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मैंने मना कर दिया- मुझको ऐसा कुछ नहीं करना है.. लेकिन अभि ने मेरा हाथ पकड़ लिया- आई लव यू.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। मेरे होंठों को चूसने लगा.. तो मैंने कहा- नहीं अभि.. ये सब ग़लत है.. तुम मेरे फ्रेंड हो.. अभि ने मेरे कंधे हाथ रख दिया और कहने लगा- देखो निमिषा मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.. और जैसे-जैसे तुम जवान हो रही हो.. मैं तुम्हें और भी प्यार करना चाहता हूँ। उसने मेरे गाल पर एक चुम्बन कर दिया.. मैं शर्मा गई और मैंने कहा- अभि प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ.. पर अगर किसी को पता चल गया.. तो बहुत बुरा होगा। अभि बोला- अरे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. मैं तो वैसे ही वीणा की चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी… मैंने ज्यादा नाटक नहीं किया।. फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और कहा- निमिषा मैं इनका रस पीना चाहता हूँ।. उसने मेरे शर्ट को ऊपर कर दिया। आगे कुछ और होता.. इससे पहले वहाँ से वीणा और कपिल चले गए थे। वीणा मेरे हाथ में जाने से पहले कन्डोम का पैकेट दे कर हँसते हुई बोली- हैपी फकिंग डे.. मैं भी हँस पड़ी थी।. उसके बाद अभि ने मेरी कमर में अपना हाथ डाल दिया, अब मैं भी गर्म हो गई थी, अभि मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर दबाने लगा.. वो बेरहमी से मम्मों को मसल रहा था। एक साथ दोनों मम्मों को बुरी तरह मसलने से मैं एकदम से चुदासी हो उठी। अभि ने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठों को रख दिए और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे।. वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगा था। अब उसने मेरे कपड़े उतारना शुरू किए.. पहले मेरी कमीज़ निकाली.. फिर मेरी सलवार खींच दी। अब मैं सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। फिर अभि ने मेरी ब्रा भी निकाल दी और वो मेरे तने हुए मम्मों को चूमने-चाटने लगा।. अभि के साथ ये करते हुए बहुत सेक्सी लग रहा था.. मैं अपने दोस्त के साथ नंगी थी, अभि मेरे मम्मों को मुँह में पूरा भर के चूस रहा था और अपने एक हाथ से मेरी चूत को भी सहला रहा था। फिर थोड़ी देर बाद अभि ने मेरी अनछुई चिकनी-चिकनी जाँघें चूम लीं.. मैं सिहर उठी। अभि पागलों की तरह मेरी जाँघों को अपने मुँह से सहला रहा था और चूम रहा था। फिर हौले से अभि ने मेरी पैन्टी भी निकाल दी।. मेरी बिना बालों वाली अधखिली गोरी गुलाबी चूत को देखते ही वो एकदम से चकित रह गया और बोला- वीणा शेव अच्छी करती है।. मैं हँस दी.. उसने मुझको बोला- वीणा को मैंने ही बोला था कि तेरी मुन्नी का मुंडन कर दे।. अभि ने मेरे पूरी चूत हाथ में थाम ली और मेरी पूरी चूत को दबा दिया।. चूत को सहलाता हुआ अभि बोला- हाय निमिषा.. मेरी जान.. क्या चीज़ है तू.. क्या मस्त माल है.. हहमम्म ससस्स हहा.. अभि ने अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी जाँघें बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए मेरी जाँघों को फैला दिया.. अब वो मेरी चूत को बुरी तरह मसलने लगा, मुझे बहुत मज़ा आने लगा.. मैं सिसकारी भरने लगी.. अभि और जोश में चूत को मसलने लगा.. उसने मसल-मसल कर मेरी चूत लाल कर दी थी। उसके इस तरह से रगड़ने से मेरी मुन्नी 2-3 बार झड़ चुकी थी, बहुत गीला हो गया था, अभि के हाथ भी गीले हो गए थे.. सारा पानी निकल बाहर रहा था, मैं निढाल हो रही थी। फिर अभि ने मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चूत के होंठों को अपने होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसने लगा।. मैं तो बस कसमसाती रह गई.. मैं तड़पती मचलती हुई ‘आआहह.. आअहह.. अभि.. अभि.. हाय.. उईईइ.. आहह..’ कहती रही और अभि चूस-चूस कर मेरी अधपकी जवानी का रस पीता गया। बड़ी देर तक मेरी चूत की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी। तभी अभि ने अपने कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गया और उसका लंड फड़फड़ा उठा.. करीब 7 या 8 इंच का लोहे जैसा सरिया था। मैंने कहा- अभि.. यह तो बहुत बड़ा और मोटा है.. ये मेरी चूत में नहीं जा पाएगा। तो अभि ने कहा- निमिषा तू फिकर मत कर.. फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ.. तुझे कुछ नहीं होने दूँगा। उसने अपना लंड मेरी फुद्दी की तरफ बढ़ाया… तभी अभि बोला- निमिषा.. कन्डोम तो दे.. जो वीणा ने जाते समय तुमको दिया था। मुझ याद ही नहीं था कि इसकी भी जरूरत पड़ेगी। मैंने अपने हाथों से कन्डोम अभि के लण्ड पर लगाया और सहलाने लगी।. उसके बाद अभि ने मुझको डेस्क पर आराम से लिटा दिया। मैं सोच रही थी जो हालत अभी वीणा की थी.. अब मेरी होने वाली है। अभि के लंड के टच करते ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं बुरी तरह तड़प रही थी।. अभि 5 मिनट तक मेरी चूत को अपने लंड से सहलाता रहा.. फिर उसने मेरी फुद्दी पर हल्का सा ज़ोर लगाया.. तो मेरी चीख निकल गई। उसका लंड अन्दर नहीं जा रहा था। अभि ने कहा- थोड़ा दर्द होगा.. लेकिन फिर ठीक हो जाएगा। मैंने मंत्रमुग्ध कहा- ओके.. लेकिन अभि प्लीज़ आराम से करना। अभि ने ज़ोर से अन्दर डाला.. तो उसका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया। मेरी आँखों में आँसू आ गए- आह.. मैं मर जाऊँगी अभि.. प्लीज़ निकालो.. बहुत दर्द हो रहा है.. आह ओफ… ममाआ.. यह कहते हुए मैं उससे गिड़गिड़ाने लगी.. पर वो नहीं माना और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठों लगा दिए। वो मेरे होंठों को चूसने लगा और अपने लौड़े को मेरी चूत में ऐसे ही डाले रखा।. मेरी चूत से खून निकल रहा था और मैं बुरी तरह तड़प रही थी।. वो कहने लगा- तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़।. मैंने हल्के स्वर में कहा- अभि आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ।. फिर अभि ने एक जोरदार झटका मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस गया।. मैं सिहर उठी और ‘आह.. ओह्ह.. अभि मैं मर गई..’ कहने लगी। अभि मुझे तसल्ली देता रहा और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा, वो मेरे दूध चूसता रहा। लगभग 5 मिनट बाद उसने धीरे-धीरे झटके मारना शुरू किए।. मैं- आह्ह.. अभि.. मज़ा आ रहा है… इस बीच मैं 2 बार झड़ चुकी थी और वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुआ मुझे चोदता रहा।. लगभग 10 मिनट बाद अभि ने अपना सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया।. हम लेट गए.. मेरी चूत पानी और खून छोड़ती हुई बुरी तरह फड़फड़ा रही थी, मेरी चूत का हाल-बेहाल हो चुका था। कुछ देर बाद अभि ने मेरी चूत को साफ़ किया और फिर से चूसने लगा।. थोड़ी देर में अभि का लंड फिर से खड़ा हो गया।. अभि ने मुझको लण्ड मुँह में लेने के लिए कहा पर मैंने मुँह में नहीं डाला और उसे किस करने लगी। पर अभि के बहुत बार कहने पर मैंने उसको मुँह में ले लिया। मुझे लण्ड का स्वाद कुछ अजीब सा लगा।. अभि मुझसे कहने लगा- निमिषा मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरी फ्रेण्ड मुझसे इतना प्यार करती है।. उसके बाद हम ऐसे ही लेटे रहे। इतनी अधिक थकान थी कि मेरी तो उठने की भी हिम्मत नहीं थी। अभि ने मेरी टाँगों की मालिश की और मुझको कपड़े पहनाए.. उसके बाद जब मैं पैदल नहीं चल पा रही थी तो उसने मुझको रिक्शे से मेरे घर पर छोड़ा।.
स्रोत:इंटरनेट