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Sunayna Ka Dard Kamukta Sex Story

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मैं सुनयना के नंगे बदन पर लगे जख्मों को साफ़ कर रहा था, ऐसे में उसके कोमल अंगो का स्पर्श होना तो लाज़मी था.
ऐसी परी सा बदन मेरी आँखों ने पहली बार देखा था, हाथों ने बार महसूस किया था.
उसका भी कुछ ऐसा ही हाल था.
हमारी इस kamukta sex story का अगला भाग- Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. मैने उसके घावों को अच्छि तरह से साफ किया.
इस दौरान कई बार उसकी चूचियो को दबाना उसके निपल्स को पकड़ कर खींचना पड़ा.
मेरा लिंग इस काम को करते करते जाने कब तन कर खड़ा हो गया.
जब मेरी आँखें उसके बदन से फिरती हुई उसकी आँखों पर गयी तो मैने पाया उसकी आँखें मेरे तने हुए लिंग पर टिकी हुई थी.
उसके गाल शर्म से लाल हो रहे थे.
अब उस कंडीशन मे मैं अपने लिंग के उभार को उसकी नज़रों से छिपाने मे असमर्थ था.
मैने देखा वो एक बार अपने निचले होंठ को दांतो से काट कर हल्के से मुस्कुरा उठी.
फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली उसकी होंठों पर वो हल्की सी मुस्कान अभी तक खिली हुई थी.
शायद वो आँखों को बंद करके मेरे लिंग की कल्पना कर रही थी.
मैने महसूस किया कि उसके ब्रेस्ट अब पहले जीतने नरम नही रहे.
उन मे हल्की सी सख्ती आ गयी थी.
निपल्स भी तन कर खड़े हो गये थे.
मैने उसकी बंद आँख का सहारा पाकर अपने हाथ से अपने लिंग को सेट इस तरह किया कि वो सामने वाले को ज़्यादा खराब नही लगे.
मेरे हाथ अब उसकी चूचियो पर हरकत करते हुए काँप रहे थे.
कुछ देर बाद चूचियो के सारे घाव ड्रेसिंग करके मैने कहा, ” लो अब अपने शर्ट के बटन्स बूँद कर लो ड्रेसिंग हो गयी.
है.
” वो कुछ देर तक वैसे ही पड़ी रही.
मैने सोचा कि शायद वो सो गयी हो लेकिन दरस्ल वो अपने ही ख़यालों मे खोई हुई थी इसलिए मेरी धीमी आवाज़ को वो सुन नही पाई.
मैने उसे धीरे से हिला कर वापस अपनी बात दोहराई.
वो शर्म से तार्तार हो गयी.
“सॉरी” कह कर उसने अपने शर्ट के बटन लेते लेते ही बंद करने शुरू किए.
” नीचे भी हैं क्या घाव.
” मैने अपने माथे पर उभर आए पसीने को पोंचछते हुए उससे पुचछा.
मेरे सवाल को सुन कर उसने आँखें खोली और बिना कुछ कहे हां मे सिर हिलाया.
” अब इसे उतारो” मैने उसकी लूँगी की ओर इशारा किया.
“मुझे शर्म आती है.
” “शर्म किस बात की अभी तो कुछ देर पहले मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी.
मैने तो तुझे उस अवस्था मे देखा है जिस हालत मे सिर्फ़ तुझे तेरा पति देखा होगा.
” ” नही रहने दो अब”. ” देख घाव गहरे हैं सेपटिक हो गया तो फिर नासूर बन जाएगा.
तू आँखें बंद कर मैं तेरी लूँगी हटाता हूँ.
” ” नही पहले आप भी अपनी आँखें बंद करो.
नही तो मुझे शर्म आएगी.
” ” अरे पगली अगर मैने आँखें बंद कर ली तो तेरे घावों को सॉफ कौन करेगा?”. मैने अपने हाथ उसकी लूँगी की गाँठ पर रख दिए.
उसने तुरंत मेरे हाथों को थाम लिया.
” ठहरो मैं खुद खोल देती हूँ.
वैसे मुझे तुम्हारे सामने नग्न होते कोई झिझक नही हो रही है” “क्यों मैं तो एक अंजान पराया मर्द हूँ”. ” नहीं तुम सबसे अलग हो.
उनके जैसे नहीं हो जिन्हों ने मेरी ये हालत की है.
” कह कर उसने अपनी लूँगी की गाँठ को ढीली कर दी.
सामने से कटी उस लूँगी के दोनो किनारों को पकड़ कर मैने अलग कर दिया.
उसने इस बार अपनी आँखें नहीं बंद की.
उसकी आँखें एकटक मेरे चेहरे पर लगी हुई थी.
लेकिन मेरी आँखें तो मानो उसके निचले बदन के निर्वश्त्र होते ही अपनी सुध बुध खो चुका था.
उसने अपनी दोनो टाँगों को सख्ती से एक दूसरे से जोड़ रखा था.
उसके जांघों के जोड़ पर जहाँ एक “वाई” की आकृति बन रही थी.
छ्होटे छ्होटे सलीके से ट्रिम किए हुए बाल बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे.
कुछ देर तक उसकी लूँगी के दोनो पल्लों को हाथ मे थामे बस बुत की तरह उसे देखता ही रहा.
फिर मैने चौंक कर उसकी तरफ देखा और उसे अपनी तरफ देखता पाकर हड़बड़ा गया.
उसके चेहरे पर एक ना समझ मे आने वाली मुस्कान खिली थी.
मैने झट अपने माथे पर छल्क आए पसीने को पोंछ कर उसके टाँगों के जोड़ की तरफ देखा.
उसके एक टांग को अपने हाथों से पकड़ कर अलग किया.
उसने इस बार अपनी तरफ से किसी तरह का विरोध नही किया.. उसने अपना बदन ढीला छोड़ दिया था.
उसके एक टांग को घुटनो से मोड़ कर अलग किया.
फिर दूसरी टांग को भी वैसे ही किया.
उसकी योनि खुल कर सामने आ गयी थी.
उसके योनि और उसके आस पास भी काफ़ी सारे दाँतों के निशान थे.
दोनो टाँगों को अलग कर मैं अपने चेहरे को उसकी योनि के पास लाया.
उसकी योनि मेरी आँखों से मुश्किल से 6″ की दूरी पर होगी.
मैने सेव्लान मे भिगो कर रूई को पहले उसके घावों पर फिराया.
उसने अपने दाँत से अपने निचले हन्त को सख्ती से पकड़ रखा था.
शायद उसकी ये अदा होगी.
उसके हाथ तकिये को अपनी मुट्ठी मे ले रखे थे.
मैं उसके घावों पर दवाई लगा रहा था.
” कितनी बेरहमी से तुम्हारे बदन से खेला है उन लोगों ने.
” ” हां वो साले चार थे साथ मे इतना बड़ा एक कुत्ता भी था.
साले पता नही कब से मुझ पर नज़र रखे हुए थे.
उस दिन मुझे अंधेरे मे घर लौटते हुए देख कर उनकी बाँछे खिल गयी.
और अपनी वॅन को लाकर मेरे नज़दीक रोक कर मेरी गर्दन पर चाकू रख कर मुझे वॅन मे आने के लिए विवश कर दिया.
अंदर दो आदमी पीछे बैठे हुए थे और उनके पैरों के बीच काफ़ी तगड़ा और मोटा एक कुत्ता भी बैठा हुआ था.
मुझे अंदर खींच कर उन दोनो ने अपने बीच मे मुझे बिठा लिया.
टिल्लू दादा के आदमियों को देख कर तो मैं पहले से ही डरी हुई थी ऊपर से वो डरावना कुत्ता अपने दाँत निकाले मुझे घूर रहा था.
उन्हों ने मुझे धमकी दी कि अगर मैने किसी प्रकार का विरोध किया तो कुत्ता मुझे नोच कर खा जाएगा.
उस कुत्ते ने अपने दोनो आगे के पैर मेरी गोद मे रख दिए और मेरे मूह के सामने अपनी लंबी जीभ निकाल कर लपलपाने लगा.
मैं किसी बुत की तरह बिना हीले दुले बैठी हुई थी.
अगल बगल के दोनो आदमी मेरे बदन से मेरे कपड़े हटते जा रहे थे.
वो जैसा चाह रहे थे वैसा मेरे बदन से खेल रहे थे और मेरे पास उनको सहयोग करने के अलावा कोई चारा नही था.
एक बार मैने हल्का सा विरोध किया तो कुत्ता गुर्रा उठा.
मैं सहम कर अपने मे सिमट गयी.
कुछ ही देर मे मैं उनके बीच पूरी तरह नंगी बैठी हुई थी.
” मैं उसकी बातों को सुनते हुए उसकी योनि पर रुई फिरा रहा था.
फिर मैने अपने दोनो हाथों की उंगलियों से उसकी योनि की फांकों को अलग किया और फैलाया.
अंदर कोई जख्म तो नही दिखा मगर उसकी योनि के भीतर झाँकते हुए मेरा पूरा बदन सिहरन से भर गया.
मेरा लिंग पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया था उसे किसी भी तरह से शांत कर पाना अब मेरे वश मे नही था.
वो इस तरफ से अपना ध्यान हटाने के लिए बिना रुके उसके साथ हुई घटनाओ को दोहराती जा रही थी.

स्रोत:इंटरनेट