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Teacher Ne Seal Todi Pahli Chudai Ki Kahani

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मेरी माँ एक नंबर की रंडी थी.
पता नहीं कहाँ कहाँ से चुदती रहती थी.
यहाँ तक की मेरे टीचर से भी, पर उस दिन ऐसा कुछ हुआ की मेरा भी उद्घाटन हो गया.. आखिर उसी माँ की बेटी हूँ.
मेरी pahli chudai ki kahani हाज़िर है.. दोस्तों मेरा नाम रीना है और में पुणे की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र करीब 24 साल है.
मेरी मम्मी और पापा का तलाक हुआ था, तब मेरी उम्र करीब दस साल की थी और अब तक मैंने अपनी माँ को कई लोगों से चुदते हुए देखा था इसलिए मुझे भी अब चुदाई करने की इच्छा होने लगी थी और फिर भी में कभी कभी अपनी चूत में उंगली करके चुप बैठ जाती.
मेरी माँ कुछ घरों में काम करती थी, लेकिन मैंने वहां भी उनको कई बार चुदते हुए देखा था और कई बार तो मैंने उनको एक साथ तीन तीन लोगों से चुदते हुए देखा था और उनकी इतनी जबरदस्त चुदाई को देखकर मेरी चूत में आग सी लगने लगती.
में उनकी चुदाई को देखकर बिल्कुल पागल सी होने लगती और फिर में अपनी चूत को किसी ना किसी तरह शांत करती.
दोस्तों अब में आप सभी को अपनी चुदाई की कहानी को थोड़ा विस्तार से बताती हूँ, जिसमे मैंने अपनी चूत को पहली चुदाई करवाकर शांत किया और उस चुदाई ने मेरी जिन्दगी को बदलकर रख दिया.
में उम्मीद करती हूँ कि यह आप सभी को अच्छी भी लगेगी.
अब आप सभी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए में अपनी कहानी पर आती हूँ.
दोस्तों एक दिन मेरी माँ ने मुझसे कहा कि में आज 20 दिन के लिए बाहर घूमने जा रही हूँ.
में : लेकिन किसके साथ?. माँ : में जहाँ पर काम करती हूँ, उन्ही के साथ में बाहर जा रही हूँ.
तो में समझ गई कि माँ अब बाहर जाकर चुदने वाली है और वो इस वजह से ही बाहर जाने वाली थी.
में : और साथ में कौन-कौन है?. माँ : शर्मा अंकल और उनके कुछ रिश्तेदार भी है.
दोस्तों अब तो उनका यह जवाब सुनकर मेरा शक़ हक़ीकत में बदल गया, क्योंकि मैंने उनके ही घर में उनसे और उनके कुछ दोस्तों के साथ माँ को बहुत बार चुदते हुए देखा था.
में : क्यों आप लोग कब जाने वाले हो और कितनी बजे?. माँ : में बस अभी तैयार होकर जाने वाली हूँ और तू मेरे जाने के बाद घर को ठीक से संभालना और रात को दरवाजा बिल्कुल भी नहीं खोलना, में तुझे यह सारी बातें जाते हुए समझा रही हूँ और इन बातों का ध्यान रखना.
फिर माँ कुछ देर में तैयार हो गई और करीब 3:00 बजे माँ बाहर निकली तो मैंने माँ से कहा कि में भी बाहर आती हूँ तुम्हे छोड़ने के लिए, लेकिन माँ ने मुझे कहा कि नहीं और मेरे ज्यादा कहने के बाद बोली कि ठीक है और माँ ने अंकल को कॉल करके बोला कि में आ रही हूँ, कब निकलना है? तो वो बोले अभी और फिर माँ ने उन्हे बताया कि में उनको छोड़ने आ रही हूँ.
वो बोले कि ठीक है और हम दोनों अंकल के घर पर चले गये.
माँ और अंकल गाड़ी में बैठ गये तो में भी उनके सामने से घर जाने के लिए वापस घूमी तो उनको लगा कि में घर चली गई हूँ और मैंने अपनी गाड़ी को थोड़ा आगे की तरफ खड़ा किया और फिर मैंने छुपकर देखा कि दो लोग गाड़ी में बैठ गये और फिर वो चले गये.
फिर में भी अपने घर पर आ गई और वहीं सब सोचने लगी जो मेरी माँ अधिकतर समय किसी भी गेर मर्द के साथ करती थी और यही सब सोचकर में भी गरम हो गई और अपनी चूत को अपने एक हाथ से सहलाकर शांत करने की कोशिश करने. लगी.
में सोच रही थी कि काश कोई मुझे भी चोदता और अब में चुदने के लिए एकदम तैयार थी, लेकिन में बदनामी की वजह से चुप रहती थी.
तभी मुझे अपने दरवाजे पर कुछ आहट सुनाई दी और जब मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो बाहर एक भिखारी दरवाजे पर आया हुआ था.
उसने मुझसे खाने के लिए रोटी मांगी तो मैंने किचन में जाकर उसे खाना लाकर दिया और उसको हमारे दरवाजे पर बैठकर खाना खाने के लिए कहा.
फिर वो दरवाजे पर बैठकर खाना खाने लगा और उसका खाना पूरा होने तक मेरी नजरे बार बार उसके लंड की तरफ जा रही थी और जब उसका खाना खत्म हुआ तो उसने मुझसे पीने के लिए पानी माँगा.
फिर मैंने उसे पानी देते वक़्त अपनी ड्रेस की चुनरी को जानबूझ कर नीचे गिरा दिया और फिर वो मेरे बूब्स की लाईन को देखने लगा.
मेरे थोड़ा झुकने से मेरे बूब्स और भी बाहर आने लगे और उसे अपनी तरफ आकर्षित करने लगे तो मुझे लगा कि अब मेरा निशाना एकदम ठीक लग रहा है, क्योंकि उसकी नजरे मेरे बूब्स से हटने को तैयार ही नहीं थी, वो मुझे खा जाने वाली नजरों से लगातार घूर रहा था.
फिर जब तक उसने पानी पिया तब तक मैंने अपनी चुनरी को ठीक कर लिया था और अब धीरे धीरे रात होने को आई थी और वो सर्दियों का महिना भी था.
फिर वो मुझसे बोला कि क्या में यहीं पर सो जाऊँ.
हमारे घर में थोड़ा खुला आंगन था और एक दरवाजा भी था, लेकिन दरवाजा एक साईड होने के कारण ज्यादातर नहीं दिखता था.
फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है और में दरवाजा लगाकर अंदर आ गईं, लेकिन अब भी मेरे दिमाग़ में वो सब आ रहा था और में बार बार सोच रही थी कि उसका लंड कैसा होगा? कितना मोटा, लंबा होगा और में यह सब बातें सोच सोचकर अब तक बहुत गरम हो गई थी और अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
फिर मैंने दरवाजा खोलकर देखा कि क्या वो सो गया है? मैंने देखा कि वो अभी तक जाग रहा था.
मैंने उससे कहा कि अंदर सो जाओ नहीं तो तुम्हे बाहर ठंड लगेगी.
फिर वो पहले बोला कि नहीं में यहीं पर ठीक हूँ और मेरे थोड़े बहुत कहने के बाद वो सोने के लिए अंदर आ गया.
फिर मैंने उससे कहा कि तुम सबसे पहले नहा लो बाथरूम में गरम पानी रखा हुआ है, उसके बाद में तुम्हे सोने के लिए कुछ देती हूँ.
फिर वो बोला कि नहीं में यहीं पर ऐसे ही ठीक हूँ और उसने अपना एक कपड़ा नीचे जमीन पर बिछाया और वहीं पर सो गया.
में अब उसके लंड के लिए तड़प रही थी, में उसकी तरफ मुहं करके लेट गई और ना जाने कब मुझे नींद आ गई और वो रात किसी ना किसी तरह निकली और सुबह उठकर वो चला गया.
फिर मैंने सबसे पहले अपनी बाथरूम में जाकर अपनी चूत के बाल साफ किए और फिर नहाकर तैयार हो गयी.
दोस्तों में घर पर अधिकतर समय सलवार कमीज़ पहनती थी, उसके अंदर कभी कभी ब्रा और पेंटी, लेकिन उस दिन मैंने अपने घर के सारे दरवाजे और खिड़कियां बंद ही रखी और पूरे घर में बिल्कुल नंगी ही घूमती रही.
फिर माँ की एक साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट निकाला और उसे पहन लिया, क्योंकि मुझे अपनी एक तस्वीर निकालनी थी इसलिए और फिर मैंने अपने मोबाईल से एक एक कपड़ा उतारकर तस्वीर निकाली और फिर अपनी ड्रेस पहन ली.
उसके बाद सेक्सी स्टोरी पढ़ने लगी.
मुझे इसकी कहानियाँ पढ़कर अपनी चूत में उंगली करके उसे शांत करने में बहुत मज़ा आता है.

स्रोत:इंटरनेट