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Shatir Dost Ka Jaal Xxx Stories

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रिहाना के शर्म का पर्दा अब धीरे धीरे गिर रहा था, उसका विरोध बस एक औपचारिकता रह गयी थी.
अब उसका तराशा हुआ जिस्म मेरा होके रहेगा.. इन xxx stories का अगला धमाकेदार भाग.. Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. रिहाना के अल्फ़ाज़ जो भी हों, उसकी आवाज में कमजोरी आ गई थी.
उसने मेरे से दूर होने की कोई कोशिश नहीं की थी और उसका बदन ढीला पड़ चुका था.
मुझे लगा कि उसका विरोध अब नाम मात्र का रह गया है.
“मैं तो तुम्हे दिखा रहा हूं कि मैं तुम्हारा शौहर होता तो क्या करता,” मैंने उसे और पास खींच कर कहा.
“इसके लिए मुझे कुछ देर के लिए तुम्हे अपनी बेग़म समझना होगा.
और आज मैं अपनी बेग़म की ख़िदमत पैरों से नहीं बल्कि अपने हाथों से करूंगा.
”  . मेरा एक हाथ रिहाना की कमर के गिर्द था और दूसरे हाथ से मैं उसके कंधे को सहला रहा था.
पैरों की बात छेड़ कर मैंने उसे पिछली रात की याद दिला दी थी.
और पिछली रात जो हुआ था वो तो उसके शौहर की मौजूदगी में हुआ था.
जब उसने अपने शौहर के होते हुए कोई विरोध नहीं किया तो उसका आज का विरोध तो बेमानी था.
लेकिन वो इतनी जल्दी हथियार डालने को तैयार नहीं थी.
उसने कहा, “जावेद साहब, कल जो हुआ वो सिर्फ एक बेगुनाह छेड़छाड़ थी.
”  . “वो बेगुनाह थी तो इसमें कौन सा गुनाह है?” मेरा हाथ रिहाना के कंधे से फिसल कर उसके नंगे बाजू पर आ चुका था.
“वो बेगुनाह छेड़छाड़ थी तो ये बेगुनाह इबादत है! बस तुम मुझे थोड़ी और इबादत करने का मौका दे दो.
”  . “कल की बात अलग थी,” रिहाना ने जवाब दिया.
“कल मेरे शौहर साथ में थे.
”  . “इसीलिए तो तुमने मुझे कहा था कि मैं कभी भी दिन में यहाँ आ सकता हूं,” मैंने सोचा कि अब शर्म-ओ-लिहाज छोड़ने का वक़्त आ गया है.
“तुम्हे पता था कि दिन में तुम्हारे शौहर यहाँ नहीं होंगे.
क्या तुम मुझ से अकेले में नहीं मिलना चाहती थीं?”.  . अब रिहाना के लिए जवाब देना मुश्किल था.
फिर भी उसने कोशिश की, “हां, लेकिन मेरा मकसद …”  . मैंने उसकी बात काटते हुए कहा, “तुम्हारा और मेरा मकसद एक ही है.
तुम्हारा शौहर तुम्हारी अहमियत समझे या न समझे पर मैं समझता हूं.
तुम्हारा हुस्न बेशक इबादत के काबिल है.
तुमने मुझे अकेले में यहाँ आने के लिए कह कर बहुत हिम्मत की है.
अब थोड़ी हिम्मत और करो.
मुझे अपनी इबादत करने का मौका दे दो.
”  . मुझे लगा कि मैंने बहुत सधे हुए अल्फाज़ में अपनी बात कही थी.
उसका असर भी देखने को मिला.
रिहाना न तो कल रात जो हुआ उससे इंकार कर सकती थी और न ही इस बात से मुकर सकती थी कि उसने मुझे दिन में आने के लिए कहा था.
उसने धीमी आवाज में कहा, “जावेद साहब, आप सचमुच ऐसा समझते हैं? कहीं आप मुझे बना तो नहीं रहे हैं?”  . मेरी नज़र उसके मम्मों पर थी जो उसकी कमीज़ के महीन कपडे से झाँक रहे थे.
रिहाना ने जब देखा कि मेरी नज़र कहाँ थी तो उसने शर्मा कर अपनी गर्दन झुका ली.
मैं समझ गया कि उसने मेरे सामने समर्पण कर दिया है.
मैंने कहा, “मैं क्या समझता हूं यह मैं बोल कर नहीं बल्कि कर के दिखाऊंगा.
”  . मैंने रिहाना का एक हाथ अपने हाथ में लिया और उसे उठा कर अपने होंठ उस पर रख दिये.
जैसे ही मेरे होंठों ने उसके हाथ को छुआ, वो सिहर उठी.
उसका जिस्म मेरे जिस्म से सट गया.
उसके मम्मे मेरे सीने से लग गए.
मैं उसके नर्म हाथ को चूमने लगा.
मेरा मुंह रफ्ता-रफ्ता उसकी बांह और कंधे पर फिसलते हुए उसकी सुराहीदार गर्दन पर पहुँच गया.
मेरी जीभ उसकी गर्दन पर फिसल रही थी तो मेरा हाथ उसकी कमर पर.
मुझे अपनी खुशकिस्मती पर यकीन नहीं हो रहा था.
जिस रिहाना को हासिल करने के सपने मैं सालों से देख रहा था वो आज मेरे हाथों में कठपुतली बनी हुई थी.
मेरे होंठ उसके गालों पर पहुँच गए.
उसके नर्म और रेशमी गालों की लज्जत नाकाबिले-बयां थी.
मेरे होंठ उसके एक गाल का जायजा ले कर उसके गले के रास्ते दुसरे गाल पर पहुँच गए.
एक गाल से दूसरे गाल का सफ़र चलता रहा और साथ ही मेरा हाथ उसकी कमर से उसके सीने पर पहुँच गया.
 . जैसे ही मेरी मुट्ठी रिहाना के मम्मे पर भिंची, उसका जिस्म तड़प उठा.
उसकी आँखें बरबस मेरी आँखों से मिलीं.
उसका चेहरा मेरे चेहरे के सामने था.
मैने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये.
मैने अपने होंठों से उसके होंठ खोलते हुए उसका निचला होंठ अपने होंठों के बीच दबाया और उसका रस पीने लगा.
अब रिहाना की शर्म जा चुकी थी.
उसकी गर्म साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं.
उसने अपना मुंह खोल कर अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए.
जैसे ही मेरी जीभ उसके मुंह में पहुंची, उसने उसका स्वागत अपनी जीभ से किया.
जीभ से जीभ का मिलन जितना रोमांचकारी मेरे लिए था उतना ही रिहाना के लिए भी था.
वो पूरे जोश से मेरी जीभ से अपनी जीभ लड़ा रही थी.
मैं भी उसकी जीभ का रसपान करते हुए उसकी चून्ची को मसलने लगा। मेरा हाथ रिहाना के मम्मे को छोड़ कर उसके मांसल चूतड़ पर पहुँच गया.
कुछ देर चूतड़ को सहलाने और दबाने के बाद मेरा हाथ उसकी सलवार के नाड़े पर पहुंचा तो वो थोड़ा कसमसा कर बोली, “नहीं, जावेद साहब.
”  . मैं जैसे ओंधे मुंह ज़मीन पर गिरा.
मंजिल मेरी पहुँच में आने के बाद रिहाना मुझे रोक रही थी.
मैंने इल्तजा भरी निगाहों से उसकी तरफ देखा.
उसने अपनी बात पूरी की, “दरवाजा बंद नहीं है!” उसकी बात सुन कर मेरी नज़र दरवाजे पर गई.
डोर क्लोजर से किवाड़ बंद तो हो गया था पर चिटकनी नहीं लगी हुई थी.
मुझे अपनी बेवकूफी पर गुस्सा आया कि किवाड़ को धकेल कर कोई भी अन्दर आ सकता था.
मैं चिटकनी लगाने के लिए उठा पर रिहाना मेरे से पहले दरवाजे तक पहुँच गई.
जैसे ही वो चिटकनी लगा कर पलटी, मैंने उसे अपनी बाँहों में भींच लिया.
मैने उसे दरवाजे से सटा कर उसकी दोनों चूचियों पर अपने हाथ रख दिये.
मेरे होंठ एक बार फिर उसके होंठों पर काबिज हो गए.
साथ ही मैं उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा.
अब बिला-शक रिहाना पूरी तरह मेरे काबू में थी और मैं जान गया था कि मेरी बरसों की मुराद पूरी होने वाली है.
मैं कभी उसकी चून्चियों को कमीज़ के ऊपर से मसलता था तो कभी अपनी अंगुलियों से उसके निप्पल को मसल देता था.
रिहाना चुपचाप आँखें मूंदे अपनी चून्चियां दबवा रही थी.
उसका लरजता जिस्म और उसकी तेज़ होती सांसे उसकी उत्तेजना की गवाही दे रही थीं.
उसकी जीभ फिर मेरी जीभ से टकरा रही थी.
अब अगली पायदान पर चढ़ने का वक़्त आ गया था.
 . मैं अपना हाथ रिहाना की कमीज़ के ज़िप पर ले गया.
वो कुछ बोलती उससे पहले मैंने ज़िप को पूरा नीचे खिसका दिया.
ज़िप खुलते ही उसने अपना मुंह मेरे मुंह से अलग किया.
उसने मुझे सवालिया नज़रों से देखा.
उसकी नज़रों में शर्म भी थी.
मैं जानता था कि किसी भी औरत के लिए यह लम्हा बहुत मुश्किल होता है, मेरा मतलब है एक नए मर्द के सामने पहली बार अपने जिस्म को बेपर्दा करना.
मैंने रिहाना को बहुत प्यार से कहा, “रिहाना, प्लीज़ मुझे इस नज़ारे से महरूम मत करो.
मैंने इस लम्हे का सालों इंतजार किया है.
तुम चाहो तो अपनी आँखें बंद कर लो.

स्रोत:इंटरनेट