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Shadishuda Mard Vasna Xnxx Stories 2

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निराली की अजीब शर्त और ब्लैकमेल ने पंकज के पास दुनिया छोड़ने के अलावा कोई चारा नही छोड़ा था, पर उनकी बीवी वहां पहुच चुकी थी.
आगे ये पति-पत्नी क्या कोई हल निकल पाते है? इन xnxx stories का अगला मस्त भाग.. Sex Kahani के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. बैडरूम के दरवाजे पर पहुंचते ही उन्होंने देखा कि पंकज एक स्टूल पर खड़े थे.
उनके हाथ में एक रस्सी का फंदा था जिसे वे गले में डालने ही वाले थे.
रस्सी का दूसरा छोर ऊपर पंखे से बंधा हुआ था.
) दीपिका ने फिर लगभग रोते हुए कहा, “अगर तुमने ये पागलपन नहीं छोड़ा तो मैं सच कहती हूँ, इस घर से एक साथ दो अर्थियां उठेंगी.
 . अब पंकज क्या करते! वे अपनी प्राणों से प्रिय पत्नी को कैसे मरने देते! उन्हें नीचे उतरना ही पड़ा.
नीचे उतरे तो उनका सर झुका हुआ था.
दीपिका ने रोते हुए उन्हें अपनी बांहों में भर लिया.
पर दीपिका की आँखों से अधिक आंसू पंकज की आँखों से बह रहे थे.
पति-पत्नी का करुण रुदन काफी समय तक चलता रहा.
… किसी तरह दीपिका ने दिलासा दे-दे कर अपने पति को चुप कराया.
जब पंकज कुछ सामान्य हुए तो दीपिका ने आशंकित मन से उन्हें पूछा कि हुआ क्या था.
अब पंकज क्या जवाब देते? पर वे सच्चाई को छुपाते भी कब तक! जब दीपिका ने पूछना जारी रखा तो उन्हें अटकते-अटकते रुआंसी आवाज में सब बताना पड़ा.
गर्दन उठाने की हिम्मत उनमे नहीं थी.
 . पंकज से सब कुछ सुनते समय दीपिका की मनोदशा अजीब थी.
उन्हें कभी पंकज पर क्रोध आ रहा था, कभी उनसे घृणा हो रही थी और कभी अपने दुर्भाग्य पर रोना आ रहा था.
जब अंत में उन्होंने निराली की विचित्र शर्त सुनी तो वे जैसे आसमान से गिरीं.
एक नौकरानी की यह मजाल! … फिर उन्हे लगा कि सारी मूर्खता तो उनके पति की थी.
निराली और उसके पति ने अपनी चालाकी से पंकज की बेवकूफ़ी का फायदा उठाया था.
कुछ भी हो, अब इस मूर्खता का परिणाम तो उन्हें भुगतना था.
… वे एक भारतीय नारी थीं.
उन्होंने सोचा कि उनके लिए पति के जीवन से कीमती कुछ भी नहीं है.
उन्होंने आज समय पर पहुँच कर पंकज को आत्महत्या करने से तो रोक दिया था पर उन्हें आगे आत्महत्या से रोकना भी उन्ही का दायित्व था.
 . जब उन्होंने अपने जज्बात पर काबू पा लिया तो उनकी बुद्धि ने भी काम करना शुरू कर दिया.
उन्होंने पंकज से कहा, “जो हो चुका सो हो चुका.
उसे मिटाया नहीं जा सकता है.
हमें आगे के बारे में सोचना है.
कोई न कोई रास्ता जरूर होगा.
”  . उनकी बात सुन कर पंकज को सबसे पहले तो यह तसल्ली हुई कि दीपिका ने उनको माफ़ कर दिया है.
जो हो गया उसे उन्होंने एक भारतीय पत्नी की तरह अपनी नियति समझ कर स्वीकार कर लिया है.
फिर जब उन्होंने कहा कि ‘हमें’ आगे के बारे में सोचना है, तो उनका मतलब था कि अब जो भी करना है वे दोनों मिल कर करेंगे.
पंकज ने सोचा कि उनका दीपिका को शॉक देने का नुस्खा कारगर साबित हुआ था.
उन्होंने मन ही मन अपनी एक्टिंग को दाद दी.
एक्टिंग जारी रखते हुए उन्होंने हताशा से कहा, “मैं तो हर पल यही सोच रहा हूँ पर मुझे निराली की बात मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है.
”  . दीपिका ने जवाब में कहा, “ये लोग गरीब नौकर हैं.
इन्हें पैसों का लालच न हो, यह हो ही नहीं सकता.
पर एक-दो हज़ार से बात नहीं बनेगी.
तुम उसे ज्यादा पैसों का लालच दो.
जरूरत पड़े तो हम दस-बीस हज़ार तक भी जा सकते हैं.
”  . पंकज ने सोचा कि वे कोई अफसर नहीं बल्कि एक क्लर्क हैं.
उनके लिए दस-बीस हज़ार रुपये ऐसे ही दे देना कोई मामूली बात नहीं थी.
पर अपने घर की लाज बचाने के लिए वे कुछ भी करने को तैयार थे.
उन्होंने बुझे स्वर में कहा, “ठीक है, मैं कल निराली से बात करता हूँ.
”  . दीपिका ने दृढ़ता से कहा, “इससे ज्यादा भी देने पड़ें तो संकोच मत करना.
जरूरी हुआ तो मैं अपने गहने भी बेच दूँगी.
”  . पंकज शर्मिंदगी से बोले, “तुम्हारे पास है ही क्या? जो है वो भी मेरे कारण चला जाएगा!”  . दीपिका ने कहा, “तुम्हारी जान और घर की इज्ज़त के सामने गहने और पैसे क्या हैं!”  . पंकज का अभिनय तो अब ऑस्कर अवार्ड के लायक हो चला था.
उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे.
उन्होंने रुंधे गले से कहा, “पता नहीं पिछले जन्म में मैंने क्या पुण्य किया था कि भगवान ने मुझे तुम्हारे जैसी पत्नी दे दी! … और मैं फिर भी यह नीच काम कर बैठा.
… अगर भगवान की कृपा और तुम्हारे भाग्य ने इस बार मुझे बचा लिया तो मैं भगवान की कसम खाता हूं कि किसी परायी स्त्री की तरफ आँख उठा कर भी नहीं देखूँगा.
”  . दीपिका ने द्रवित हो कर अपने पति को गले से लगा लिया.
पंकज के आंसू उनके कंधे को भिगो रहे थे … पर अब अगले दिन का इंतजार करने के अलावा कोई चारा न था.
 . ***********************************************************************************************************.  . अगली सुबह तक का समय बहुत मुश्किल से बीता.
पंकज आशंकित थे पर दीपिका के मन में आशा थी.
दोनों ने मिल कर तय किया कि निराली के आने के बाद दीपिका मंदिर चली जायेंगी ताकि पंकज अकेले में निराली से बात कर सकें.
वैसे भी मंदिर में दीपिका को भगवान से बहुत विनती करनी थी.
बहरहाल अगली सुबह आई और नियत समय पर निराली भी आ गई.
जब उसने दीपिका को घर में पाया तो वह बहुत खुश हुई.
अब उसके पति का उधार चुकता हो जाएगा, वो उधार जो कई दिनों से पंकज बाबू पर था.
दीपिका ने अपने आप को सामान्य दिखाते हुए उससे थोड़ी औपचारिक बात की.
दीपिका को सामान्य देख कर निराली को आश्चर्य हुआ.
उसे शंका हुई कि शायद बाबूजी ने उनसे ‘वो’ बात नहीं की थी.
जब निराली का काम ख़त्म होने को था, दीपिका ने पंकज को कहा कि वे मंदिर जा रही हैं, और वे पूजा का कुछ सामान ले कर घर से निकल गयीं.
निराली जल्दी से अपना काम ख़त्म कर के पंकज के पास पहुंची और उनसे बोली, “बाबूजी, कितने बजे भेज रहे हैं बीवीजी को? उन्हें आप पहुंचाएंगे या मैं लेने आऊँ?”.  . पंकज के सामने वो मुश्किल घडी आ गई थी जिसे वे टालना चाहते थे.
उन्होंने फिर एक्टिंग का सहारा लिया और बोले, “निराली, मैं कई दिनों से तुम्हारी बात पर गौर कर रहा हूँ और मुझे समझ में आ गया है कि मैं कितना मूर्ख था!”. निराली सोच रही थी कि इनको अब अक्ल आई है.
पंकज बोलने के साथ-साथ निराली के मनोभावों को पढने का भी प्रयास कर रहे थे.
उन्होंने अपनी बात जारी रखी, “मैं जानता हूं कि तुम्हारी ज़िन्दगी में कितने अभाव हैं.
एक-दो हज़ार रुपये ज्यादा मिलने से तुम्हारे अभाव दूर नहीं होंगे.
लेकिन सोचो कि तुम्हे दस-पंद्रह हज़ार रुपये एकमुश्त मिल जाएँ तो तुम्हारी कौन-कौन सी जरूरतें पूरी हो सकती हैं!”  . उनकी आशा के विपरीत उन्हें निराली के चेहरे पर कोई ख़ुशी या सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखी.
वे समझ गए कि इतने से बात नहीं बनेगी.
वे आगे बोले, “बल्कि मैं तो सोचता हूँ कि यह भी कम हैं.
अगर बीस-पच्चीस हज़ार …”.
स्रोत:इंटरनेट