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दोस्तो, आज मैं आपको अपनी पहले सेक्स की बात बताने जा रहा हूँ। यह मेरी अपने पड़ोस वाली भाभी के साथ हुए सेक्स की bhabhi sexy story है जो आपको जरुर पसंद आएगी.
desi kahani के अन्य भाग –. भाग – 1. भाग – 2.
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घर का माहौल बहुत ही सख्त है, इसलिए घर में तो बॉय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड का नाम भी नहीं लिया जा सकता, मुझे पता है कि मेरी छोटी बहन का बॉय फ्रेंड है, मगर हम दोनों हम उम्र होते हुये भी कभी भी आपस में ऐसी कोई बात नहीं करते, सब के सब शरीफ बच्चे हैं।
इसी वजह से मैं आज तक कुँवारा हूँ, आज तक कोई गर्ल फ्रेंड नहीं बना पाया, बस हर वो लड़की या औरत जो पसंद आई, उसके नाम की मुट्ठ मार लेता हूँ।
मगर दिल में बड़ी इच्छा थी कि किसी ऐसी औरत की चुदाई करूँ, जो उम्र में मुझसे बड़ी हो। और अगर उसके छोटा बच्चा हो, मतलब जिसके बोबे दूध से भरे हों, तो और भी मज़ा आ जाये…
मेरी बड़ी इच्छा होती है, औरत का दूध पीने की मगर कभी भी ऐसा मौका नहीं लगा।
एक दो बार दोस्तों ने बाहर चुदाई का प्रोग्राम भी बनाया मगर मैं शर्म की वजह से नहीं गया कि किसी किसी रंडी को चोदने के बाद घर कैसे आऊँगा, घर वालों के सामने कैसे जाऊंगा, चाहे यह सिर्फ मेरे मन का ही भ्रम था, मगर मैं नहीं गया।
ऐसे में ही हमारे पड़ोस में रहने वाली एक भाभी की तरफ मेरा ध्यान गया। ध्यान भी कैसे गया, एक दिन मैं उनके घर किसी काम से गया, उस वक़्त वो अपने बेटे को दूध पिला रही थी।
उस दिन मैंने पहली बार उनके दोनों बूब्स जो उन्होंने अपनी ब्लाउज़ से बाहर निकाल रखे थे, देखे।
मेरा बड़ा मन किया कि भाभी से कहूँ कि भाभी एक बूब तो आपका फ्री ही पड़ा है, और उससे दूध टपक टपक कर नीचे गिर रहा है, प्लीज़ मुझे चूस लेने दो, मुझे आपका दूध पीना है।
मगर गाँड में इतना दम कहाँ!. तो चुपचाप अपने घर आया, बाथरूम में गया, और मुट्ठ मार के खुद को शांत किया।
मगर उसके बाद मैं हमेशा उनके घर जाने के बहाने ढूंढने लगा।. और एक दिन ऐसा बहाना बना के बस मेरी तो ज़िंदगी ही बदल गई।. जो भैया हैं वो तो सरकारी जॉब करते हैं, मगर भाभी हाउसवाइफ हैं। मगर भाभी हैं बहुत ही सुंदर, फुल सेक्सी, फुल सुंदर। किसी चीज़ की कमी नहीं, सुंदर गोरा रंग, चाँद सा चेहरा, बड़ी बड़ी आँखें, लंबे बाल, सेक्सी कटीला बदन, गोल एकदम गोल बोबे, हल्के भूरे निप्पल, जो मैंने उस दिन देखे थे, पतला सपाट पेट, शानदार भरे हुये चूतड़।
बहुत ही लहरा कर चलती हैं, जीन्स में उनके शानदार बदन की खूबसूरती देखने वाली होती है।
एक दिन स्कर्ट में देखी, क्या शानदार भरी हुई, गोरी चिकनी टाँगें। उस दिन सिर्फ उनकी टाँगों के नाम से मुट्ठ मारी मैंने!
खैर अब मुद्दे पर आता हूँ।. मैं एक दिन माँ के कहने पर उनके घर कुछ सामान देने गया, सुबह का कोई 11 बजे का वक़्त होगा, भैया दफ्तर जा चुके थे। मैंने भी बैल नहीं बजाई, धीरे से दरवाजा खोला और अंदर घुस गया।
हाल में कोई नहीं था, तो मैं उनके बेडरूम की तरफ गया।
. बेडरूम से टीवी चलने की आवाज़ आ रही थी। जब बेडरूम में गया, तो मेरी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। बेडरूम में भाभी शायद अपने बेटे को दूध पिलाते पिलाते सो गई थी।
उनका बेटा भी साथ में सो रहा था, भाभी की नाईटी उनके गले तक ऊपर उठी हुई थी, दोनों बूब्स बाहर, आज़ाद, नीचे गोरा सपाट पेट, उनके नीचे चिकनी जांघें बिल्कुल बिंदास नंगी, और उन्हीं दो जांघों के बीच में फंसी उनकी छोटी सी बिना बाल की चूत…. मैंने तो सोचा भी नहीं था कि भाभी को कभी नंगी भी देख सकूँगा, मगर अब तो वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी लेटी थी।
मैंने सोचा कि अब क्या करूँ?.
पहले तो मैंने पीछे से जाकर उनके चूतड़ देखे, गोरे, गोल गोल भरे हुये चूतड़… बहुत दिल कर रहा था कि भाभी के बदन को चूम लूँ, उनके चूतड़ों पर, उनकी कमर पर, गाल पर, या उनका निप्पल अपने मुँह में लेकर उनका दूध पी कर देखूँ।. मैंने देखा नीचे चादर पे शायद उनका दूध टपकने से कुछ गीला गीला सा हो रहा था, मैंने वहाँ पे उंगली लगाई और चाट गया मगर उनके दूध का स्वाद नहीं आया।
मैंने अपना लंड अपनी जीन्स से बाहर निकाला और भाभी को देख कर अपना लंड हिलाने लगा, पहले सोचा मुट्ठ मार कर भाभी पर अपना माल गिरा दूँ, फिर सोचा अगर भाभी जाग गई और गुस्सा हुई, तो क्या होगा।
फिर अपना लंड अपनी पेंट में डाल लिया और बैठ कर सिर्फ उसके नंगे बदन को ताड़ता रहा।. स्लीवलेस नाईटी थी, और पूरी ऊपर उठी हुई, दोनों बूब्स बाहर खुले पड़े, मुझे बार बार चुनौती दे रहे थे, के आजा और हमे पकड़ ले…
मगर मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी… बस बैठा रहा।. पर तभी भाभी की नींद खुल गई, जब उसने मुझे देखा तो एकदम से हड़बड़ा कर उठी, अपने कपड़े ठीक किए,और बोली- अरे विशाल तुम
कब आए?. मैंने ने बड़े प्यार से जवाब दिया- भाभी मुझे आए तो 15 मिनट हो गए!. न चाहते हुये भी मेरे मन की शैतानी मेरे चेहरे पर मुस्कान के रूप में आ गई, जिसे भाभीने देख लिया और समझ भी लिया।
मेरा असल मतलब उसे यही बताना था कि जानेमन पिछले 15 मिनट से तुझे नंगी लेटी को देख रहा था।. भाभी ने थोड़ा गुस्से में कहा- पर अगर अंदर आना था तो बैल बजा कर आते, यूं किसी के बेडरूम में चुपचाप से आना क्या अच्छा लगता है?
मगर इस सवाल का जवाब तो मेरे पास तैयार था- भाभी आप प्लीज़ गुस्सा मत करो, आपका दरवाजा खुला था, मैं तो वैसे ही अंदर आया था, मगर जब अंदर आकर आपको देखा तो बस देखता ही रह गया, मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस औरत को मैं मन ही मन इतना पसंद करता हूँ, उसको कभी इस रूप में भी देखूँगा।
भाभी के चेहरे की सख्ती जैसे मेरी बात सुनते ही कहीं गुम सी हो गई, शायद उसे लगा कि मैंने जो भी कहा, सच ही तो कहा।
अक्सर मैं अपनी बातों से उनको पहले भी जताता रहता था कि मैं उनको बहुत पसंद करता हूँ।. मगर मेरी बात सुन कर भाभी उठ कर जाने लगी, मुझे लगा कहीं यह मौका मेरे हाथ से न निकल जाए, अगर वो चली गई, तो मेरी तो सारी करी धरी की धरी रह जाएगी।
तो मैंने मन में ठान ली कि आज नहीं तो कभी नहीं…. जैसे ही वो उठ कर जाने लगी तो मैंने उसकी कलाई पकड़ ली- भाभी आप गुस्सा तो नहीं हो न? सच कहता हूँ भाभी मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ, आपसे मन ही मन बहुत प्यार करता हूँ, माँ से पूछ लो मैंने तो यह भी कह रखा है कि मुझे आप जैसे ही पत्नी चाहिए, आप मेरी गलती की जो चाहे सज़ा दे लो, मगर मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।
कह कर मैं तो उसको अपनी मोहब्बत का इजहार करने के लिए उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया, जबकि असल मंशा मेरी यह थी के वो बेड से नीचे न उतर सके, अगर उतर कर चली गई तो फिर तो मुझे कुछ भी नहीं मिलने वाला!
स्रोत:इंटरनेट