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Shatir Dost Ka Jaal Xxx Hot Story

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रिहाना की चूत का स्वाद चखने के बाद अब अपनी बीवी की चूत कैसे ले पाउँगा? खैर, रिहाना की चूत का मैं गुलाम हूँ मैं अब.. इस xxx hot story का आखिरी शानदार भाग.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. आहिस्ता आहिस्ता लंड अपना रास्ता बनाता गया.
रिहाना भी पूरा सहयोग कर रही थी और जल्द ही उसकी चूत ने मेरे लंड को जड़ तक अपने अंदर जज्ब कर लिया.
उसकी चूत मेरी बेग़म जैसी चुस्त नहीं थी पर थी बड़ी लज्ज़तदार, अन्दर से मखमल जैसी मुलायम.
मुझे इल्म था कि मर्दों को हर नई चूत लज्ज़तदार लगती है और जब चूत की मालकिन रिहाना जैसी हसीन औरत हो तो लज्जत का कहना ही क्या! मैंने उसकी तारीफ करने में कंजूसी नहीं की, “कसम से रिहाना, ऐसी मस्त चूत आज पहली बार मिली है!” रिहाना ने शर्मा कर अपनी आँखें बंद कर लीं.
मैं उसकी चूत की गिरफ्त का लुत्फ़ लेते हुए नीचे झुक कर उसके कानों, गले और कंधे को चूमने लगा.
मेरा हाथ उसके मम्मे को सहला रहा था और उसके निप्पल को मसल रहा था.
मैं किसी तरह अपनी उत्तेजना पर काबू पाना चाहता था ताकि मैं जल्दी न झड़ जाऊं.
जो नायाब मौका मुझे आज मिला था मैं उसे लम्बे से लम्बा खींचना चाहता था.
मैने अपनी कोहनियों को रिहाना की बगलों के नीचे जमाया और अपने मस्ताये हुए लंड से हलके-हलके धक्के देने लगा.
रिहाना की आँखें बंद थीं पर वो खुश दिख रही थी.
शायद वो भी चुदाई का लुत्फ़ ले रही थी.
मैं भी उसे चोदने का पूरा मज़ा ले रहा था.
जब मेरी उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाती, मैं अपने धक्के रोक कर रिहाना के गालों और होंठों को चूमने लगता.
इससे उसका मज़ा बरकरार रहता और मैं अपनी उत्तेजना पर काबू पा लेता.
 . जब मैं रिहाना की चूत के कसाव का अभ्यस्त हो गया तो मैंने अपने धक्कों की ताक़त बढ़ा दी.
मैं अब लंड को लगभग पूरा निकाल कर अन्दर पेल रहा था.
ताक़त के साथ-साथ मेरे धक्कों की रफ़्तार भी बढ़ रही थी.
रिहाना ने मुझे कस कर पकड़ लिया था और वो भी नीचे से धक्के लगा रही थी.
जल्दी ही मेरे अंदर फुलझड़ियाँ सी छूटने लगीं.
मेरे गले से आनंद की सिसकारियां निकल रही थीं, ‘आऽऽऽऽह…! ओऽऽऽऽह…! ऊऽऽऽऽह…!’  . सिसकने वाला मैं अकेला नहीं था.
मेरे साथ रिहाना भी सिसक रही थी.
… उसे लुत्फ़-अन्दोज़ पा कर मेरा हमला तेज़ हो गया – फचाक, धचाक, फचाक – मेरा लंड उसकी चूत को तहस-नहस करने पर आमादा था! वो चूत के अन्दर गहराई तक मार कर रहा था.
ऐसा जबरदस्त हमला चूत कब तक झेलती! रिहाना का शरीर अकड़ा और एक लम्बी ‘आऽऽऽऽह!’ के साथ उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.
उसने मुझे अपनी बाहों में भींच लिया.
उसका जिस्म बुरी तरह कांप रहा था.
मुझे लगा कि बिजलियाँ कड़क रही हैं और बरसात होने वाली है पर अपनी पूरी विल पॉवर लगा कर मैंने किसी तरह अपने आप को झड़ने से रोक लिया.
 . जब रिहाना का होश लौटा तो उसने मुझे बार-बार चूम कर मुझे मूक धन्यवाद दिया.
मुझे फख्र महसूस हुआ कि मैं उसे इतना मजा दे पाया.
इससे भी ज्यादा फख्र मुझे इस बात पर था कि मैं अभी तक नहीं झड़ा था.
रिहाना जरूर मेरी मर्दानगी की कायल हो गई होगी.
मैं यही चाहता था.
उसे और खुश करने के लिए मैंने कहा, “रिहाना, तुम्हारे हुस्न की तरह तुम्हारी चूत भी लाजवाब है.
मुझे ख़ुशी है कि मैं उसकी थोड़ी इबादत कर पाया.
”  . मेरी बात सुन कर उसके चेहरे पर हया की लाली छा गई.
उसने नज़रें झुका कर कहा, “लाजवाब तो आप हैं! मुझे अफ़सोस है कि मैं आपको मंजिल तक नहीं पहुंचा सकी.
काश मैं भी आपकी खिदमत कर पाती.
”  . “मुझे कौन सी जल्दी पड़ी है,” मैंने कहा.
“हाँ, तुम्हे जल्दी हो तो और बात है.
”  . “जल्दी कैसी, मैं तो सिर्फ आपको खुश करना चाहती हूँ,” रिहाना ने कहा.
“आप जो करना चाहें, कीजिये और मुझ से कुछ करवाना हो तो हुक्म दीजिये.
”  . मेरा मन तो कर रहा था कि मैं रिहाना को अपना लंड चूसने को कहूं पर इसमें जल्दी झड़ने का जोखिम था.
बहरहाल मैं रिहाना में आये बदलाव से बहुत खुश था.
अब वो पूरी तरह मेरे काबू में लग रही थी.
मैंने उसके ऊपर से उतरते हुए कहा, “क्या तुम घोड़ी बन सकती हो?” रिहाना समझ गई कि मैं उसे पीछे से चोदना चाहता हूँ.
वो फ़ौरन पलट कर घोड़ी बन गई.
उसके मांसल और सुडौल चूतड़ मेरी आंखों के सामने नुमाया हो गये.
मेरी सहूलियत के लिए उसने अपनी टांगों को थोडा फैला दिया.
अब जो मंज़र मेरी नज़रों के सामने था वो बहुत ही दिलकश था.
एक तरफ रिहाना की चुस्त गुलाबी गांड मेरे लंड को दावत दे रही थी तो दूसरी तरफ उसकी फड़कती हुई चूत कह रही थी कि आओ और मेरे अन्दर समा जाओ.
लेकिन मुझे अपने बेकरार लंड को थोडा आराम देना था ताकि वो जल्दी निपट कर मुझे शर्मिंदा न कर दे.
 . मैंने आगे झुक कर अपना मुंह रिहाना के चूतड़ों के बीच रख दिया.
जैसे ही मेरी जीभ का स्पर्श उसकी गांड से हुआ, रिहाना चिहुंक उठी.
लेकिन वो मेरे मुंह से दूर होती उससे पहले ही मैंने उसकी रानों को पकड़ लिया.
मैं अपनी जीभ कभी उसके एक चूतड़ पर फिराता तो कभी दूसरे पर.
बीच-बीच में मेरी जीभ उसकी गांड और चूत का जायजा भी ले लेती.
रिहाना एक बार फिर मस्ती से सराबोर होने लगी.
उसका जिस्म मचलने लगा.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और अपनी जीभ उसकी गांड पर जमा दी.
जब ऊँगली और जीभ का दोहरा हमला हुआ तो रिहाना बेसाख्ता बोल उठी, “बस जावेद साहब, अब आ जाइए!”  . अब रिहाना को और मुन्तजिर रखना बे-अदबी होती.
इसलिए मैं एक बार फिर पोजीशन में आ गया, इस दफा उसके चूतड़ों के पीछे.
उसकी गांड और चूत दोनों मेरी पहुँच में थीं.
गांड के आकर्षण पर काबू पाना आसान न था पर मुझे इल्म था कि गांड मारने में जल्दबाजी मुझे उसकी चूत से भी महरूम कर सकती थी.
इसलिए फ़िलहाल मैंने उसकी चूत को ही अपना निशाना बनाया.
मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रख कर उसे आगे धकेला.
उसने अपनी चूत को ढीला छोड़ दिया था इसलिए लंड चूत के अंदर धंसने लगा.
चूत में काफी चिकनाई भी थी इसलिये मेरे लंड को उसके अंदर दाखिल होने में कोई मुश्किल पेश नहीं आई.
मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और उनकी चूत में धक्के मारने लगा.
मुझे अपना लंड उसके हसीन चूतड़ों के बीच चूत के अंदर-बाहर होता नज़र आ रहा था.
यह एक बहुत ही दिलकश नज़ारा था! मैं उसकी चूत में मुसलसल धक्के मार रहा था और वो अपनी कमर को पीछे धकेल कर मेरा पूरा साथ दे रही थीं.
उसके मुंह से बेसाख्ता आहें निकल रही थीं, “आह! आsssह! ओह! ओsssह! उंह…! हाय अल्लाह!” चार-पांच मिनट की पुरलुत्फ चुदाई के बाद मेरे लंड पर रिहाना की चूत का शिकंजा कसने लगा.
मुझे अपने लंड पर एक लज्ज़त भरा दबाव महसूस होने लगा.
मुझे लगा कि अब मेरा काम होने वाला है.
एक तरफ मैं अपनी मंजिल पर पहुँचने के लिए बेसब्र हो रहा था पर दूसरी तरफ मेरा दिल कह रहा था कि मज़े का यह आलम अभी ख़त्म नहीं होना चाहिए.
बहरहाल मैंने फैसला किया कि इतनी जल्दी निपटना मुनासिब नहीं है.
मैंने किसी तरह अपने धक्कों को रोका.
जब मैंने अपने लंड को चूत से बाहर खींचा तो रिहाना ने अपना चेहरा पीछे घुमाया.
उसकी सवालिया निगाहें पूछ रही थीं कि मैंने लंड को चूत से जुदा क्यों कर दिया.
मैंने उसे तस्कीन देते हुए कहा, “मैं फिर तुम्हे सामने से चोदना चाहता हूं.
अब सीधी लेट जाओ.

स्रोत:इंटरनेट