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Shadishuda Mard Vasna Xnxx Stories

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जब पंकज की बीवी गर्भवती थी, तो उनको भी संयम रखना पड़ता था.
पर एक दिन आखिरकार वो संयम टूटा और उनके अन्दर की वासना ने उनसे क्या करवा दिया? जानिए इन xnxx stories में.. Sex Kahani के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. वासना के अतिरेक में पंकज ने निराली के हाथ अपने कांपते हाथों में ले लिये.
जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो उन्होंने रोमांचित हो कर उसे अपनी तरफ खींचा.
झिझकते हुए निराली उनके इतने नजदीक आ गई कि उसकी गर्म सांसे उन्हें अपने गले पर महसूस होने लगी.
पंकज ने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले कर उठाया और उसकी नशीली आंखों में झांकने लगे.
निराली ने लजाते हुए पलकें झुका लीं पर उनसे छूटने की कोशिश नहीं की.
उससे अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन पा कर पंकज ने अपने कंपकंपाते होंठ उसके नर्म गाल पर रख दिए.
तब भी निराली ने कोई विरोध नहीं किया तो उन्होने एक झटके से उसे बिस्तर पर गिराया और उसे अपनी आगोश में ले लिया.
निराली के मुंह से एक सीत्कार निकल गई.
 . … तभी दरवाजे पर दस्तक हुई तो पंकज की नींद खुल गई.
उन्होंने देखा कि बिस्तर पर वे अकेले थे.
वे बुदबुदा उठे … इसी वक़्त आना था ….
पर वे घड़ी देख कर खिसिया गए.
सुबह हो चुकी थी.
दुबारा दस्तक हुई तो उन्होंने उठ कर दरवाजा खोला.
बाहर निराली खड़ी थी, उनकी कामवाली, जो एक मिनट पहले ही उनके अधूरे सपने से ओझल हुई थी.
उसके अन्दर आने पर पंकज ने दरवाजा बंद कर दिया.
 . जबसे उनकी पत्नी दीपिका गई थी वे बहुत अकेलापन महसूस कर रहे थे.
दीपिका की दीदी शादी के पांच वर्ष बाद गर्भवती हुई थी.
वे कोई जोखिम नही उठाना चाहती थीं इसलिए दो महीने पहले ही उन्होंने दीपिका को अपने यहाँ बुला लिया था.
पिछले माह उनके बेटा हुआ था.
जच्चा के कमजोर होने के कारण दीपिका को एक महीने और वहां रुकना था.
इसलिये पंकज इस वक्त मजबूरी में ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे थे.
 . काफी समय से उनका मन अपने घर पर काम करने वाली निराली पर आया हुआ था.
निराली युवा थी.
उसके नयन-नक्श आकर्षक थे.
उसका बदन गदराया हुआ था.
अपनी पत्नी के रहते उन्होंने कभी निराली को वासना की नज़र से नहीं देखा था.
दीपिका थी ही इतनी खूबसूरत! उसके सामने निराली कुछ भी नहीं थी.
पर अब पत्नी के वियोग ने उन की मनोदशा बदल दी थी.
निराली उन्हें बहुत लुभावनी लगने लगी थी और वे उसे पाने के लिए वे बेचैन हो उठे थे.
पंकज जानते थे कि निराली बहुत गरीब है.
वो मेहनत कर के बड़ी मुश्किल से अपना घर चलाती है.
उसका पति निठल्ला है और पत्नी की कमाई पर निर्भर है.
उन्होंने सोचा कि पैसा ही निराली की सबसे बड़ी कमजोरी होगी और उसी के सहारे उसे पाया जा सकता है.
पंकज जानते थे कि पैसे के लोभ में अच्छे-अच्छों का ईमान डगमगा जाता है.
फिर निराली की क्या औकात कि उन्हें पुट्ठे पर हाथ न रखने दे.
 . निराली को हासिल करने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई थी.
आज उन्होंने उस योजना को क्रियान्वित करने का फैसला कर लिया.
निराली के आने के बाद वे अपने बिस्तर पर लेट गए और कराहने लगे.
निराली अंदर काम कर रही थी.
जब उसने पंकज के कराहने की आवाज सुनी तो वो साड़ी के पल्लू से हाथ पोछती हुई उनके पास आयी.
उन्हें बेचैन देख कर उसने पूछा, ‘‘बाबूजी, क्या हुआ? … तबियत खराब है?’’  . दर्द का अभिनय करते हुए पंकज ने कहा, “सर में बहुत दर्द है.
”  . “आपने दवा ली?”.  . “हां, ली थी पर कोई फायदा नहीं हुआ.
जब दीपिका यहाँ थी तो सर दबा देती थी और दर्द दूर हो जाता था.
पर अब वो तो यहाँ है नहीं.
”  . निराली सहानुभूति से बोली, ‘‘बाबूजी, आपको बुरा न लगे तो मैं आपका सर दबा दूं?’’  . ‘‘तुम्हे वापस जाने में देर हो जायेगी! मैं तुम्हे तकलीफ़ नहीं देना चाहता … पर घर में कोई और है भी नहीं,’’ पंकज ने विवशता दिखाते हुए कहा.
 . “इसमें तकलीफ़ कैसी? और मुझे घर जाने की कोई जल्दी भी नहीं है,” निराली ने कहा.
 . निराली झिझकते हुए पलंग पर उनके पास बैठ गई.
वो उनके माथे को आहिस्ता-आहिस्ता दबाने और सहलाने लगी.
एक स्त्री के कोमल हाथों का स्पर्श पाते ही पंकज का शरीर उत्तेजना से झनझनाने लगा.
उन्होंने कुछ देर स्त्री-स्पर्श का आनंद लिया और फिर अपने शब्दों में मिठास घोलते हुए बोले, ‘‘निराली, तुम्हारे हाथों में तो जादू है! बस थोड़ी देर और दबा दो.
’’  . कुछ देर और स्पर्श-सुख लेने के बाद उन्होंने सहानुभूति से कहा, ‘‘मैंने सुना है कि तुम्हारा आदमी कोई काम नहीं करता.
वो बीमार रहता है क्या?’’  . ‘‘बीमार काहे का? … खासा तन्दरुस्त है पर काम करना ही नहीं चाहता!’’ निराली मुंह बनाते हुए बोली.
 . ‘‘फिर तो तम्हारा गुजारा मुश्किल से होता होगा?’’. ‘‘क्या करें बाबूजी, मरद काम न करे तो मुश्किल तो होती ही है,’’ निराली बोली.
 . ‘‘कितनी आमदनी हो जाती है तुम्हारी?’’ पंकज ने पूछा.
 . ‘‘वही एक हजार रुपए जो आपके घर से मिलते हैं.
’’  . “कहीं और काम क्यों नहीं करती तुम?”.  . “बाबूजी, आजकल शहर में बांग्लादेश की इतनी बाइयां आई हुई हैं कि घर बड़ी मुश्किल से मिलते हैं.
” निराली दुखी हो कर बोली.
 . “लेकिन इतने कम पैसों में तुम्हारा घर कैसे चलता होगा?”.  . “अब क्या करें बाबूजी, हम गरीबों की सुध लेने वाला है ही कौन?” निराली विवशता से बोली.
 . थोड़ी देर एक बोझिल सन्नाटा छाया रहा.
फिर पंकज मीठे स्वर में बोले, ‘‘अगर तुम्हे इतने काम के दो हज़ार रुपए मिलने लगे तो?’’ निराली अचरज से बोली, ‘‘दो हज़ार कौन देता है, बाबूजी?’’  . ‘‘मैं दूंगा.
’’ पंकज ने हिम्मत कर के कहा और अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया.
 . निराली उनके चेहरे को आश्चर्य से देखने लगी.
उसे समझ में नहीं आया कि इस मेहरबानी का क्या कारण हो सकता है.
उसने पूछा, ‘‘आप क्यों देगें, बाबूजी?’’  . निराली के हाथ को सहलाते हुए पंकज ने कहा, ‘‘क्योंकि मैं तुम्हे अपना समझता हूँ.
मैं तुम्हारी गरीबी और तुम्हारा दुःख दूर करना चाहता हूँ.
”  . “और मुझे सिर्फ वो ही काम करना होगा जो मैं अभी करती हूँ?”.  . “हां, पर साथ में मुझे तुम्हारा थोड़ा सा प्यार भी चाहिए.
दे सकोगी?’’ पंकज ने हिम्मत कर के कहा.
 . कुछ पलों तक सन्नाटा रहा.
फिर निराली ने शंका व्यक्त की, ‘‘बीवीजी को पता चल गया तो?’’  . ‘‘अगर मैं और तुम उन्हें न बताएं तो उन्हें कैसे पता लगेगा?’’ पंकज ने उत्तर दिया.
अब उन्हें बात बनती नज़र आ रही थी.
 . ‘‘ठीक है पर मेरी एक शर्त है …’’.  . यह सुनते ही पंकज खुश हो गए.
उन्होंने निराली को टोकते हुए कहा, ‘‘मुझे तुम्हारी हर शर्त मंजूर है.
तुम बस हां कह दो.
’’  . ‘‘मैं कहाँ इंकार कर रही हूं पर पहले मेरी बात तो सुन लो, बाबूजी.
’’ निराली थोड़ी शंका से बोली.
 . अब पंकज को इत्मीनान हो गया था कि काम बन चुका है.
उन्होंने बेसब्री से कहा, ‘‘बात बाद में सुनूंगा.
पहले तुम मेरी बाहों में आ जाओ.
’’  . निराली कुछ कहती उससे पहले उन्होंने उसे खींच कर अपनी बाहों में भींच लिया.
उनके होंठ निराली के गाल से चिपक गए.
वे उत्तेजना से उसे चूमने लगे.
निराली ने किसी तरह खुद को उनसे छुड़ाया, “बाबूजी, आज नहीं.
… आपको दफ्तर जाना है.
कल इतवार है.
कल आप जो चाहो कर लेना.

स्रोत:इंटरनेट