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Shadishuda Mard Vasna Saxy Story

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उस गुंडे से चुदते हुए दीपिका को इतना आनंद मिलेगा वो उसने सोचा नहीं था.
अब तो मेरी बीवी मस्ती से उसका काला लौड़ा चूसे जा रही थी.. ये मैंने क्या कर दिया? इस saxy story का आखिरी भाग जल्द ही.. Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. दीपिका अपनी मनोदशा से चकित भी थीं.
वे सोच रही थीं कि कल तक जिस पुरुष के साथ यौनाचरण करना उन्हें अपनी बेईज्ज़ती लग रही थी आज उसी के लंड को मुंह में लेना उन्हे गर्व की अनुभूति दे रहा है (अब उन्हें ‘लंड’ जैसा शब्द भी वर्जनीय नहीं लग रहा था).
निराली की सलाह पर उन्होंने अपनी जीभ को सुपाड़े के गिर्द घुमाना शुरू कर दिया.
इसका तुरंत असर हुआ और शम्भू के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.
धीरे-धीरे उन्होंने अपने मुख को नीचे धकेला और वे आधा लंड अपने मुंह में लेने में सफल हो गयीं.
वे उसे आम की गुठली की तरह चूसने लगीं.
अब उन्हें लंड का जायका भी रास आ रहा था.
यह सिलसिला चलता रहा और शम्भू लंड-चुसाई का मज़ा लेता रहा.
वो समय आने में देर न लगी जब शम्भू झड़ने के कगार पर पहुँच गया.
उसने किसी तरह दीपिका के हठीले मुंह को अपने लंड से दूर धकेला और हाँफते हुए उनसे गुज़ारिश की, “बस मेमसाहब, अब चोदने दीजिये.
”  . दीपिका ने जब पहली बार शम्भू का लंड देखा था तब वे उसके साइज से डर गयी थीं पर अब उनकी कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो चुकी थी कि वे चुदने के लिए अधीर थीं.
उन्होंने अपनी आँखों से शम्भू को मौन निमन्त्रण दिया.
शम्भू ने उन्हें पीठ के बल लिटा दिया.
वो उनकी जाँघों को फैला कर उनके बीच आ गया.
उसने अपना लंड हाथ में ले कर उसे दीपिका की जांघों के बीच फिराया.
लंड चूत की फांकों को सहलाते हुए चूत के मुहाने पर आया पर वहां थोड़ी छेड़खानी करने के बाद क्लाइटोरिस पर पहुँच गया.
शम्भू ने थोड़ी देर सुपाडे से क्लाइटोरिस को मसला और फिर उसे चूत के द्वार पर पहुंचा दिया.
इस बार उसकी चूत के साथ छेड़छाड़ कुछ लम्बी चली.
चूत अनवरत पानी छोड़ कर लंड का प्रवेश सुगम बना रही थी पर लंड था कि टालमटोल किये जा रहा था.
अनुभवी शम्भू अपनी चेष्टा से दीपिका को कामावेग के शिखर पर ले गया था.
इस बार जब उसने लंड को चूत से हटाया तो दीपिका बेसाख्ता बोल उठीं, “ऐसे क्यों तरसा रहे हो? अब घुसा भी दो.
”  . चालाक शम्भू ने लंड को उनकी गांड से सटा कर पूछा, “कहाँ, मेमसाहब?”  . दीपिका को अपनी गांड पर चिकने और गीले लंड का स्पर्श सुहावना लग रहा था पर वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थीं.
उन्होंने फ़ौरन उत्तर दिया, “मेरी चूत में!” और यह कह कर वे शर्मा गईं.
चुदाई में उस्ताद शम्भू ने भांप लिया था कि गीली होने के बावजूद दीपिका की संकड़ी चूत उसका लंड आसानी से नहीं ले पाएगी.
उसने अपने हाथ से लंड पर अच्छी तरह थूक लगाया.
फिर उसने झुक कर अपने मुंह से सीधे चूत पर थूक टपकाया.
एक ऊँगली से थूक को चूत के अन्दर तक पहुँचा कर वो दीपिका के ऊपर लेट गया.
उसने अपनी उँगलियों से उनकी जांघों को टटोल कर अपना निशाना ढूंढा और अपने लंड को निशाने पर रख दिया.
उसने अपने कूल्हों को हौले से आगे धकेला.
दीपिका के मुँह से एक सिसकारी निकल गई पर लंड को अभी प्रवेश नहीं मिला था.
शम्भू ने कहा, “मेमसाहब, आपकी चूत बड़ी संकड़ी है! आपको थोडा दर्द हो सकता है.
”  . “कोई बात नहीं,” दीपिका ने हौसला दिखाया.
“तुम घुसाओ.
”  . शम्भू ने अपना मुँह उनके होठों पर रख दिया.
कुछ देर वो उनके होंठों को चूमता रहा और फिर अचानक उसने पूरी ताक़त से एक धक्का मारा.
उसका फौलादी लंड अपना निशाना भेदता हुआ पूरा अंदर घुस गया.
दीपिका का मुंह शम्भू के मुंह से छिटका और उससे एक लम्बी ‘उईई…!’ निकल गई.
साथ ही उनका शरीर बेसाख्ता लरज़ उठा.
निराली ने शम्भू को लताड़ा, “ये क्या कर दिया, ज़ालिम! बीबीजी को दर्द हो रहा है!”  . शम्भू अपना लंड बाहर खींच पाता उससे पहले दीपिका ने उसकी कमर को अपने हाथों से थामा और कहा, “नहीं शम्भू, बाहर मत निकालना.
मैं ठीक हूँ.
” उन्हें थोड़ी तकलीफ हुई थी पर वे हार मानने को तैयार नहीं थी.
उन्हें लगा कि जिस लंड को निराली रोज़ झेलती थी उसे वे नहीं झेल पायीं तो उनकी हार हो जाएगी.
शम्भू बहुत खुश था.
जिस चूत को हासिल करने के सपने वो कई दिन से देख रहा था वो अब उसके कब्जे में थी.
और अपने लंड पर उस टाईट चूत की कसावट उसे बहुत मज़ेदार लग रही थी.
अब उसे कोई जल्दी नहीं थी.
कुछ देर वो बिना हिले दीपिका के होंठों का रस पीता रहा.
जब दीपिका का दर्द दूर हो गया तब उन्होंने अपनी कमर को हरक़त दी.
शम्भू उनके इशारे को समझ गया.
चुदाई-कला में एक्सपर्ट तो वो था ही.
अब वो उन्हें पूरी महारत से चोदने लगा.
उसके मोटे लंड ने दीपिका की कसी हुई चूत को फैला दिया था और अब लंड का आवागमन बेरोकटोक हो रहा था.
शम्भू ने धीरे-धीरे अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी.
दीपिका ने अपनी टांगों से शम्भू की कमर को भींच रखा था.
दर्द की जगह अब मस्ती ने ले ली थी और वे अब शम्भू के धक्कों का लुत्फ़ ले रही थीं.
उनकी आँखें बंद थीं.
कुछ देर बाद उनकी साँसें बेतरतीब हो गईं.
चुदते हुए उन के मुँह से बराबर ‘ऊंsssऊं…! ओह…! आहsss…!’ की ध्वनि निकल रही थीं.
 . निराली जान गई थी कि दीपिका चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थीं पर उन्हें छेड़ने के लिए उसने पूछा, “दर्द हो रहा है क्या, बीवीजी? इसे निकालने के लिए कहूं?”  . “नहीं,” दीपिका ने सिसकारियों के बीच जवाब दिया.
 . “कैसा लग रहा है अब?” निराली ने फिर पूछा.
 . “बहुत अच्छा लग रहा है,” दीपिका ने कहा.
अब उतेजनावश उनके नितम्ब उछलने लगे थे.
उनकी सक्रिय भागीदारी से शम्भू और भी खुश हो गया.
वो पूरी तबीयत से धक्के लगाने लगा.
दीपिका उसकी ताल से ताल मिला कर उसके पुरजोर धक्कों का जवाब दे रही थीं.
 . निराली को पंकज बाबू की एक बात याद आई.
उन्होंने कहा था कि बीवीजी सिर्फ नीचे लेटती हैं, बाकी सब उन्हें ही करना पड़ता है.
उसने सोचा कि क्यों न आज इनसे कुछ नया करवाया जाए! उसने शम्भू से कहा, “ज़रा रुक तो.
तू ही ऊपर चढ़ा रहेगा या बीवीजी को भी ऊपर आने देगा?”.  . “ओह, मैं तो भूल ही गया था,” शम्भू ने रुक कर अपना लंड बाहर निकालने की कोशिश की.
 . “नहीं,” दीपिका ने अपनी चूत को भींचते हुए कहा.
“ऐसे ही ठीक है.
”  . चूत की पकड़ मजबूत होने के कारण शम्भू का लंड अंदर ही फंसा रहा पर वो निराली की बात से सहमत था.
वो जानता था कि जब दीपिका उसके ऊपर होंगी तो वो चुदाई का मज़ा लेने के साथ-साथ उनके हुस्न का पूरा नज़ारा भी देख सकेगा.
वो बोला, “निराली ठीक कहती है, मेमसाहब.
आपको भी तो अपने सेवक सवारी करनी चाहिए.
”  . वो उनके ऊपर से उतर कर पलंग पर लेट गया.
उसने दीपिका का हाथ पकड़ कर उन्हें अपने ऊपर खींचा.
दीपिका लजाते हुए उसके ऊपर आ गईं.
उन्होंने उसके लंड को हाथ में पकड़ा और अपनी चूत को उस पर टिकाया.
उन्होंने अपनी चूत को धीरे-धीरे नीचे धकेला.
कुछ ही पलों में उन्होंने पूरा लंड अपने अंदर ले लिया.
उन्होंने विजयी दृष्टि से निराली की ओर देखा तो निराली ने कहा, “बीवीजी, अब आपको जैसे धक्के पसंद हैं, वैसे लगा सकती हैं.

स्रोत:इंटरनेट