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मैं एक अच्छे खाते पीते परिवार की बहु हूँ, मेरा नाम काजल है, मैं एक बाईस वर्षीय युवती हूँ, मेरी शादी को मात्र दो वर्ष बीते हैं। मैं अपने घर में एकमात्र लड़की थी, मेरे दो बडे भाई थे, दोनों विदेश में रहते थे। मेरे पिता सरकारी अफसर थे, इतने बडे अफसर थे कि उन्हें बंगला मिला हुआ था। मेरी मां एक पढ़ी-लिखी स्त्री थी जो अपना अधिकतर समय तरह तरह के सामाजिक कार्यों या क्लबों में बिताती थी। मेरे बड़े भाइयों ने शादी भी विदेशी लड़कियों से की थी। मैं स्कूल से ही आवारा हो गई थी, मैं कान्वेंट स्कूल में पढ़ती थी, जब मैं अठारहवें वर्ष मैं पहुंची, उस समय मैं ग्यारहवीं कक्षा में थी, तब से मेरी बर्बादी की teacher sex kahani आरम्भ हुई, जो इस प्रकार है :  . अच्छा …..ऐसी क्या तरकीब है? मैने पूछा। सुन…….
! विवेक सर ने ही मुझे बताया था और मैने उन्होंने जैसा कहा था वैसा ही किया ….
बस मेरे विज्ञान में पास होने की गारण्टी हो गई…..परिधि बोली। अच्छा …अगर तूने वह तरकीब आसानी से अपना ली है तो फिर मैं भी आजमा सकती हूँ, ज्यादा कठिन थोड़े ही होगी…! मैं बोली। कठिन…..? अरे कठिन तो बिलकुल भी नहीं है….
बल्कि इतनी आसान है कि पूछ मत….
लेकिन थोड़ी अजीब जरूर है……! परिधि बोली। अच्छा…..फिर बता….
मेरी जिज्ञासा बढ़ गई थी। अपने विवेक सर हैं न ……उन्हें डांस देखने का बहुत शौक है……अकेले रहते हैं न अपने फ्लेट में….
बस उनके सामने डांस करना होता है……परिधि बोली। क्या….. डांस………कैसा डांस…..? और फिर डांस से विज्ञान में पास होने का क्या सम्बंध ? मैने उलझते हुए कहा। अरे……डांस तो डांस होता है….
बस ये है कि थोड़ा थोड़ा कैबरे करना होता है…… वो तो मैं तुझे करवा दूंगी, और इसका पास फेल से सीधा संम्बंध है, क्योंकि विवेक सर ने ही पिछले साल छः स्टूडेंट्स को उनके डांस से खुश होकर ही पास करवा दिया था, अब मैं भी पास हो जाउंगी क्योंकि वे मेरे डांस से भी खुश हो गए हैं….
परिधि बोली। डांस कैसे करना होता है? मेरा मतलब है कि कपड़े पहन कर करना होता है या बिन कपड़ों के….. ? मैने सशंकित स्वर मैं पूछा, क्योंकि कैबरे तो लगभग नंगा ही होता है। अरे पागल….
कपड़े पहन कर…ये अपनी शर्ट और स्कर्ट की ड्रेस पहने हुए ही…..बस कुछ इस तरह के स्टेप्स लेने पड़ते है कि स्कर्ट के ऊपर उठने से जांघों की झलक दिखाई दे और शर्ट के अन्दर स्तन हिलें…… परिधि ने कहा।. क्या…..? मैं चौंकी और फिर बोली…ऐसा क्यों….
? तू तो बिलकुल अनाड़ी है….
अरे विवेक सर को ऐसा अच्छा लगता है बस, इसलिए ! अब ज्यादा ना सोच !अगर तुझे विज्ञान में पास होना हो तो मुझे कल बता देना… ! इतना कह कर परिधि मेरे निकट से उठ गई। मैं उसके बाद सारा दिन और रात को सोते समय तक सोचती रही। अगले दिन मैने परिधि से कह दिया कि मुझे मंजूर है, पर मेरे साथ तू भी डांस के लिए चलेगी विवेक सर के घर पर !वह तैयार हो गई। बस फिर क्या था, हम दोनों उसी शाम विवेक सर के फ्लैट पर पहुँच गये। विवेक सर ने दरवाजा खोला, सामने हम दोनों लड़कियों को पाकर उनकी छोटी–छोटी आँखें चमक उठीं, मेरे मन में ख्याल आया कि मैं कहीं कुछ गलत तो नहीं करने जा रही ? लेकिन परिधि के चेहरे पर छाये आत्मविश्वास ने मुझे भय मुक्त कर दिया। हम दोनों को अन्दर करके विवेक सर ने द्वार बन्द कर दिया।. विवेक सर ने कुर्ते के नीचे लुंगी बाँध रखी थी, आओ परिधि…….
अन्दर चलो….. वहाँ कालीन बिछा है, वहीं बठेंगे ! विवेक सर ने कहा। परिधि मेरे हाथ को थामे एक दूसरे कमरे में घुस गई, मैने उस कमरे का वातावरण देखा तो चिहुंक उठी, कमरे में ट्यूब लाइट की रौशनी बिखरी हुई थी, दीवारों पर हालीवुड की सेक्सी हिरोइनों के अत्ति उत्तेजक पोस्टर चिपके हुए थे। तीन पोस्टरों में से एक पर एक बहुत ही सेक्सी शरीर वाली हीरोईन ने मात्र निक्कर और छोटा सा टॉप पहना हुआ था, जिसके दोनों पल्ले उसने अपने हाथों से खोल कर पकड़े हुए थे, उसके बिलकुल गोलाई में तने स्तन अनावृत थे, दूसरे पोस्टर की हीरोईन ने अपने नितंब ताने हुए थे, वह आगे को झुकी हुई थी, उसके चिकने नितंबों के मध्य बिकनी की बारीक सी पट्टी जाकर खो गई थी, तीसरे पोस्टर में हीरोईन ने अपने कमनीय शरीर पर मात्र एक पारदर्शी गाउन पहना हुआ था, उसका शरीर उसमें से पूरी तरह झलक रहा था, उसने अजीब से ढंग से आँखें बंद करके एक खंबे को पकड़े हुआ था, फर्श पर दीवा एसे दीवार तक कालीन बिछा हुआ था, एक कोने में एक म्यूजिक सिस्टम रखा था।.  . इससे पहले कि मैं कमरे की डेकोरेशन पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करती, परिधि ने मेरा हाथ छोड़ कर म्यूजिक सिस्टम पर एक तेज रफ़्तार के संगीत का अंग्रेजी गानों का कैसेट चढ़ा दिया, कमरे में स्वर लहरियां गूंजने लगी और परिधि बिना किसी पूर्व सूचना के थिरकने लगी। मैने गौर किया कि वह अश्लील ढंग से मटक रही थी और भांति-भांति का चेहरा बना रही थी।. अरे…तू खड़ी क्यूँ है ?….. शुरू हो जा….
! परिधि ने मटकते हुए कहा। मैं चुप रही और उसके अंदाज देखने लगी। उसकी घुटनों से ऊँची स्कर्ट बार-बार ऊपर उड़ती थी और उसकी केले के तने जैसी चिकनी और गोरी जांघें बार-बार चमक रही थी, उसके चौड़े कूल्हे भी उत्तेजक ढंग से संचालित हो रहे थे, शर्ट में कैद अर्ध-विकसित स्तन जो कि अमरुद के आकार के थे, बार-बार हिल रहे थे। उसने शर्ट के तीन बटन भी खोल रखे थे, जहां से गोरे चिट्टे सीने का गुलाबी रंग स्पष्ट नजर आ रहा था। उसी समय विवेक सर कमरे में आये, उनके हाथों में दो बीयर थी और तीन ग्लास थे। वे परिधि से बोले- परिधि ….
! पहले कुछ पी लो ! फिर नाचना, कम..आन…….
बैठो काजल तुम भी बैठो ! विवेक सर ने कहा। परिधि ने नाचना बंद कर दिया और मेरा हाथ पकड़ कर बैठती हुई बोली- बैठ ना यार ! कैसे अजनबी की तरह खड़ी है ….
भूल जा सब कुछ……इस समय विवेक सर हमारे टीचर नहीं बल्कि हमारे फ्रेन्ड हैं….
कम….
आन….. मैं उसके साथ बैठ गई।. परिधि ने एक टांग पूरी फैला ली थी, दूसरी का घुटना ऊपर को मोड़ लिया था और एक हाथ को कालीन पर टिका दिया था, टांगों की विपरीत मुद्रा के कारण उसकी स्कर्ट उसकी चिकनी जाँघों से काफी ऊपर तक हट गई थी यहाँ तक कि उसकी आसमानी रंग की पेंटी की किनारी भी दिख रही थी, मगर उसे इस बात की खबर ही नहीं थी। विवेक सर ने तीनों ग्लासों में बीयर डाली और हम दोनों से कहा- उठाओ भई अपने ग्लास !. उन्होंने खुद भी एक ग्लास उठा लिया था, परिधि ने भी एक ग्लास उठाया तो मैने भी ग्लास उठा लिया। मैं पालथी मारकर बैठी थी इसलिए मेरी स्कर्ट में मेरी टाँगे छुपी हुई थी, मेरी शर्ट के भी सभी बटन लगे हुए थे, बीयर मेरे लिए नई चीज नहीं थी, मैं पहले कह चुकी हूँ कि मैं एक धनी परिवार से हूँ, इसलिए कई बार कई पार्टियों में मैं बीयर चख चुकी हूँ।.
स्रोत:इंटरनेट