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Pyasi Suhagan Hot Sexy Story

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जब मेरी शादी हुई तो मैं चुदने को बेताब थी, पर मेरा पति अपनी छोटी सी लुल्ली लेके आया और आते ही झड़ गया। मैं अपनी किस्मत पे रोई और ये सुहागन प्यासी ही रह गयी। एक hot sexy story पढ़िए.. मेरी शादी हुये लगभग चार साल हो चुके थे। कुछ अभागी लड़कियों में से मैं भी एक हूँ। शादी के दिन मैं बहुत खुश थी। लगा था कि जवानी की सारी खुशियाँ मैं अपने पति पर लुटा दूंगी। मैं भी मस्ती से लण्ड खाऊंगी …. कितना मजा आयेगा। पर हाय री मेरी किस्मत … सुहाग रात को ही जैसे मुझ पर वज्र प्रहार हुआ। मेरा पति रात को दोस्तों के साथ बहुत दारू पी गया था। आते ही जैसे वो मुझ पर चढ़ गया। मेरे कपड़े उतार फ़ेंके और खुद. भी नशे में नंगा हो गया। लण्ड देखा तो मामूली सा … शायद पांच इन्च का दुबला सा … जैसे कोई नूनी हो … एक दम कडक … मैंने भी लण्ड खाने के लिये अपनी टांगे ऊपर उठा ली … तेज बीड़ी की सड़ांध उसके मुख से आ रही थी. जो दारू की महक के साथ और भी तेज बदबू दे रही थी। मैंने अपना चेहरा एक तरफ़ कर लिया, राह देखने लगी कि कब उसका लण्ड चूत में जाये और मेरी जवानी की आग बुझाये। वो दहाड़ता हुआ मेरे से लिपट गया और अपना लण्ड घुसेड़ने की कोशिश करता रहा। जैसे तैसे उसका लण्ड घुस ही गया, मैं आनन्द से भर गई तभी मेरी चूत में जैसे कीचड़ सा भर गया। वो झड़ चुका था। मैं तड़प कर रह गई। मैंने उसे धक्का दे कर एक तरफ़ किया और उठ कर बाथरूम में जाकर अंगुली चला कर अपना पानी निकाल लिया। अब वो नशे में बेसुध पड़ा खर्राटे भर रहा था।. “साली … रण्डी … चोद कर क्या मिल गया … साली चुदी चुदाई है !” सवेरे मेरा पति मुझ पर गुर्रा रहा था। उसकी मां ये सब सुन रही थी। पर शायद वो उनके बारे में जानती थी।. “चुप रहो … ऐसी गन्दी बातें करते हुये शरम नहीं आती … “मैंने धीरे से उलाहना दिया।. “तो बता तेरे भोसड़े में से खून क्यों नहीं निकला रात को … ?”. “वो तो आपका करते ही निकल गया था।” मेरी बात सुन कर उसकी मां सर नीचे करके चली गई।. बस अब दिन-ब-दिन यूं ही झग़ड़ा होने लगा। मैंने अपने पति के पास सोना बन्द कर दिया।. एक दिन वो बिना दारू पिये … और बिना बीड़ी पिये मेरे पास आये तो मुझे लगा शायद ये सुधर गये हैं। पर लण्ड घुसाते ही वो झड़ गये … अब वो मुझ पर हर रोज़ कोशिश करते, पर नहीं बना तो नहीं बना … मैं अब जान गई थी कि ये काम के नहीं है। मैं मन ही मन सुलगती रहती थी। लगा मेरी जवानी यूँ ही चली जायेगी … यह कसक मन में उठने लगी थी। परिस्थितिवश मेरी निगाहें अब घर के बाहर उठने लगी थी।. मेरी सहेली नसरीन मेरी सभी बातें जानती थी। मेरे दिल की आग की लपटें वो भी महसूस करती थी।. “रेहाना, मेरा चचेरा भाई आज आ रहा है … तू कहे तो तुझे उससे मिलवा दूँ !” “नहीं, मम्मो … मुझे शरम आवेगी … जाने दे !”मैं उसकी बातों से सकपका गई थी। पर वो जानती थी कि दबी चिंगारी से मैं कैसे जल रही थी। दूसरे दिन सवेरे ही मोबाईल पर नसरीन ने मुझे खबर भेजी कि भैया आ गया है … बस एक मिनट के लिये मिलने आजा।. मैं सोच में पड़ गई, कि कैसा होगा … कहीं यह भी मेरे पति जैसा ना हो। इसी उधेड़बुन में मैं उसके यहाँ पहुंच गई। “अल्लाह रे अल्लाह … ये … तेरा भाई है … ? !!” यूनानी मूर्ति की तरह एक हसीन लौण्डा सामने मुस्कुरा रहा था। मैं तो उसे देखते ही जैसे घायल सी हो गई। मैंने अपने लिये इतने हसीन नौजवान की कल्पना. तक नहीं की थी।. “चुप हो जा रेहाना … मस्त लण्ड है इसका … जैसे मुझे चोदता है ना … तुझे भी भचक-भचक करके चोद देगा … देख है ना छः फ़ुटा … गोरा चिट्टा … पहलवान … !”. “मेरे मौला … इसकी पोन्द कितनी मस्त है … तू भी उससे चुदाती है ?”. “ऐसी मस्त चीज़ को भला मैं हाथ जाने देती … ये मेरी किस्मत का है रेहाना !”. मम्मो मुस्करा उठी। उसकी कसी हुई जीन्स देख कर जैसे मैं तड़प उठी। यही है जिसकी बात मम्मो कर रही थी। ये तो मुझे पूरा लूट ही लेगा।. “ऐ मोडी … हां तू … इसे अन्दर रख दे … ! ” सौहेल ने पुकार कर कहा। मैंने अपनी तरफ़ अंगुली कर के कहा,”क्या मैं … ?” मैं झिझकते बोली। “अरे … आप … ! आप कौन है … ! आं हां … नहीं मोहतरमा, मैं तो सुरैया को बुला रहा था।” उसने मुझे घूर कर देखा। मैं शर्मा सी गई। मैं तो दिल ही दिल में उस पर मर मिटी। वो धीरे धीरे चलता हुआ मेरे करीब आ गया … “आप तो बहुत खूबसूरत है … खुदा ने कैसा तराशा है … !” उसने मुझे नीचे से ऊपर तक देखा।. “हाय अल्लाह … तेरे अकेले पर ही जवानी फ़ूटी है क्या … “मैंने उसे गाली सी दी और हंस पड़ी।. “नहीं आप पर जवानी फ़ूट रही है … जरा कभी आईने में देखो … बला की खूबसूरती है आप में !” वो बेशर्मी से बोले जा रहा था।. “मर जा मरदूद … आग लगे तेरी जवानी को … ” मैं उसकी बेबाकी पर उसे गालियाँ देने लगी।. “अरे रेहाना … सौहेल का प्यार भरा पैगाम कबूल तो कर ले !” मम्मो ने मुझे बहलाया।. “हाय री मम्मो देख तो कैसी मुह-जोरी कर रहा है !” फिर मैंने एक तिरछी नजर की उस पर कटार चलाई। लगा कि तीर दिल पर चल गया है। मैंने मुस्करा कर उसे देखा। अब तो वही मेरा तारणहार था … उसे मेरा. उदघाटन करना था … मेरा उद्धार करना था। मेरी मुस्कराहट को उसके मेरा जवाब समझ कर मुस्करा दिया।. तभी नसरीन उसके पास गई और उसके कान में कुछ कहा। उसने अपना सर हिलाया और वो नसरीन के पीछे पीछे चल दिया। नसरीन ने मुझे आंख मार कर इशारा कर दिया। मेरा दिल धड़क उठा। क्या मामला अभी … नहीं … नहीं … इतनी. जल्दी कैसे होगा।. पर नजर का जादू चल जाये तो क्या जल्दी और क्या देर … मेरा घायल दिल और परेशां दिमाग … खुदा की मरजी … हाय मेरे दिलदार … मन की कश्ती मौजों से घिर गई। मेरे कदम नसरीन के कमरे की ओर बढ़ चले।. “दिल नर्म … जबां गरम … जिस्म शोला … जाने किस की जान लोगी !”. “हाय अल्लाह … ऐसे ना कहो … ! ” मैं शर्म से जैसे लाल हो गई।. “जवानी बला की, खूबसूरती जहां की … तन तराशा हुआ … खुदा ने जवानी की यही तस्वीर बनाई है !” सौहेल मेरे गुणगान में लगा था। मेरी उलझी हुई लटें मेरे चेहरे पर आ गई। जुल्फ़ों के बीच में से मैंने उसे देखा … वो जैसे तड़प उठा,” सुभान अल्लाह … ये हंसी चेहरा … जनाब का क्या इरादा है।” सौहेल को आशिकाना लहजे में देख कर नसरीन वहाँ से चली गई। सौहेल मेरे करीब आ गया।. “आदाब … सौहेल जी !”मैंने झुकी पलकों और चुन्नी में चेहरे को लपेटे शरमाते हुये कहा।.
स्रोत:इंटरनेट