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Sasur Bahu Pipasa Bahu Porn Stories

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ससुर जी बड़ी गरमजोशी के साथ अपनी बहु को चुदवा रहे थे और बहु उछल उछल के मज़े दे रही थी.
इन ससुर बहु की जुगलबंदी की bahu porn stories का अगला गरमा गरम भाग- Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. विक्रम साहब ने बादल की लचीली टांगें हवा में उठा उसके गोरे नितम्ब समलैंगिक सहवास के योग्य व्यवस्थित किये हुए थे.
तेल से चिकना किया हुआ मलाशय बहुधा अभ्यास के कारण घनिष्ठ लौड़ा आसानी से हज़म कर रहा था.
बादल की ढीली नपुंसक लुल्ली उसकी गाण्ड में हो रहे सशक्त हमले का उत्तर देते हुए उसके स्वयं के पेट पर तमाचे मार रही थी.
नेपाली बादल कामिनी की चूत का रस चखने के साथ-साथ अपने पिछवाड़े की खुजली भी शांत करा रहा था.
मालिक के शिश्न को अपनी पखाना-निर्गम संवरणी से पकड़कर गरम नर-सुरंग में कैद किये हुए था.
फच… फच… फच चपत जमाने की ध्वनी समलिंगी व्यभिचार की घोषणा कर रही थी.
“बहु विक्रम साहब को चुम्बन तो दो.
” दृश्य का मज़ा लते हुए ससुर ने बादल से चूत चटवाती कामिनी को सुझाव दिया.
सुन्दर नेपाली नौकर बादल का चेहरा बहु के मांसल चूतड़ों के नीचे छिपा हुआ था.
कामिनी आगे बढ़ कर अपने प्रेमी विक्रम काका के होठ चूमने लगी.
दास की नर-गुदा सम्भोग करते विक्रम साहब अपनी रखैल की जीभ को चूसने लगे.
बादल औरत और मर्द दोनों का आनंद उठा रहा था.
 . “कामिनी डार्लिंग, बादल के मुख को अपने गुप्तांग से दबाकर ज़ोंर से रगड़ो.
यह स्वपीड़न-कामुक है, इसे पीड़ा सह कर कामोन्माद प्राप्त होता है.
” विक्रम साहब ने कामिनी का मार्गदर्शन किया.
कामिनी ने अपना पूरा वज़न गांडू बादल का चेहरा दबोचने में लगा दिया.
गुदा-मैथुन कराता बादल अपने सर के ऊपर कामिनी की चिकनी नशीली योनी की हुकूमत का मज़ा लेने लगा.
कामिनी बादल की निर्बल लुल्ली हिलाने लगी, उसके लघु अंडकोष के नीचे विक्रम साहब का खम्बा पिस्टन की तरंह नर-योनी के अन्दर-बाहर हो रहा था.
कामिनी प्रेमी की लौंडेबाज़ी में भाग ले कर संतुष्ट थी, उत्तेजित बुर देख-भाल स्त्रैण बादल कर रहा था.
 . “विक्रम काका, आप कहाँ पानी निकालेंगे?” कामिनी ने पूछा.
 . “बस निकलने वाला है कामिनी डार्लिंग, बादल को मुक्त करो यही मेरा पानी निगलेगा.
” कामिनी विक्रम साहब की बात मानते हुए अर्धनग्न अवस्था में सोफे पर खड़ी हो गई.
कुछ ही पलों में साहब ने बादल की पखाना-निर्गम सुरंग से अपना लण्ड निकाला और समलिंगी नेपाली नौकर के पूरे खुले हुए मुंह में खाली कर दिया.
सुरूप बादल पूरा वीर्ये बेसब्री से पी गया.
 . ससुर ताली बजाने लगे, “देखो बहु बादल का पुष्ठभाग कैसे कली से पुष्प बन गया है.
” कामिनी ने ससुर के कहने पर देखा की वाकई नेपाली गांडू का गुदा-द्वार सुर्ख लाल था और चुदाई से फैल गया था.
बेडरूम से छप-छप, फच-फच सुनाई देते मंद स्वर मैथुन का संकेत थे .
विनोद ने जिज्ञासापूर्वक विक्रम साहब के शयनकक्ष की ओर कदम बढ़ाए .
थोड़े से खुले हुए किवाड़ में झाँका तो देखा की विक्रम साहब चुदाई के जोश में खोए हुए थे .
काम-क्रिया का परिश्रम करते हुए वर-वधु गंदे शब्द चिल्ला रहे थे .
दम्पति का केवल निचला नग्न भाग विनोद वागले की दृष्टि में था .
बिस्तर पर उलझे हुए जिस्मों का ऊपरी शेष भाग दरवाज़े से ताक- झाँक करता विनोद नहीं देख पा रहा था .
“ऐसे ही चुदवाया करो रानी , आज तो योनिमार्ग अतिशय गीला है .
” विक्रम साहब अपनी रखैल कामिनी वागले की शुद्धता लूटते हुए पुकार रहे थे .
वह इस हक़ीक़त से अनजान थे की उनकी प्रियतमा का कानूनी स्वामी कमरे के बाहर था .
 . शयनकक्ष के फ़र्श पर बिखरी हुई साड़ी विनोद वागले को जानी-पहचानी लग रही थी .
कुर्सी पर ब्रा और पेटीकोट फेंका हुआ था .
विक्रम साहब के नीचे चुदती विनोद की जोरू के पायल पहने मनमोहक पैर हर धक्के के समकालीन हिल रहे थे .
इतनी देर में विक्रम साहब का नौकर बादल आ गया और विनोद वागले को कमरे में झांकता हुआ पाया .
विनोद की बादल से नज़रें मिली तो वह झेंप गया और तुरंत बैठक में वापस आ गया .
 . “कैसे आना हुआ विनोद बेटे, माफ़ करना तुम अनचाहे हमारी यौन लीला के साक्षी बने .
तुम तो जानते हो हम कितने रंगीले आदमी हैं .
” बादल की हिदायत पर कुछ समय पश्चात् विक्रम साहब कामिनी को बेडरूम में छोड़ कर विनोद से मिलने आये और हँसते हुए दिल्लगी करने लगे .
 . “मालिक मैंने कुछ नहीं देखा .
पिताजी ने आपके बगीचे की घास काटने को कहा था, वही रख-रखाव करने आया हूँ .
” सम्भोग करती हुई पत्नी की बिखरी साड़ी पर ध्यान देने के बावजूद, बुद्धिहीन विनोद को कुछ संदेह नहीं हुआ .
 . गाउन पहने विक्रम साहब मूर्ख विनोद वागले की अनभिज्ञता से आश्वस्त हो गए .
बगल के कमरे से विनोद की व्यभिचारिणी बीवी अपने पति और प्रेमी का वार्तालाप सुन रही थी .
समागम से श्वासहीन, बेकपड़ा कामिनी वागले हाथ-पैर पसारे बिछौने पर ढेर थी .
उसके सघन वक्षस्थल पर गाढ़ा श्वेत वीर्ये फैला हुआ था .
 . “धन्यवाद विनोद, तुम और तुम्हारे पिता हमारी कितनी सेवा करते हो .
आज संध्या की फैंसी-ड्रेस पार्टी में क्या तुम बादल के साथ मदिरा सेवन में मदद कर सकते हो? हमारे थोड़े विशिष्ट अतिथि आयेंगे .
सब लोग मुखौटा लगाए होंगे ताकि किसी को कोई पहचान न सके .
” विक्रम साहब ने विनोद वागले को कार्य सौंपा .
 . “अवश्य मालिक, मैं अभी बागबानी करके जाता हूँ और साँझ को साफ़ कपड़े पहन कर काम करने आ जाऊँगा .
” विनोद आश्वासन दे कर चला गया .
विक्रम साहब वापस बेडरूम में विनोद की स्वच्छंद धर्मपत्नी और अपनी रखैल कामिनी वागले के पास गए .
 . “विक्रम काका यह आपने क्या कर दिया, इनके होते हुए मैं पार्टी में कैसे शामिल हो पाऊँगी ?” कामिनी ताज्जुब थी .
”  . “चिन्ता मत करो डार्लिंग, तुम तो स्कूली-छात्रा वाली वर्दी पहन रही हो और फिर मुखौटा भी पहने होगी .
तुम्हारा बेवकूफ पति तुम्हें नहीं पहचान पायेगा .
” विक्रम साहब ने अपनी सुन्दर प्रेयसी को साहस दिलाया .
“इस हथिनी जैसी चाल वाली छात्रा से हमारी भेंट तो कराओ विक्रम .
” बनावटी फ़ौजी-वर्दी पहने नकाबपोश मंत्री जी ने अनुरोध किया .
कामिनी श्वेत स्कूली-वर्दी की स्कर्ट पहने मटक-मटक कर पार्टी में आए कुलीन लोगों के साथ घुल-मिल रही थी .
सब मेहमान मुखौटों के पीछे अपने चेहरे छिपाए हुए थे .
कामिनी ने भी मुखमंडल मुखौटे से ढका हुआ था और हाथ में मदिरा का ग्लास लिए थी .
ड्रिंक्स बांटता हुआ विनोद अपनी मास्क-पहनी गृहणी को अपर्याप्त एवं उकसाने वाले वस्त्र पहनी कोई वेश्या समझ रहा था .
आख़िरकार ऐसी शिक्षालय वाली लघु स्कर्ट कोई रंडी ही सँभाल सकती थी .
कामिनी की मोटी टांगें घुटनों से नीचे अनाश्रित थीं .
उसने कन्याओं वाली दो चोटियाँ कर रखी थीं .
पाँव में विद्यार्थियों वाले जूते और चोली के स्थान पर वर्दी की सफ़ेद कमीज़ पहनी थी .
तंग पोशाक में से कामिनी का सुडौल शरीर फ़ूट-फ़ूट कर निकल रहा था .
“अवश्य मंत्री महोदय, यह हमारी सजनी कामिनी है .
यह आपको हमारे बँगले का दौरा कराएगी .
” विक्रम साहब ने कामिनी को देख आँख मारी और ध्यान दिया की उनकी बातें विनोद की श्रवणसीमा में न हों .
दावत बाग़ में ज़ोरों से चल रही थी, उच्च्वर्गिये लोग विभिन्न प्रकार के वेषों में आये हुए थे .

स्रोत:इंटरनेट