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Papa Ki Pari Hun Main Beti Sex Kahani

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पापा से अपनी सील तुडवाने के बाद हमारी रंग रैलियां बदस्तूर ज़ारी है.
हम हर तरह की हदों को पार करते जा रहे है.
इस beti sex kahani का अगला जबरदस्त भाग- Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पापा मुझे किस करते रहे.
मेरी आँखों मैं तालकीफ़ की वजह से आँसू आ गाए थे.
पापा के प्यार करने से मैं ठीक होने लगी और मैंने भी पापा के होंतों पर प्यार करना सुरु काइया.
किस करते हुआी पापा ने अपनी ज़बान मेरे मुँह मैं डाल दी, और मैं पापा की ज़बान को चूसने लगी.
पापा की ज़बान से मुझे अपनी चूत का टेस्ट आ रहा था.
मैं बहुत ज़ियाड गरम हो गई.
शहवात से मेरा बुरा हाल होने लगा.
पापा ने फिर मेरे बूब्स को चूसना सुरु काइया, और मैं बुरी तरह मचलने लगी.
डर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और उसकी जगा वाक़ई अब मुझे इतना मज़ा आ रहा था के मैं बता नहीं सकती.
मैं सोच रही थी के मम्मी भी इसी तरह पापा से चुड़वाते हुआी मज़ा लेती होंगी.
जुब मज़ा मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, और पापा उन्ही मेरे ऊपर परे हुआी थे, तो मुझ से रहा ना गया: “पापा, कुछ कराईं ना ….
मेरी चूत मैं आग लगी हुई हे ….
” इस के साथ ही मैंने नीचे से पापा को ऊपर की तरफ पुश काइया.
पापा अपनी बेटी का इशारा समझ गये.
“चलो अब अपनी जानू को गौड़ मैं ले कर छोड़ूं गा” यह कहते हुआी पापा ने मुझे अपनी गौड़ मैं भर लिया; इस तरह के मेरी दोनो टांगायन उन्होने अपनी कमर (वेस्ट) के गिर्द लपट लीं, और मेरे दोनो बाज़ू अपनी नेक के गिर्द लपट लिये, और इस तरह मेरी गांड को नीचे से पाकारते हुआी वो बेड से उतार कर मुझे गौड़ मैं ले कर फर्श पर खरे हो गये.
पापा का लंड उसी तरह से पूरा मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.
इसी तरह उठाए हुआी पापा मुझे ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिर्रों के सामने ले गये.
“जानू, देखो मिर्रों मैं.
कैसे लग रहे हैं हम दोनो बाप बेटी?” मैं मिरर मैं देख कर बुरी तरह शर्मा गयी.
“पापा … आप बारे वो हैं …” पापा मिरर के सामने इस तरह खरे थे के मेरी बॅक साइड मिरर की तरफ थी.
मैंने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा.
हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे थे.
मैं पापा की गौड़ मैं बंडर्या की तरह चींटी हुई थी.
पापा ने अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को थमा हुआ था.
पापा की उंगलियाँ मुझे अपनी गांड के गोश्त के अंडर घुसती हुई दिखाई दे रही तीन.
मेरी गांड का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था.
और उसके नीच पापा का मोटा सख़्त लंड जर तक मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.
मेरी चूत के छेड़ ने पापा के लंड को रब्बर बंद की तरह ग्रिप काइया हुआ था.
“कैसी बुरी लग रही हूँ मैं पापा ….
” “नही जानू, तुम बहुत हसीन लग रही हो.
बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लर्की मज़े ले कर चुड़वाते हुआी लगती है….
इतना हसीन जिस्म हे मेरी बेटी का ….
बिल्कुल ब्लू बंद मार्जरिन की तरह .. देखो मिर्रों मैं, कैसे पापा ने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांड को पकरा हुआ हे … और मेरा लंड कैसा लग रहा अपनी जानू बेटी की टाइट चूत मैं ….
” पापा ने यह कहते हुआी मेरी गांड को ऊपर उठाया, यहाँ तक के उनका लंड खींचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.
“भोथ टाइट चूत हे मेरी बेटी की.
उफ़ मज़ा आ गया जानू ….
इस तरह तो 3 या 4 धक्कों मैं हे मेरी मनी निकल जाई गी” यह कहते हुआी पापा ने मेरी गांड को नीचे करते हुआी अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश काइया.
फिर बाहर निकाला, फिर काइया.
और फिर बाघैर रुके तीज़ी से वो अपने लंड को मेरी चूत के अंडर बाहर करते रहे.
पापा पूरी तरह जोश और मस्ती मैं आ गये तट.
उनके गले से अजीब अजीब आवाज़ैईन निकल रही तीन.
मुझे अब पता चला के चुड रही हूँ.
आइसे छोड़ना कहते हैं.
मेरी अपनी हालत घैर हो चुकी थी.
मेरे मुँह से भी है है की और बिल्ली की तरह घुर्रने की आवाज़ निकल रही थी.
“छोड़ रहा हूँ अपनी जानू को ….
लंड जा रहा तेरी चूत मैं जानू … चुड मेरे लंड से ….
चुड अपने पापा के लौरे से ….
मज़ा आर रहा से ….
टाइट चूत है मेरी बेटी की ….
” “पापा चोदो अपनी बेटी को ….
चोदो मुझे ….. फार डैन मेरी चूत को ….. उफ़ मरगई पापा … बहुत सख़्त लंड हे आप का …… उफ़ लंड पायट मैं चला गया मेरे ….. पापा फॅट गई मेरी चूत ….
चोदो ….. चोदो ….. उफ़ चुड गई मैं मम्मी.
ओ’ मम्मी पापा ने छोड़ दिया मुझे …… पापा ज़ोर से चोदो ….
और ज़ोर से चोदो ….. धक्के लगायन ज़ोर ज़ोर से …… मज़ा आ रहा है …” अब मेरा जिस्म अकारना सुरु हो रहा था.
मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था.
मेरी चूत के सारे मुस्छले अकारने लगे थे.
और चूत के अंडर पापा का लंड फूलने और पिट्‍चकने लगा था.
“उफ़ जानू मेरी मनी निकल रही तेरी चूत मैं.
” इस के साथ हे पापा का जिस्म बुरी तरह मुझे गौड़ मैं लिये झटके मरने लगा.
मेरी गांड को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया, और नीचे से अपने पूरी तरह मेरी चूत मैं फँसा दिया.
पापा की गरम गरम मनी की पिट्‍चकारियाँ मुझे अपनी चूत की गहराइयों मैं जाती हुई सॉफ महसूस हो रही थी.
इस के साथ हे मैं भी ख़तम हो रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना सुरु कर दिया था.
हम दोनो बाप बेटी का जिस्म अब ढीला परता जा रहा था.
पसीने मैं हम दोनो नहा चुके थे.
मेरी चूत मैं बिल्कुल ठंड पर गई थी.
पापा का लंड भी ढीला पर्णाए लगा था.
मगर अभी तक मेरी चूत मैं ही.
पापा इसी तरह मुझे गौड़ मैं लिये लिये, सोफे पर बैठ गये, और मैं अपने पापा के सीने के साथ उन्ही चिपकी रही.
मेरी पसीने मैं भीगी हुई छातियाँ पापा के बलों भारी सीने से चींटी हुई तीन.
पापा का लंड आख़िर नरम हो कर मेरी चूत से बाहर निकल आया, और इसके साथ ही मेरी चूत से पापा की वीर्य बह बह कर बाहर आने लगी.
सोफा खराब ना हो जाए, इस ख़याल से मैंने नीचे अपनी चूत पर हाथ रख दिया, और पापा की मनी अपने हाथो में ले ले कर अपने पैर ओर बूब्स पर मलने लगी.
बातरूम के अंडर जाते ही पापा ने मुझे अपने से लिपटा लिया.
बेड पर तो मुझे अपनी हाइट का अंदाज़ा नही हुआ , मगर खरे हुए हालत मैं पता चला के मेरा सिर पापा के सीने तक ही पहुच पाया था.
अभी सिर्फ़ मैं 13 साल की थी.
हां थोरी सी मोटी थी.
गोरा रंग था मेरा, जिस्म मेरा भरा भरा सा था और गांड मेरी खास तौर से बहुत मोटी और बाहर की तरफ निकली हुई थी.
यह सब मैं इस लिये बता रहीं हूँ के मुझे पापा से लिपट कर अपने सरपे का एहसास हुआ.
खरे होने की वजह से पापा का मुरझाया हुआ लंड मेरी टिट्स को छू रहा था.
पापा मुझे झुक कर प्यार कर रहे थे और मेरे सारे जिस्म और मेरी गांड और चूत पर हाथ फेर रहे थे.
“उफ़ जानू कितना प्यारा और सेक्सी जिस्म हे मेरी बेटी का….
क्या करूँ तेरे साथ जानू ….. बिल्कुल मुलतानी चिकनी मिट्टी की तरह जिस्म हे तेरा जानू ….. ” इस के साथ ही पापा ने जब मेरी चूत के दाने (क्लिट) पर उंगली फेरी तो मेरे सारे जिस्म मैं सनसनी दौर गई.

स्रोत:इंटरनेट