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Saheli Chudai Threesome Sexy Kahani 2

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“यह राधिका भी ना साली ! इतने कपड़े पहन कर चुदा रही है… ले और चूस दे मेरी चूत !” कोमल कुछ असहज सी बोली।. “तू बहुत खराब है … जीजू को सामने ही देखते हुये मुझे चुदवा रही है !” राधिका ने कोमल से नजरें चुराते हुये शिकायत की।. “चल हट … इच्छा तो तेरी थी ना चुदने की … अब जी भर कर चुदा ले… अरे ठीक से मसलो ना विनोद !”. मैं तो हांफ़ रहा था … शॉट बड़ी मुश्किल से लग रहे थे। कभी कोमल तो कभी राधिका के भारी भरकम कपड़े…।. अचानक कोमल ऊपर से उतर गई और मुझे भी उतार दिया और राधिका के कपड़े उतारने लगी।. “ना करो, मने सरम आवे है …” वो अपनी गांव की भाषा पर आ गई थी। “ऐसे तो ना मुझे मजा रहा है और ना विनोद को…!” कुछ ही देर में हम दोनों ने राधिका को नंगी कर दिया। वो शरम के मारे सिमट गई। उसकी प्यारी सी गोल गाण्ड उभर कर सामने आ गई।. “विनोद चल मार दे इसकी…साली बहुत इतरा रही है, इतने नखरे मत साली… मेरे पास भी ऐसी ही प्यारी सी चूत है… पर मेरा विनोद तो तुझ पर मर मिटा है ना !” मुझे तो उसकी सेक्सी गाण्ड देखकर नशा सा आ गया। मैं उसकी पीठ से जा चिपका और उसके चूतड़ों के बीच अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। कोमल ने मेरी मदद की और उसकी गाण्ड में ढेर सारी क्रीम लगा दी।. “काई करे है… म्हारी गाण्ड मारेगो … बाई रे… अरे मारी नाक्यो रे … यो तो गयो माईने !” जोश में राधिका अपनी मूल भाषा पर आ गई थी।. “राधिकाजी, आप राजस्थान की भाषा बोलती है… वहां भी रही है क्या ?” मैंने आश्चर्य से कहा। “एक तो म्हारी गाण्ड मारे, फिर पता और पूछे… चाल रे, धक्का मारो नी सा …” मुझे क्या फ़रक पड़ता था भला ! मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। राधिका की चिकनी गाण्ड चुदने लगी। उसकी सिसकारियाँ भी तेज होने लगी। मुझे वो सब मजा मिल रहा था जिसकी मैं राधिका के साथ कल्पना करता रहा था। कोमल. भी राधिका के नाजुक अंगों से खेल रही थी। मैंने कोमल का हाथ राधिका के स्तनों से हटा दिया और उसे मैंने थाम लिया। कोमल ने अपनी अंगुली में थूक लगाया और मेरी गाण्ड में धीरे से दबा कर अन्दर कर दी। मुझे इस. क्रिया से और आनन्द आने लगा। मेरा लण्ड फ़ूलता जा रहा था। राधिका की टाईट गाण्ड चोदने में मुझे अपूर्व आनन्द आ रहा था। उसकी टाइट गाण्ड ने मेरी जान निकाल दी और मेरा वीर्य निकल पड़ा। मेरा ढेर सारा वीर्य. उसकी गाण्ड में भरता चला गया।. राधिका की गाण्ड मार कर मैं बिस्तर से उतर गया। राधिका ने कोमल की तरफ़ वासना युक्त नजरों से देखा। कोमल को तो बस इसी बात का इन्तज़ार था। वो मर्दो की भांति राधिका पर चढ़ गई और अपनी चूत को उसकी चूत से टकरा. दिया। राधिका ने आनन्द के मारे आंखें बन्द ली। कोमल ने अपनी चूत की रगड़ मारी और दोनों का गीलापन चूत पर फ़ैल गया। दोनों ने एक दूसरे के स्तन भींच लिये और मसलने लगी। अपनी चूत को भी एक दूसरे की चूत से. रगड़ने लगी।. “हाय रे कोमल, मुझे तो कड़क लण्ड चाहिये … चूत में घुसेड़ दे… हाय विनोद … मुझे लण्ड खिला दे…” “अभी उसका ठण्डा है, खड़ा तो होने दे … तब तक मेरी चूत का मजा ले… देख मैंने भी यह खेल बहुत दिनों के बाद खेला है … लण्ड तो अपन रोज ही लेते हैं !” “पर विनोद का लण्ड तो मैं अपनी चूत में पहली बार लूंगी ना…” राधिका कसमसाते हुये बोली।. “अरे, अभी तो पेला था उसने…” वो तो गाण्ड मारी थी … चूत तो बाकी है ना … विनोद… प्लीज आ जाना…”. उसकी बातें सुन कर मेरा लण्ड फिर से तन्ना उठा। मैंने कोमल को अपना लौड़ा दिखाया तो वो अलग हो गई। मैंने राधिका की टांगें ऊपर करके उसे चौड़ा दी और अपना लण्ड हाथ से थाम कर उसे धीरे से अन्दर तक पिरो दिया।. और एक दो बार हिला कर अन्दर तक पूरा घुसेड़ कर जड़ तक सेट कर दिया। फिर उसके ऊपर आराम से लेट गया। उसके बोबे मैंने थामे और उसे भींच कर, अपने होंठ उसके होठों से सेट कर दिए। उसके दोनों हाथ मेरे चूतड़ों पर कस गये थे। लण्ड को चूत की गहराइयों में पाकर वो आनन्दित हो रही थी। लण्ड उसकी बच्चेदानी के छेद के समीप पहुंच गया था। उसने मुझे कस कर पकड़ा हुआ था। चुदाई की रफ़्तार मैंने आनन्द के मारे तेज कर दी थी। मैं. उसकी चूत में लण्ड को ऊपर नीचे रगड़ कर चोदने लगा था । उसके होंठ जैसे फ़ड़फ़ड़ा कर रह गये… मेरे अधरों से चिपके उसके होंठ जैसे कुछ कहना चाहते थे। उसका जिस्म वासना से तड़प उठा। उसकी चूत भी ऊपर उठ कर लण्ड. लेने लगी। दोनों जैसे अनन्त सागर में गोते लगाने लगे। चुदाई चलती रही। वो शायद बीच में एक बार झड़ भी गई थी, पर और चुदने की आशा में वो चुपचाप ही रही। उसकी फ़ूली हुई चूत मेरे लण्ड को गपागप खा रही थी। हम दोनों एक दूसरे को बस रगड़ कर चोद रहे थे, समय का किसे ज्ञान था, जाने कब तक हम चुदाई करते रहे। दूसरी बार जब राधिका झड़ी तो इस बार वो चीख सी उठी। मेरी चुदाई की तन्मयता भंग हो गई, और मेरा लन्ड भी फ़ुफ़कारता हुआ, किनारे पर लग गया। वीर्य लावा की तरह फ़ूट पड़ा … और उसकी चूत में भरता गया। “हाय बस करो … आगे पीछे सब जगह तो अपना माल भर दिया … बस करो…”. कोमल पास में बैठी अपनी चूत को अंगुली से चोद रही थी, अपने दाने को हिला हिला कर अपना माल निकालने की कोशिश कर रही थी। हम दोनों ने उसकी सहायता की और मैंने उसकी चूत में अपनी अंगुली का कमाल दिखाना आरम्भ कर दिया। उधर राधिका ने उसके मम्मे मसल कर और उसके अधरों को चूस कर उसे मस्त करने लगी। कोमल की चूत के दाने को मसलते ही वो तड़प उठी और झड़ने लगी।. “हाय विनोद… मैं तो गई… आह निकल गया … साले मर्दों के हाथ की बात तो मस्त ही होती है… कैसा हाथ मार कर मेरी जान निकाल दी !”. हम तीनों सुस्ताने लगे। कोमल उठी और कुछ ही देर में दूध गरम करके ले आई।. “लो कमजोरी दूर करो और दूध पी जाओ !”. हम सभी धीरे धीरे दूध पीने लगे … तभी राधिका को जैसे खटका हुआ। उसने फ़टाफ़ट अपने कपड़े पहने और अपने आप को ठीक किया और तेजी से भाग निकली।. “अरे ये राधिका का आदमी आज जल्दी कैसे आ गया?” हम दोनों ही आश्चर्य कर रहे थे। थोड़ी ही देर में उनके झग़ड़े की आवाजे आने लगी।. “क्या कर रही थी अब तक… खाना क्यो नहीं पकाया … मेरा बाप बनायेगा क्या ? बहुत तेज भूख लगी है।”. हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और हंस पड़े।. “उसकी मां चुदने दे यार … आज छुट्टी ली है तो उसका पूरा फ़ायदा उठायें !” मैंने मुस्करा कर कहा. दोस्तों आपको मेरी यह मस्त threesome sexy kahani जरुर पसंद आई होगी. और भी के लिए आते रहिये my hindi sex stories पर.
स्रोत:इंटरनेट