजिएगा, माथुर सर वाले दिन छोड़ कर, चली आऊँगी, अब आपके साथ पैसे ले कर नहीं करुँगी, आपने सच मुझे बहुत इज्ज्त और प्यार दिया, थैंक्यु”। उसके जाने के बाद मैं और नुपूर ने अगले एक घन्टे में घर साफ़ किया और फ़िर कपड़े वाशिंग मशीन में डालने के बाद नुपूर मेरे पास आई और बोली-“चाचु, एक बार और कीजिएगा, अब दर्द बिल्कुल ठीक हो गया है”। सुबह साढ़े छः के करीब नुपूर पहली बार चुदी और अभी साढ़े दस बजे वो दुसरी बार चुदाने को तैयार थी। मेरे लिए तो नुपूर का जिस्म दुनिया का सबसे बड़ा नशा था सालों से, कैसे मना करता। तुरंत ही अपना कपड़ा खोल दिया और बोला-“आओ”।
स्रोत:इंटरनेट