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Shadishuda Mard Vasna Hindi Hot Story

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पति की लाज बचाने के लिए एक शरीफ घर की औरत एक उज्जड से आदमी से लुटने जा रही थी.
कैसी रहेगी मेरी बीवी और शम्भू की मुलाकात? जानिए इस hindi hot story के अगले धमाकेदार भाग में.. Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. खाना खाने के बाद पति-पत्नी सोने के लिए चले गए पर नींद उनकी आँखों से कोसों दूर थी.
दीपिका की आँखों के सामने बार-बार शम्भू का चेहरा घूम रहा था.
उन्हें याद था कि वो जब-जब यहाँ आया, उन्हें लम्पट दृष्टि से देखता था.
उन्हें ऐसा लगता था जैसे वो अपनी आँखों से उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश कर रहा हो.
उन्हें यह सोच कर झुरझुरी हो रही थी कि कहीं उसने वास्तव में उन्हें नग्न कर दिया तो उन्हें कैसा लगेगा! उसकी बोलचाल भी गंवार किस्म की थी.
न जाने वो उनके साथ कैसे पेश आएगा! दीपिका को उससे पंकज जैसे सभ्य व्यवहार की आशा नहीं थी.
और वो बिस्तर पर उनके साथ जो करेगा … उसकी तो वे कल्पना भी नहीं करना चाहती थीं.
 . उधर पंकज का भी यही हाल था.
शुरू में तो उन्हें भय और तनाव से मुक्त होने की ख़ुशी हुई थी पर बाद में उनका मन न जाने कहाँ-कहाँ भटकने लगा.
उन्हें लग रहा था कि उनका निराली को भोगना तो एक सामान्य बात थी पर शम्भू जैसा आदमी उनकी पत्नी को भोगे … यह सोच कर उन्हें वितृष्णा हो रही थी.
फिर उन्हें महसूस हुआ कि शम्भू ही क्यों, किसी भी पर-पुरुष को अपनी पत्नी सौंपनी पड़े तो उन्हें इतना ही बुरा लगेगा.
उन्हें यह सर्वमान्य पुरुष स्वभाव लगा कि अपनी पत्नी को दूसरों से बचा कर रखो पर दूसरों की पत्नी मिल जाए तो बेझिझक उसका उपभोग करो.
… फिर पंकज के मन में विचार आया कि शम्भू भी तो यही कर रहा है.
दूसरे की पत्नी मिल सकती है तो वो उसे क्यों छोड़ेगा.
… पर वे वे हैं और शम्भू शम्भू!  . एक और डर पंकज को सताने लगा.
शम्भू कहीं दीपिका को शारीरिक नुकसान न पहुंचा दे! वो ठहरा एक हट्टा-कट्टा कड़ियल मर्द जबकि दीपिका एक कोमलान्गी नारी थीं.
उन दोनों में कोई समानता न थी.
शारीरिक समानता तो दूर, उनके मानसिक स्तर में भी जमीन आसमान का फर्क था.
दीपिका एक सुसंस्कृत और संभ्रांत स्त्री थीं.
रतिक्रिया के समय पर भी उनका व्यवहार शालीन और सभ्य रहता था.
जबकि शम्भू से सभ्य आचरण की अपेक्षा करना ही निरर्थक था.
पंकज निराली का यौनाचरण देख चुके थे.
कहीं शम्भू ने भी दीपिका के साथ वैसा ही व्यवहार किया तो?  . अपने-अपने विचारों में डूबते-तरते पता नहीं कब वे दोनों निद्रा की गोद में चले गए.
दीपिका एक पूर्व-निर्धारित स्थान पर पहुँच गयीं जो उनके घर से थोड़ी ही दूर था.
निराली वहां उनका इंतजार कर रही थी.
जब वे दोनों निराली के घर की ओर चल पडीं तो रास्ते में निराली ने दीपिका को कहा, “बीवीजी, मैने अपने एक-दो पड़ोसियों को बताया है कि रात को मेरी भाभी इस शहर से गुज़र रही है.
वो हम लोगों से मिलने कुछ घंटों के लिये हमारे घर आएगी.
उसे जल्दी ही वापस जाना है इसलिए वो अपना सामान स्टेशन पर जमा करवा के आयेगी.
अब आप बेफिक्र हो जाइये.
किसी को कोई शक नहीं होगा.
कल सुबह आप सही-सलामत अपने घर पहुँच जायेंगी और मेरे मरद की इच्छा भी पूरी हो जाएगी.
”  . आखिरी वाक्य सुन कर दीपिका को फिर झुरझुरी सी हुई.
लेकिन अब वे लौट नहीं सकती थीं! उन्होंने स्वीकार कर लिया कि जो होना है वो तो हो कर रहेगा.
और वो होने में ज्यादा देर भी नहीं थी क्योंकि बातों-बातों में वे निराली के घर पहुँच गए थे.
घर के अन्दर पहुँच कर दीपिका एक और समस्या से रूबरू हुईं.
उस घर में एक कमरा, एक छोटा सा किचन और एक बाथरूम था.
सवाल था कि निराली कहाँ रहेगी!  . शम्भू एक कुर्सी पर लुंगी और बनियान पहने बैठा था.
जैसे ही निराली ने दरवाजा बंद किया, शम्भू लपक कर दीपिका के पास गया और उसने अपने दोनों हाथ उनकी कमर पर रख दिए.
उसकी भूखी नज़रें उनके चेहरे पर जमी हुई थीं.
लगता था कि वो उन्हें अपनी आँखों से ही खा जाना चाहता हो.
वो उन्हें लम्पटता से घूरते हुए निराली से बोला, “निराली, बाबूजी के पास ऐसा जबरदस्त माल था फिर भी तू उनकी नज़रों में चढ़ गई! पर जो भी हो, इसके कारण मेरी किस्मत खुल गई.
अब मैं इस चकाचक माल की दावत उड़ाऊंगा.
”  . उसने अपना मुंह दीपिका के होंठों की ओर बढाया पर वे अपनी गर्दन पीछे कर के बोलीं, “नहीं, यहाँ निराली है.
”  . “तो क्या हुआ, मेमसाहब?” शम्भू ने कहा.
“इसके साथ बाबूजी ने जो किया, वो मैंने देखा.
अब मैं आपके साथ जो करूंगा, वो इसे देखने दीजिये.
हिसाब बराबर हो जाएगा.
” निराली ने अपने पति का परोक्ष समर्थन करते हुए कहा, “अरे, हिसाब की बात तो अलग है.
पर अब मैं जाऊं भी तो कहाँ? इस घर में तो जगह है नहीं और मैं किसी पडोसी के घर गई तो वो सोचेगा कि यह रात को अपनी भाभी को अपने मरद के पास छोड़ कर हमारे घर क्यों आई है? … बीवीजी, आपको तकलीफ तो होगी पर मेरा यहाँ रहना ही ठीक है.
”  . अब दीपिका के पास कोई चारा न था.
और निराली जो कह रही थी वह ठीक भी था.
उन्होंने हलके से गर्दन हिला कर हामी भरी.
अब शम्भू को जैसे हरी झंडी मिल गई थी.
उसने उनके होंठों पर ऊँगली फिराते हुए कहा, “ओह, कितने नर्म हैं, फूल जैसे! … और गाल भी इतने चिकने!”  . उसका हाथ उनके पूरे चेहरे का जुगराफिया जानने की कोशिश कर रहा था.
पूरे चेहरे का जायजा लेने के बाद उसका हाथ उनके गले और कंधे पर फिसलता हुआ उनके सीने पर पहुँच गया.
उसने आगे झुक कर अपने होंठ उनके गाल से चिपका दिए.
वो अपनी जीभ से पूरे गाल को चाटने लगा.
साथ ही उसकी मुट्ठी उनके उरोज पर भिंच गई.
दीपिका डर रही थी कि वो उनके स्तन को बेदर्दी से दबाएगा पर उसकी मुट्ठी का दबाव न बहुत ज्यादा था और न बहुत कम.
 . शम्भू ने अपने होंठों से उनके निचले होंठ पर कब्ज़ा कर लिया और वो उसे नरमी से चूसने लगा.
कुछ देर उनके निचले होंठ को चूसने के बाद उसने अपने होंठ उनके दोनों होठों पर जमा दिये.
उनके होंठों को चूमते हुए वो कपड़ों के ऊपर से ही उनके स्तन को भी मसल रहा था.
दीपिका ने सोचा था कि शम्भू जो करेगा, वे उसे करने देंगी पर वे स्वयं कुछ नहीं करेंगीं.
वैसे भी काम-क्रीडा में ज्यादा सक्रिय होना उनके स्वभाव में नहीं था.
 . उनके होंठों का रसपान करने के बाद शम्भू ने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी.
जब जीभ से जीभ का मिलन हुआ तो दीपिका को कुछ-कुछ होने लगा.
वे निष्काम नहीं रह पायीं.
वे भी शम्भू की जीभ से जीभ लड़ाने लगीं.
उनके स्तन पर शम्भू के हाथ का मादक दबाव भी उनमे उत्तेजना भर रहा था.
उन्हें लगा जैसे वे तन्द्रा में पहुंच गयी हों.
उसी तन्द्रा में वे अपनी प्रकृति के विपरीत शम्भू को सहयोग करने लगीं.
उनकी तन्द्रा निराली के शब्दों ने तोड़ी जब वो शम्भू से बोली, “अरे, ऊपर-ऊपर से ही दबाएगा क्या? चूंची को बाहर निकाल ना.
पता नहीं ऐसी चूंची फिर देखने को मिलेगी या नहीं!”
स्रोत:इंटरनेट