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Paradise Club Sex Story

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यूँ मैं बस उस क्लब में काम करता था पर वहां आने वाली भाभियों की जब नियत ख़राब होगी तो किसपे होगी? मैं ही तो काम आऊंगा.. एक जबरदस्त club sex story पढ़िए.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. गुडगाँव का पैराडाइस क्लब.
इस क्लब की मेम्बर्स केवल सेना के अफसरों की बीवियां ही है.
मैं इस क्लब में बार काउंटर संभालता हूँ और साथ ही इस क्लब की कार का ड्राईवर भी हूँ.
मेरा काम बार पर सभी महिलाओं को ड्रिंक्स सर्व करना और जो भी कहे उसे उसके घर तक छोड़ना है.
मैं अभी तक कुंवारा ही हूँ.
मेरी किस्मत है कि सेना के अफसरों की इन खुबसूरत बीवियों को बहुत करीब से देखने का मौका मिलता रहता है.
जा किसी को घर छोड़ता हूँ तो अच्छी टिप भी मिल जाती है.
दोपहर को एक ग्रुप आता है.
इसमें दो मेजर की बीवियां है और तीन अन्य अच्छी पोस्ट वाले अफसरों की.
एक है मेजर विक्रम की पत्नी छाया मैडम .
छाया गज़ब की खुबसूरत है.
एकदम लाल गोरा रंग.
एक एक हिस्सा जैसे तराशा हुआ संगमरमर की कोई मूरत.
दूसरी थी रीमा मैडम; मेजर सिंह की पत्नी.
रीमा अपनी उमर से बहुत छोटी नजर आती थी.
उसकी आवाज भी किसी कॉलेज जानेवाली लड़की जैसी थी.
रीमा यूँ तो दुबली थी लेकिन उसके बूब्स बड़े थे.
अन्य तीन थी भावना ; किरण और महक.
पाँचों आपस में बहुत ही अच्छी सहेलीयां.
ताश की बाजियां चलती रहती और मैं लगातार उनके ग्लास भरते रहता.
मैं अक्सर इन्हें इनके घर छोड़ने जाया करता.
एक दिन ये सभी कुछ ज्यादा ही खुश थी.
उस दिन छाया मैडम ने खूब चढ़ा ली.
उनके कदम डगमगा रहे थे.
रीमा ने मुझे छाया मैडम को घर छोड़ने के लिए कहा.
मैं उन्हें सहारा डॉ कार में बैठाया और उनके घर के तरफ चलने लगा.
छाया का घर आ गया.
मैंने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभालते हुए उनके घर में ले गया.
उन्होंने मुझे नशे में ही कहा ” मेरे बेड रूम में पहुंचा दो.
” मैंने उन्हें उनके बेडरूम में ले गया.
उन्हें पलंग पर बिठा दिया.
अचानक छाया मैडम पलंग पर ही ढेर हो गई.
जब छाया पलंग पर गिरी तो उनके द्वारा पहनी हुई लॉन्ग ड्रेस थोड़ी खिंच गई और उनकी गोरी टांगें घुटनों तक नंगी हो गई.
उनकी मजबूत टांगें चमक रही थी.
मैंने उनके सैंडल उतारने शुरू किये जिससे कि वो आराम से लेट जाय.
मैंने एक सैंडल उतार दिया.
जैसे ही दूसरे सैंडल को उतारने लगा छाया के पैर में हलचल हुई और उसका पैर ऊपर उठाकर मेरे गालों से टकरा गया.
मेरे जिस्म में एक बिजली सी दौड़ी.
मैंने छाया की मजबूत पिंडलीयों को अपने हाथ से दबाया और पता नहीं क्या मेरे मना में आया मैंने उस पिंडली को अपने होंठों से हलके से चूम लिया.
छाया थोडा हिली और नशे में ही बड़बड़ाई ” नौटी बॉय.
” मैं वापस क्लब लौट आया.
अगले दिन जब वे पाँचों आई तो मैंने छाया मैडम से नजरें चुराता रहा.
छाया कुछ नहीं बोली.
जब सभी घर रवाना होने लगी तो अचानक छाया ने मुझसे कहा ” तुम्हें आज भी तकलीफ होगी.
मेरा बायाँ पैर बहुत दर्द कर रहा है.
आते वक्त भी बड़ी मुश्किल से कार चला पाई थी.
तुम ड्राइव करो.
वापसी में तुम तक्सी से आ जाना मैं अलग से पैसे दे दूंगी.
” मैं छाया मैडम के साथ चला गया.
जब हम घर पहुंचे तो छाया बेडरूम में चली गई.
मैं बाहर ही खड़ा रहा.
छाया ने आवाज देकर मुझे अन्दर बुलाया.
मुझे सौ रुपये का एक नोट दिया.
मैंने अहा ” मैडम तक्सी के तो केवल बीस रुपये लगेंगे.
” छाया ने कहा ” बाकी के रुपयों के लिए तुम्हें एक काम और करना होगा और वो भी अभी और यहीं.
” मैं बोला ” जी मैं समझा नहीं.
” छाया पलंग पर बैठ गई.
उन्होंने आज साड़ी पहन रखी थी.
उन्होंने साड़ी को पकड़ा और घुटनों तक ऊपर कर दिया.
फिर मेरी तरफ मुस्कुराकर देखा और बोली ” कल भी तुमने इन्हें चूमा था.
आज भी चूमोगे.
मुझे बहुत अच्छा लगा था.
इसके साथ साथ तुम यहाँ पर थोड़ी मसाज भी करा देना.
” मैं अब कुछ नहीं कर सकता था.
मैं जमीन पर बैठ गया और छाया के दोनों पैरों की पिंडलीयां चूमने लगा.
बीच बीच में अपने दोनों हाथों से उनकी मसाज भी करने लगा.
छाया मैडम को गुदगुदी सी हुई लेकिन उन्होंने अपनी दोनों टांगों से एक क्रोस बनाया और मेरे मुंह को उसमे जकड लिया.
मैंने कुछ देर लगातार चूमा; मसाज किया और फिर छाया ने कहा ” अब तुम जा सकते हो.
” मैं सारे रास्ते अपने होंठों पर एक मिठास महसूस करता रहा.
अब तो लगभग हर दूसरे – तीसरे दिन छाया मैडम मुझे अपने साथ ले जाती और अपनी टाँगें चुमवाती ; मसाज करवाती और फिर एक सौ रुपये का नोट हाथ में थमा देती.
एक दिन रीमा मैडम भी छाया की कार में आई हुई थी.
वापसी में उन दोनों को छाया मैडम की कार में लेकर उन्हें घर छोड़ने गया.
रीमा मैडम का घर छाया मैडम से कुछ कदम की ही दूरी पर था.
हमने रीमा मैडम को उनके घर छोड़ा और छाया मैडम के घर आ गए.
हमेशा की तरह मैं छाया मैडम के बेडरूम में था.
छाया मैडम सोफे पर बैठी हुई थी.
आज छाया मैडम ने अपनी ड्रेस को घुटनों से भी थोडा सा ऊपर किया हुआ था.
मैं उनकी टांगों की मसाज करते हुए बीच बीच उन्हें चूम रहा था.
तभी रीमा मैडम भीतर आ गई.
उसने मुझे छाया मैडम के पैरों को चूमते हुए देख लिया.
छाया मैडम तो यह बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए उनकी आँखें बंद थी.
मेरी और रीमा मैडम की ऑंखें मिल गई.
रीमा मैडम ने में चुप रहने और छाया मैडम को यह बात ना बताने का इशारा किया और मेरे करीब आकर मेरे हाथ में एक सौ रूपये का नोट रख दिया.
अब अगले दिन मेरी हालत बुरी हो रही थी.
रीमा मैडम मुझे बार बार तिरछी नज़रों से देखती; फिर मुस्कुराती और फिर अपने होंठों को गोल कर के चूमने का इशारा करती.
जब सभी रवाना होने लगी तो छाया मैडम तो सीधी अपनी कार में चली गई.
उनका ड्राईवर आया था.
रीमा मैडम रुक गई.
भावना ; किरण और महक मैडम के जाने के बाद रीमा मैडम ने मुझे अपने पास बुलाया और बोली ” आज तुम मुझे छोड़ने चल रहे हो.
जाओ गाडी निकालो और मेरा इंतज़ार करो.
” अब मेरे पसीने छुटने लगे.
रीमा मैडम घर पहुँचने के बाद बोली ” तुम रुको मैं अभी आई.
” कुछ देर के बाद रीमा मैडम की अपने बेड रूम में से आवाज आई ” सुनो , तुम अन्दर आ जाओ .
” मैं जब अन्दर गया तो रीमा मैडम पलंग पर बैठी हुई थी और मुस्कुरा रही थी.
उसने मुझसे कहा ” अब तुम्हें वही करना है जो तुम छाया के साथ करते हो.
मेरी टांगें दर्द कर रही है.
अपने होंठों से जरा मालिश कर दो.
” अब मेरी हालत खराब हो गई.
लेकिन मन ही मन मैं खुश भी हो रहा था कि जिन टांगों को केवल उनके पति ही टच करते हैं मैं आज ना सिर्फ उन्हें अपने हाथों से मसल रहा था बल्कि उन्हें चूम भी रहा था.
रीमा ने पलंग के सामने एक स्टूल रख दिया और उस पर अपनी टांगें फैलाकर रख दी.
फिर मुझे उन दोनों टांगों के बीच में बैठ जानेको कह दिया.
अब मेरा काम शुरू हो चुका था.
रीमा बार बार अपने मुंह से कुछ मीठी मीठी आवाजें आह आह करके निकालती और मुझे यह सुन मजा और जोश आ जाता.
रीमा मैडम ने मुझे करीब आधे घंटे के बाद छुट्टी दी और मेरे हाथ में सौ रुपये दे दिए.

स्रोत:इंटरनेट