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Paro Naukrani Ki Chudai

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क्या बताऊँ दोस्तों, कितना मज़ा आया जब मैंने अपनी माल नौकरानी के मुह में अपना माल निकाला था और वो साली पूरा पी भी गयी.. अब चुदाई होगी! इस naukrani ki chudai ki kahani का आखिरी भाग.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. मैं जल्दी ही झड़ने के कगार पर पहुँच गया और जोर -२ से साँसे लेने लगा, वो समझ गयी और लण्ड को वापस मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी, तभी मेरे लंड ने पिचकारी मार दी जो सीधे उसके गले के अन्दर टकराई, वो रुकी नहीं और हर पिचकारी को अपने गले में समाती चली गयी…. और अंत में जब कुछ नहीं बचा , तभी उसने मेरा लंड छोड़ा.. “वाह …मजा आ गया…क्या स्वाद है इसका ….
लंड चूसने में तो मजा है ही…और इसके रस में भी मज़ा है …अभय .
“मुझे आज बहुत ही अच्छा लगा ये सब करके ”. (अब मेरी बारी थी चूत चाटने की). पारो भले ही सांवली थी पर उसकी चूत मस्त थी, गुलाबी रंग का छेद था और क्लिट लटका हुआ था।. अब नम्बर मेरा था कि उसकी सुखी चूत को रसयुक्त बनाऊँ, फिर में उसको अपनी बाँहो में लेकर बेड पर लेगया, वहाँ हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए ।. उसने मेरी गोटिया चूसना चालू कर दिया , मैंने कहा = हाय, इतनी चिकनी चूत देख मुझे इसे चूसने का मन कर रहा है। पारो = तो चुसो ना अभय इसे प्लीज़ ।.  . फिर मैंने पारो को अपने बिस्तर पर लिटा दिया , उसके चूत पर अपनी जीभ घुसा घुसा कर उसे चाटने लगा.
पारो 24 साल की हो कर भी किसी कुवारी लड़की से कम नहीं थी.
उसकी चूत और चूची में काफी कडापन था.
थोड़ी देर में उसकी चूत से मस्त नमकीन पानी निकालने लगा ।. मैं भी उसकी बुर के ऊपर उसकी महीन झाँटों को दाँतों से किटकिटाते हुए .. अपनी जीभ से उसके चूत के लाल लहसुन को चाटने लगा और बीच बीच में चूत के , दोनों होंठों को भी मुख में भर कर पी लेता था।. धीरे धीरे पारो की बुर जवान हो रही थी और कुछ फूल रही थी, मेरा भी 7 इन्ची लण्ड और उसका लाल सुपाड़ा पारो के मुख में हल्का हल्का.. अन्दर बाहर होकर अपना नमकीन लस्सेदार थोड़ा अलग स्वाद का पानी पारो को मस्त कर रहा था, वो पानी जो कि लसलसा था, पारो पूरा गटक जा रही थी।. अब मैं पारो के बुर की छेद को अपने होठों से दबाकर चुभक चुभक कर पीने लगा और अब पारो की सुखी बुर सूखी न रही, उसमें से भी हल्का नमकीन और हल्का सा खट्टा पानी का स्वाद मैं भी पा रहा था।. कुछ देर ऐसे ही पीने के बाद. मैंने अपनी जीभ पारो के बुर के छेद में डाल कर अन्दर का स्वाद चखने लगा , तभी पारो अनायास ही अपना कमर हिलाकर अपनी बुर मुझे मस्ती में पिलाने लगी।. मेरी जीभ पारो के बुर में अन्दर बाहर हो रही थी ,मैं अपनी जीभ पारो की बुर में घुमा घुमा कर चाट रहा था , मेरे हाथ पारो की मुलायम और महिन झाँटों से खेल रहे थे।. मैंने देखा पारो की बुर नशे के कारण फूल कर कुप्पा हो रही थी, मेरा लण्ड भी फुंफकार मार रहा था और अब मैं पारो के पूरे शरीर पर चुम्बन ले रहा था कभी कमर चूम रहा था, कभी चूची पी लेता, कभी उसकी झांटें चूम लेता और कभी उसका लाल लहसुन जीभ से मसल देता।. ऐसा करने से पारो सिसकारियाँ भर रही थी , वो भी मेरा लण्ड अपने मुख से निकाल कर कभी लाल सुपाड़े को अपनी जीभ से चाट लेती, कभी अपनी जीभ से पूरे लण्ड को जड़ तक चाटती हुई. कभी कभी मेरी भी झाँटों को अपने दाँतों से किटकिटा देती और कभी कभी मेरे दोनों अण्डों को चाटने लगती, और फिर सुपाड़े के छेद से वो निकलने वाला लसलसा पानी चाट लेती थी ।. फिर पारो ने वो किया जो सबसे मस्त था उसने अपनी लम्बी जीभ को मेरी गांड के छेद पर फिराना चालू कर दिया , उफ़्फ़ क्या अहसास था ….
दोस्तों ……. जब उसकी गीली जीभ मेरे गांड के छेद पर घूमती थी तो में जेसे जन्नत में ही पहुंच जाता था ।. वो अपनी जीभ को मेरी गांड के अंदर यूँ चला रही थी की जेसे मेरी गांड ही मार रही थी ।. बहुत देर तक यूं ही चलता रहा और फिर हम अलग हुए मुझे पेशाब लग रहा था, में बाथरूम की और गया तो पारो भी आ गई शायद उसको भी पेशाब लगा था।. आगे और भी सेक्सी आएगा …. फिर हम दोनों ने पेशाब किया और हमने अपना लण्ड चूत भी पानी से रगड़ कर धो ली ।. फिर हम नंगे ही रुम में आये और सोफे पर बेठ गए .
मैंने पारो से पूछा की केसा लगा मेरा लण्ड चूस कर…?. तो उसने मुझसे कहा कि “बहुत ही मजा आया और तुम्हारे लण्ड का पानी तो बहुत ही टेस्टी था अभय ”. सच में मुझे अच्छा लगा और जब तुमने मेरी चूत चूसी तो और भी मज़ा आया ।. अब रात के 10:30 बज चुके थे , आज मैंने बहुत सेक्स किया था , इसलिए थोड़ी थकावट सी महसूस हो रही थी ।. लण्ड भी ढीला हो गया था, लेकिन जब सामने नंगा बदन हो तो नींद कहाँ आती है , दोस्तों।. टीवी पर ब्लू फ़िल्म चल रही थी ।. पारो की चूत फड़क रही थी और मेरा लण्ड भी ।.  . उसका सांवला बदन मुझे फिर से उतेजित कर रहा था।. वो भी मेरी ही और गौर से देख रही थी, मेंने भी उसकी चूत की तरफ देखा और. फिर हाँ फिर , मैंने उसके बूब को जोर से दबा दिया, “उई सी सी सी अभय दर्द हो रहा है क्या करते हो ” वो बोली।. लेकिन फिर मुझसे अब रुका न गया और उसकी चूत में अंगुली डाल दी , और में अपनी अंगुली को लण्ड की तरह अंदर बहार करने लगा, और ये करते हुए में कभी कभी वही अंगुली मुंह में भी लेता था, मै उसके पानी को अंगुली से चाटने के बाद धीरे धीरे मै ऊपर की तरफ बढ़ा और उसकी चूची को मुह में ले कर चूसने लगा.
मेरा लंड तनतना रहा था,पारो ने मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी, पारो सिसियाने लगी थी: ह्म्म्म्मम अह्ह्ह सी सी आह अभय मज़ा आ रहा है चूसो और चूसो , फिर उसने अपनी आंखे बंद कर ली और पूरे पूरे मज़े लेने लगी.. मानो कि उसके शरीर के हर हिस्से को तराश कर बनाया हो, मैंने उससे कहा कि तुम बहुत ज्यादा सुंदर हो तो वो शरमा गई, फिर में उसके बूब्स और निप्पल चूसने लगा वो ज़ोर ज़ोर से जोश में आवाजे निकालने लगी और. मेरे सर को बूब्स पर ज़ोर से दबा रही थी और कह रही थी कि और ज़ोर से चूसो अभय ।. तो मैंने भी उसके बूब्स के निप्पल चूस चूसकर उसके गुलाबी निप्पल लाल कर दिए और में बहुत ज्यादा प्यार से सक कर रहा था।. फिर नीचे नाभि पर किस करते हुए चूत तक गया और उसकी चूत पर किस किया.. वो कामुक हो रही थी और किस करते ही उसकी चूत गीली हो गई,
स्रोत:इंटरनेट