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Tanha Mausi Jawan Beti Saxy Hindi Story

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हुस्न की दोनों मल्लिकाएं, माँ और बेटी मेरे सामने अपने बूब्स चमकाते हुए खडी थी.. ऐसे मैं कोई भी इंसान अपने होश खो सकता है.
इस saxy hindi story का आखिरी धमाकेदार भाग.. के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. बरखा की गोल गोल पर्फेक्ट ताने हुए 32 साइज़ के मुम्में बाहर आ गए.
मौसी ने दोनो पे हाथ फेरा और कहा, “लो ज़रा मेरी ब्रा तो खोलना.
” मौसी ने अपनी कमर बरखा की तरफ की.
और उस ने मौसी की ब्रा खोल दी.
अब दोनो के जिस्मो पे सिर्फ़ शलवार थीं.
मैं कमरे की ब्लू रोशनी मे दोनो के चमकते हुए मुम्में देख रहा था.
“लो मेरे राजा तुम इन से खेलो हम इस से खैलते हैं.
” मौसी ने बरखा की एक चूची को पकड़ कर मेरे सामने कर दिया और मैंने हाथ बढ़ा कर बरखा की चूची को पकड़ लिया और दबाने लगा.
बरखा को मैं आज मौसी के सामने छू रहा था.
उसे बेहद मज़ा आने लगा और मौसी ने मेरे हार्ड लंड को अपने हाथो मे ले लिया और फिर थोड़ा सा झुक कर लंड पे किस्सिंग करनी शुरू कर दी.
मुझे मौसी की गर्म गर्म साँसे पागल कर रही थीं और मेरी आँखे बंद हो गईं.
उधर बरखा मेरे और नज़दीक हो कर मेरे दोनो हाथो से अपने मुम्मों  को मसलवा रही थी और आँखे बंद कर के लंबी लंबी साँसे ले रही थी.
उस का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था.
तभी मौसी ने मुँह खोल कर मेरा आधे से ज़्यादा लंड अपने अंदर ले लिया और चूसने लगी.
मेरा बदन अकड़ने लगा.
मौसी ने दो तीन बार ही चूसा कि फॉरन ही मेरा फोव्वारा मौसी के मुँह मे ही छूट गया.
मौसी को मेरा नमकीन पानी अपने मुँह मे आते महसूस हुआ लेकिन मौसी ने मेरा लंड बाहर नही निकाला.
वो वैसे ही उसे चूसती रही, अंदर बाहर करती रही और मेरे कम का फुल लोड मौसी मुँह मे भर गया.
“आह्ह्ह्ह! गंदे! इतनी जल्दी.
” मौसी ने अपने दुपट्टे से अपना मुँह साफ करते हुए कहा तो बरखा ने भी आँखे खोल कर मौसी की तरफ देखा.
उसे नही पता चल सका कि ये क्या हुआ है.
“मौसी आज पता नही क्या हुआ.
” मैने धीरे से कहा.
“हां मुझे पता है.
आज तेरे हाथों मे बहन के मुम्में जो हैं.
कैसा लगा?” मौसी ने कहा.
“बहुत ही अच्छा मौसी बड़ा मज़ा आया.
” मैंने मस्ती से भरी आवाज़ मे कहा और ज़ोर बरखा के मुम्में को दबा दिया.
बरखा ने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी और बोली, “क्या केरते हो भैया दर्द होता है यहाँ, आहिस्ता पकडो ना.
” बरखा ने मेरे चेहरे पे हाथ फेरते हुए कहा.
“ओह! सॉरी बरखा मैं दरअसल झड़ गया था ना पता ही नही चला.
” “चलो अब तुम ज़रा बरखा को भी वो मज़ा दो मैं तुम्हे दोबारा हार्ड केरती हूँ.
” मौसी ने कहा तो मैंने बरखा को बेड पे सीधा लिटा दिया और उस की टाँगे ज़रा सी खोल कर  करवट के बल उस के ऊपर आ गया और बरखा के होंठो पे किस्सिंग केरने लगा तो मौसी मेरे सेमी एरेक्टेड लंड के पास लेट गई और मेरे लंड पे ज़ुबान फेरने लगी जिस से लंड फिर से हार्ड होने लगा.
बरखा ने पहले तो अपने होंठ कस के बंद किए हुए थे लेकिन उसे जब मज़ा आने लगा मेरे चूमने का तो वो भी रेस्पॉन्स देने लगी उस ने अपने होंठ खोल दिए.
अब मेरे और बरखा की ज़ुबाने एक दूसरे से खेलने लगीं.
ऐसी किस्सिंग का बरखा को बहुत मज़ा आता था.
मौसी ने चूम के चाट के चूस के मेरा लंड फिर से हार्ड कर दिया था और वो मुसलसल मेरा लंड उपर से नीचे तक चाट रही थी और फिर वो मेरे लंड के नीचे थैली मे बंद बॉल्स को ज़ुबान से चाटने लगी.
मेरे साथ ये पहली बार हो रहा था.
मेरे बदन मे लहरे सी उठने लगीं और  एक नया सा सरूर आने लगा और मेरी किस्सिंग मे जोश सा आ गया और मैंने बरखा के पूरे चहरे को चूमना शुरू कर दिया.
फिर उस के कानो पे आया और गर्दन पे और फिर दोनो हाथ मे बरखा के मुम्में पकड़ लीं और उस के लेफ्ट निपल को मुँह मे ले कर चूसने लगा और ज़ुबान उस पे फैरने लगा.
बरखा के दोनो निपल्स हार्ड हो कर खड़े हो गये थे.
मेरी ज़ुबान उस के निपल के गिर्द गोल गोल घूम रही थी और वो मज़े की दुनियाँ मे आँखे बंद किए उड़ रही थी.
मैं दीवानो की तरह अब उस की मुम्मों को चूस रहा था, काट रहा था और दोनो हाथो से ज़ोर ज़ोर से सहला भी रहा था.
तभी बरखा को महसूस हुआ कि उस की टाँगो के दरमियाँ फँसी हुई छोटी सी चूत से पानी का सैलाब आ गया है.
और वो झडने लगी.
उस ने अपनी टाँगे और भी फैला लीं और अपने कुल्हो को ज़रा सा उठा कर अपनी चूत को अपने अप्पर लेते हुए अपने भाई की पसलियो से लगाया और अच्छी तरह ज़ोर से रगड़ा.
मैंने ये हरकत महसूस की और बरखा की मुम्मों से हाथ हटाया और उस की शलवार उतारने लगा.
बरखा ने गाँड को उठा कर मुझे अपनी शलवार उतरने दी.
इस हरकत से मेरा लंड मौसी क मुँह से निकल गया और वो उठ कर बैठ गई और देखने लगी क़ि मैं बरखा की शलवार उतार रहा हूँ.
“गुड! अब आए हो ना दोनो तुम पूरे मज़े मे! शाबाश बेटा आज इस को वो मज़ा देना कि सारी ज़िंदगी याद रखे.
” मौसी ने जोश से भरी आवाज़ मे कहा और मुझे भी जोश आ गया और मैंने बरखा की शलवार उतार कर उस की टांगे ज़रा सी और फैला दीं और झुक गया बरखा की छोटी सी चूत पर मुँह रखा.
मैंने जैसे ही बरखा की चूत को चूमा बरखा की तो जैसे जान ही निकल गई उस ने गाँड उठा कर अपनी चूत को मेरे मुँह पे और दबा दिया.
मौसी इतने मे बरखा के पहलू मे आ गई और बरखा के मुम्में चूसने लगी.
मैंने ज़ुबान निकाल कर बरखा की चूत के लबो पर फैरनी शुरू कर दी बरखा की चूत का ज़ायक़ा मेरी ज़ुबान पे आने लगा और मैं भी दीवाना हो गया.
आज तो बहुत मज़ा आ रहा था.
अकेले मे तो खूब चाटा था पर आज मौसी के सामने ही मज़ा ज़्यादा आ रहा था.
मौसी उसके मुम्मों को चूस रही थी.
बरखा तड़प रही थी मस्ती से.
मैं और ज़ोर से बरखा की चूत चाटने लगा.
बरखा भी अपनी गाँड उठा उठा कर मेरी ज़ुबान को अपनी चूत के और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी.
उस के मुँह से हल्की हल्की आवाज़ मे तेज़ तेज़ सिसकियाँ निकालने लगीं.
मौसी ने बरखा को बुरी तरह कसमसाते हुए महसूस कर के कहा, “रोहन बेटा बस करो तेरी बहन मज़े से मर जाएगी.
उठो अब मैं बताती हूँ क्या करना है.
” मौसी ने मेरे सिर मे हाथ फेरते हुए मुझे बरखा की चूत से उठाया.
मे मौसी की तरफ देखने लगा.
मेरे गालो पे बरखा की चूत का सारा पानी लगा हुआ था.
मैंने उसकी चूत से मुँह हटाया तो बरखा ने कसमसाना बंद कर दिया लेकिन उस की आँखूं मे से आँसू निकलने लगे थे.

स्रोत:इंटरनेट