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Sasural Pahle Bad Indian Hot Kahani 2

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अजय कुछ सोच विचार रहा था । उसको लगा सायद सुहागरात को नेहाके खून नहीं आया होगा इसलिए अनुज परेसान हो गया हे शायद उसको वहम होगा की नेहापहले से ही किसी के साथ अनुभव ले चुकी हे । अजय तो चाहता था की यदि वो. उसको ये बता दे की नेहापहले से किसी के साथ सारा काम कर चुकी हे तो में नेहाको कभी नहीं पा सकूँगा इसलिए उसने अपने किताबी ज्ञान का उपयोग में लिया और अनुज को कहा । देखो अनुज ऐसा कुछ नहीं हे की खून निकले ।. उसने कहा औरतों के योनी में एक झिल्ली होती हे यदि वो फट जाती हे तो खून निकल आता हे और कोई जरुरी नहीं हे की वो झिल्ली सम्भोग के समय ही फटे वो तो खेल खेल भी फट सकती हे तुम परेसान मत होवो ये सब तो एक दम. साधारण सी बात हे । अजय की बात सुन कर अनुज का सारा वहम निकल गया उसके चहरे पे एक सुकून आ गया । अब तो खुस था । वो दोनों बातें कर ही रहे थे की इसी बीच नेहावह चाय ले के आ गई । उसने एक कप अनुज को दिया और. जैसे ही वो दूसरा कप अजय को देने के लिए झुकी उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया । साड़ी का पल्लू सरकते ही अजय नेहाकी चिकनी गोलाइयो की दरार के बेच फंस गया । वो उसके उसको एक टक देखे जा रहा था ।. कुछ संभल कर नेहाने अपना पल्लू ठेक किया तो अजय की भी तन्द्रा टूट गई । नेहावही पे सोफे पे बेथ गई और उन दोनों की बातो में साथ देने लगी । जब जब अजय की नज़र नेहापे पड़ती नेहाके गुलाबी ओठो पे एक मुस्कान आ. जाती और आँखे शर्म से झुक जाती । शायद अजय नेहाके वर्ताव को पहचान गया था । कुछ देर बाते करने के बाद अजय वह से चला गया ।दिन पर दिन बित्ते चले गए । अजय का अनुज के घर आना जाना जारी रहा । नेहाभी अब अजय से. काफी खुल गई थी । वो कई बार अजय के साथ एक ही सोफे पे बेथ कर चाय की चुस्कियो का आनंद लेती रही । बातो बातो में वो कभी कभी अजय की जांघो पे भी हाथ मार देती थी । जिस से अजय का भी मन मचल उठता । एक दिन अनुज. ने अजय को बताया की वो शहर जा के काम करना चाहता हे । अजय ने देखा अब उसका रास्ता साफ़ हे । उसने अनुज को और प्रोत्साहित किया और कहा शहर में बहुत अछि कमाई हे तुमको जरुर जाना चाहिए । और एक दिन अजय ने अनुज. को शहर का रास्ता दिखा दिया । वो अनुज को छोड़ने के लिए स्टेशन तक आया । अनुज का ध्यान तो नेहाकी और था पर मन को भारी कर के वो शहर की और चल पड़ा । अब दोनों पंछियों के लिए आसमान खुला था ।. नेहाका मन भी थोडा उदास था पर अजय को देख कर वो खुस भी थी । दो चार दिन के बाद ही अजय ने अपना जाल फैलाना सुरु कर दिया ।एक दिन जब नेहाके सास ससुर खेत पे चले गए अजय नेहासे मिलने उसके घर गया । नेहारशोई में. खाना बनाने की तयारी कर रही थी । उसका मुह दिवार की और था अजय कब रसोई में आया उसको पता ही नहीं चला । वो अपने काम में व्यस्त थी । घाघरे के पेचे उसके उभारदार नितम्बो को देख कर अजय का लंड एक दम से खड़ा हो. गया । वो नेहाके नजदीक गया । और पेचे से उसकी कमर को पकड़ लिया । नेहाएक दम से हुए इस हमले से दर गई उसने अपने आप को अजय से छुड़ाया और एक और हट गई और कहा ये आप क्या कर रहे हो अजयजी अगर कोई देख लेगा तो बहुत. बदनामी होगी । अजय ने भी उसके शब्दों का अर्थ लगा लिया की किसी के घर में होने से डर रही थी न की उसके रसोई में होने से । अजय ने मोर्चा संभाला और कहा नेहाघर पे कोई नहीं हे तेरे सास ससुर खेत में गए हे । इस. पर नेहामुस्कुरा दी और कहा मुझे पता हे में तो बस उ ही कह रही थी । अब अजय से और नहीं रहा जा रहा था उसने नेहाको पकड़ लिया और अपनी बाहों में झुला झुलाने लगा और उसके गोरे गोरे चिकने गालो पे चुम्बन की झाडिया. लगा दी । नेहाभी और बर्दास्त नहीं कर सकती ही उसने भी अजय को प्रतिउत्तर देना सुरु कर दिया । दोनों पंछी उड़ान के लिए तयार थे ।. अजय ने नेहाकी चूत को खड़े खड़े ही घाघरे के ऊपर से ही सहलाना सुरु कर दिया नेहाभी अजय के लंड को पेंट के ऊपर से रगड़ने लगी । अब अजय ने नेहाकी अंगिया के हुक खोल दिए जैसे ही उसने उसके हुक को खोला नेहाके. दुधिया रंग में रंगे गोल गोल और चिकने गुलाबी चुचियो वाले स्तन झट से बाहर आ गए जिस को देख कर अजय के होश फाख्ता हो गए वो अपने पे काबू नहीं रख सका और उन पर टूट पड़ा नेहाभी एक दम लाल हो गई उसने कहा अजय ये. सब आपका ही तो हा जरा आहिस्ता कीजिये ना इतनी जल्दी क्या हे । अजय तो अपनी धुन में उनको अपने मुह में लगातार चुस्त जा रहा था शायद नेहाकी बात उसके कानो तक पहुची ही नहीं । नेहाकी चुचियो को चूसने के बाद अजय. धीरे धीरे नेहाके नाभि कमल तक आ गया और नेहाकी मधोस कर देने वाली खुसबू पागल सी कर रही थी वो तो जन्नत के द्वार तक पहुँचने वाला था बस एक रुकावट आ रही थी । उसने उस द्वार को खोला नहीं परन्तु उसको ऊपर कर. दिया जी हाँ उसने नेहाके घाघरे को उसके कमर तक ऊपर उठा दिया उसको जन्नत का दरवाजा दिखाई दे रहा था ।उसको देखते ही अजय के लंड की एक एक नस फुल गई थी उसको लगने लगा कई उसके लंड की नसे फट न जाए उससे पहले ही. नेहाने अजय की पेंट खोल कर उसका लंड अपने हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी । इस से अजय का जोश दुगुना हो गया । नेहाने अजय का लंड देखा तो उसकी आँखे फट गई उसका लंड नो इंच का था इनता मोटा लंड उसने आज तक. नहीं देखा ।. वो अपनी किस्मत को बार बार दुहाई दे रही थी । नेहानीचे झुकी मानो वो अजय के लंड को साष्टांग प्रणाम करना चाहती हो परन्तु नीचे झुक कर उसने अजय के लंड को अपने मुह में के लिया जैसे ही अजय का लंड नेहाके मुह. में गया उसके लंड ले रस की बुँदे टपकने लगी नेहाउसको प्रशाद मान कर अपने कंठों में उतार लिया । वो उसके सारे रस को पि गई । और अजय के लंड की चमड़ी को पीछे कर कर के अपने मुह में ले के जोर जोर से झटके देने. लगी कई देर तक करने बाद अजय से रहा न गया उसने नेहाको ऊपर उठाया और उसको दिवार के सहारे खड़ा कर दिया । अजय ने नेहाकी एक जांघ को अपने हाथ से ऊपर उठाया और और अपना लंड नेहाकी गुलाबी चूत पे टिका दिया पूरा. सहारा देख कर अजय ने नेहाको जोर का झटका दिया जैसे ही अजय का लंड नेहाकी चूत को चीरता हुआ अन्दर गया नेहाके गले से मधुर नाद निकलने लगा दिवार का सहारा दिए हुए अजय ने नेहाकी चुदाई करनी सुरु कर दी नेहाके लिए. ये एक नया अनुभव था आज वो एक असीम आनंद में खो गई ।.
स्रोत:इंटरनेट