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Sasur Pipasa Bahu Hindi Sex Story 3

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 . विनोद की नर-योनी में आग लगी हुइ थी, उसने एक हाथ पीछे करके चालक के लौड़े को पकडा और अपने लुभावने गुलाबी छेद पर रगड़ने लगा .
ड्राइवर के थूक से गीली नर-योनी ने सटाक से के पहाड़ी-आलू जैसे सुपाड़े को निगल लिया .
 . “आह… ड्राइवर जी , हाँ ऐसे ही, आह… ” विनोद सातवें आसमान में था .
 . चालक ने खचाक से एक जोरदार धक्का मारा .
विनोद की उठी हुई गीली नर-योनी ने झट से पुरे डंडे को निगल लिया .
पुरा लण्ड अपने मलाशय में लेकर विनोद ने मीठे दर्द के कारण अपनी आँखें बंद कर लीं .
ड्राइवर ने विनोद की कमर पकड़ कर उसके चूतड़ उठाए और उसकी नाज़ुक संकोचक-पेशी को भंग करते हुए दो-तीन और धक्के लगा दिये .
विनोद कराहने लगा तो कामिनी ने उसे एक और ज़ोरदार तमाचा मारा .
 . “चिल्लाइये मत, चुपचाप स्वीकार कीजिये .
आपकी इतने समय से समलिंगकामुक इच्छाएं थीं अब ड्राइवर जी गुदा-सहवास कर रहे हैं तो आप कृतज्ञ हो कर अपना आभार प्रकट कीजिये .
” कामिनी पति को फटकारने लगी .
 . “क्षमा चाहता हूँ ड्राइवर जी, कृपया निर्दयी हो कर अपने भाले से हमला कीजिये .
मैं आपका गुलाम हूँ, मुझे नववधू के समान लूटिये .
मेरा थरथराता छेद आपकी संपत्ति है, इसे कृपया अपना पानी देकर सींचिये .
” गांड मरवाता विनोद कामुक वार्तालाप करने लगा .
 . ड्राइवर की समझ में नहीं आ रहा था की गांड मारने में इतना हर्ष मिलता है .
उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके लौड़ा गरम भठ्ठी में मंत्रमुग्ध है .
विनोद वागले पूरा सहयोग देता हुआ पीछे उचक-उचक कर गांड मरवा रहा था .
नर-योनी के रस से चमचमाता हुआ लिंग चालक ने बाहर निकाला फिर तेज़ी से विनोद की लाल सुरंग में वापस पेल दिया .
ड्राइवर खचाक-खचाक धक्के लगाने लगा .
पखाना-निर्गम नली में शिश्न ऐसे उपयुक्त था जैसे ओखली में मूसल .
विनोद की नर-योनी चुद चुद कर खिल गई थी .
मोटे लण्ड को खा कर अनचुदी नर-योनी बौरा कर पुष्पित हो गई थी .
कठोर लौड़ा मलाशय की दीवारों से एकदम चिपक कर रगड़ता हुआ पूरा अन्दर तक घुस जाता था और फिर उसी तरह से गुदा की दीवारों का घर्षण करते हुए सुपाड़े तक सटाक से निकल कर फिर से घुसने के लिये तैयार हो जाता था .
विनोद की मेहमान-नवाज़ प्रताड़ित नर-योनी में चालक का काला नाग अब सटा-सट अन्दर बाहर हो रहा था .
गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी कामिनी बगल में विराजमान मंत्रीजी के खड़े हुए लौड़े को हिला रही थी .
मंत्रीजी कुलटा औरत की गीली बुर में उंगल कर रहे थे .
कामिनी के पति को चुदते देख मंत्रीजी उत्तेजित हो रहे थे .
कामिनी भी समलैंगिक ठुकाई देख अति प्रसन्न थी .
गुदा बजवाते विनोद ने अपनी हथेली पर ढेर सारा थूक निकाला और हाथ तान कर मंत्रीजी के लाल सुपाड़े पर धीरे-धीरे अपनी राल का लेप करने लगा .
लौड़े के तने को तो कामिनी हस्तमैथुन कर रही थी और अब सुपाड़े पर विनोद अपनी लार का मक्खन सजा रहा था .
मंत्रीजी और विनोद एक दुसरे से नज़र मिलाकर मुस्कुराने लगे .
 . फिर विनोद ने गरदन मोड़ कर अपने आशिक़ को देखने की कोशिश की परन्तु धक्कों की रफ़्तार इतनी तेज़ और झटकेदार थी की उसका सर फिर गिर गया .
विनोद के मूंह से ऊँचे स्वर में सिस्कारियां निकल रहीं थीं और वह अपने कूल्हे उठा-उठा कर सशक्त स्तम्भ निगल रहा था .
लण्ड सीधा उसकी जलती हुई नर-योनी पर ठोकर मार रहा था और विनोद बार-बार सुखद चीखें निकाल रहा था .
विनोद की समलैंगिक अभिलाषा सम्पूर्ण हो रही थी .
आज उसको बहुत दिनों के बाद ऐसा अनोखा मज़ा आ रहा था .
ड्राइवर और विनोद वागले, दोनों कुत्ते -कुत्तिया की तरंह हांफ रहे थे और हिलती हुई गाड़ी में गच-गच, फच-फच की आवाजें गूँज रही थीं .
 . “तुम अब पीछे आ जाओ .
तुम्हारी यौन-क्रिया देख हमें विनोद के पिछवाड़े में इंजेक्शन लगाने की चाह हो रही है .
” मंत्रीजी ने गांड मारते हुए चालक को आदेश दिया .
ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकल कर पीछे की सीट पर आ गया और मंत्रीजी अधनंगे ही आगे की सीट पर चले गए .
 . कुत्ता बना हुआ विनोद मस्त हो कर गांड हवा में लहरा रहा था .
मंत्रीजी ने मोर्चा संभाला और विनोद की खुली हुई पखाना-निर्गम सुरंग में अपना लिंग पेल दिया .
अकस्मात प्रहार से विनोद चिल्लाया और अपनी तंग गुदा-संवरणी को शिश्न पर व्यवस्थित करने लगा .
थोड़ी ही देर में नर-योनी की लचीली अवरोधिनी ने शिथिल हो कर अपना मुंह खोल दिया और मंत्रीजी का उत्तेजित लण्ड सुगमता से हज़म करने लगी .
 . “आह… ऐसे ही धक्के मारिये मंत्रीजी, आह… आह… बहुत आनंद आ रहा है आपका लिंग निगल कर .
मैं आपकी दुल्हन हूँ मुझे अपवित्र कीजिये .
आह… आह… ” विनोद चुदासा हो कर मंत्रीजी को प्रेरित कर रहा था .
 . “लो विनोद, पूरा लो, वाकई तुम्हारी प्रचण्ड सुरंग कसी हुई है .
तुम्हारी खुजली मिटाते हुए हमारे साथी की जकड़ कर मालिश हो रही है .
” मंत्रीजी गांड मारने का लुत्फ़ उठा रहे थे .
 . पीछे की सीट पर कामिनी पेटीकोट चढ़ा कर नंगी लेट गई और अपनी दोनो टांगो को घुटनो के पास से मोड कर फैला दीया .
ड्राइवर अपना खम्बा हाथ में लेकर जल्दी से कामिनी की दोनो जांघो के बीच में आया और योनी पर लगा कर हल्का सा झटका दिया .
लण्ड का सुपाड़ा रंडी की भोसड़ी में घुस गया .
काला सुपाड़ा घुसते ही कामिनी ने अपनी गांड उचका दी, मोटा पहाड़ी आलू जैसा सुपाड़ा पुरा घुस गया .
विवाहिता औरत की फुद्दी एकदम गरम भठ्ठी की तरह थी .
चूत की गरमी को पाकर ड्राइवर का लौड़ा फनफना गया .
पानी छोड रही बुर में लिंग कच से फिसलता चला गया .
कुंवारी लौंडिया होती तो शायद रुकता, मगर यह तो बाज़ारू राण्ड की सैंकड़ों बार चुदी हुई चूत थी .
काला नाग योनी में कामिनी को महसूस हो रहा था जैसे मोटा लोहे का डन्डा गरम करके डाल दिया हो .
लण्ड गीली योनी के आखिरी कोने तक पहुँच कर ठोकर मार रहा था .
 . “हाये… ड्राइवर जी आपका केला बहुत मज़ेदार है .
देखिये मेरी योनी कितना पानी छोड़ रही है .
हाये.. हाये… ” कामिनी बुर चुदवाने में मस्त थी, उसकी गोश्तदार जंघाएँ और सुन्दर चूतड़ मैथुन को सुहावना बना रहे थे .
चुदाई से पूरी गाड़ी हिल रही थी .
 . ड्राइवर का लण्ड बुर को कुचल रहा था .
अन्दर घुसते समय चूत के दुप-दुपाते छेद को पुरा चौड़ा कर देता था और फिर जब बाहर निकलता था तो भगोष्ठ की पत्तियां अपने आप सिकुड़ कर छेद को फिर से छोटा बना देती .
बडे होठों वाली वेश्या की गुदाज चूत गद्देदार और तंग थी .
योनी के होठों में लौड़ा धंसाते हुए ड्राइवर तेज़ी से आक्रमण कर रहा था .
कामिनी आहें भर रही थी, उसका पति विनोद भी सिस्कारियां ले रहा था .
 . आगे की सीट पर गुदा-सम्भोग करते हुए मंत्रीजी विनोद के लुल्ले को अपना हाथ बढ़ा कर नीचे से सहला रहे थे .
गांड मरवाते हुए विनोद का लुल्ला मंत्रीजी की मुट्ठी में तन गया था .
मलाशय के भीतर चोट मारते हुए मंत्रीजी का अंडकोष विनोद के लटके हुए टट्टे पर तमाचा मार रहा था, विनोद की लुल्ली धक्कों से हर तरफ हिल रही थी .
मंत्रीजी अपना सख्त शिश्न चटाके की आवाज़ के साथ बाहर खींचते तो विनोद का गरम लाल मलाशय नज़र आता और तुरंत उसकी भूरी संकोचक-पेशी वापस सिकुड़ जाती .
फिर वो लचकदार संवरणी पर थूकते और राल से गीला कर पुनः अपना प्रबल लौड़ा नर-योनी के अन्दर भोंक देते .
विनोद हर धावे पर हर्ष से चीखता .
जब कुत्ते बने विनोद की गुदा में लण्ड पूरा अन्दर बैठा होता तो मंत्रीजी उसका लटकता लुल्ला कस कर दबाते और विनोद के बदन में सिहरन दौड़ जाती .
कुछ ही पलों में पिछवाड़े में लण्ड निगलता विनोद कंपकंपा कर मंत्रीजी की हथेली में स्खलित हो गया .
मंत्रीजी ने विनोद की लुल्ली निचोड़ कर खाली कर दी और अपनी हथेली पर चिपके गांडू के पानी को सूंघने लगे .
थोड़ा वीर्ये उन्होंने चाट भी लिया .
फिट मंत्रीजी झटके मारने लगे और उनके ठोस लिंग ने विनोद की चुस्त नर-योनी में उलटी कर दी .
जब मंत्रीजी ने अपना लौड़ा सूजी हुई लाल गुदा से बाहर निकाला तो उनका चिपचिपा वीर्ये विनोद के टट्टे और जाँघों पर बहने लगा .

स्रोत:इंटरनेट