“ऊईइ माँ….. ” कहते हुए पंडिताईन ने ज्वाला देवी की दोनों अन्डकोशों को अपने मुंह में भर लिया । फिर उन्होंने उन गोलियों को मुंह के अन्दर ही गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया। ज्वाला देवी की लंड का बुरा हाल था उनका का सारा शरीर ही रोमांच से कांपने लगा था । पंडिताईन ने ज्वाला दोवी की लंड को मुंह में भर लिया और लोलीपोप की तरह चूसने लगी । ठकुराइन भी अपनी जीभ से उनकी चूत की फांकों को चौड़ा किया और. जीभ फिराई ।. पंडिताईन की हालत तो पहले से ही ख़राब थी ।. उसने कहा-. “ओह मालकीन….
जोर से चूसो… ओह… मैं तो गई। ऊईई… माँ …………।”
अब चूत कि चुसाई पंडिताईन को और सहन नहीं हो रही थी तो बोली-. “क्यों तड़पा रहे हो मालकीन चलो अब चोदो मुझे । अपने लन्ड को मेरी चूत में डाल कर जोर-जोर के धक्के मारो….
अब दाल भी दो ।”
ठकुराइन भी अब खुद चोदने के लिए बेसब्र हो चुकी थी ।. लन्ड में जीभ चलने पर मजा तो आया था मगर लण्ड, बुर में लेने की जल्दी थी। जल्दी से शारदा के सिर को पीछे धकेला और फिर शारदा की पनियायी चूत की दरार पर उँगली चला उसका पानी लेकर, ठकुराइन अपनी लण्ड की चमड़ी खींच, सुपाड़े की मुन्डी पर लगा कर चमचमाते सुपाड़े को शारदा को दिखाती बोली-
“देख मेरी लन्ड….. तेरी छेद पर…।”
“हां…जल्दी से…। मेरे छेद में…।“. ठकुराइन अपनी मूषल लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत के छेद पर लगा, पूरी दरार पर ऊपर से नीचे तक चला,
बुर के होठों पर लण्ड रगड़ते हुए बोली-. “हाय,,, पेल दुं,,,,पूरा…???”
“हां,,,!! मालकीन…चोद बन जाओ…”
“फ़ड़वाये,,गी..???” हाय,,,फ़ाड़ दूँ”
“बकचोदी छोड़,,,,, फ़ड़वाने के,,,,,लिये तो,,,,,खोल के,,,,नीचे लेटी हूँ…!! जल्दी कर……”, वासना के अतिरेक से कांपती झुंझुलाहट से भरी आवाज में शारदा बोली ।
लण्ड के लाल सुपाड़े को चूत के गुलाबी झांठदार छेद पर लगा, ठकुराइन ने उभरी चौडी चुतड उछाल के एक धक्का मारी । सुपाड़ा सहित चार इंच लण्ड चूत के कसमसाते छेद की दिवारों को कुचलता हुआ घुस गया । हाथ आगे बढ़ा, ठकुराइन के सिर के बालो में हाथ फेरती हुई, उसको अपने से चिपका, भराई आवाज में बोली-
“हाय,,,, पूरा…डाल दो…“हाय,,,,, ,,,!!! …फ़ाड़…! मेरी मालकीन….
…शाबाश।”
ठकुराइन ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर खींचते हुए, फिर से अपने लण्ड को सुपाड़े तक बाहर निकाल फुर से गांड उछाल धक्का मारी । इस बार का धक्का जोरदार था ।
पंडिताईन की चूतड़ों फट गई ।.
“उईईई आआ,,,,,, शाबाश फ़ाड़ दी,,,,,, ,, आह…।”
करते हुए, अपने हाथों के नाखून ठकुराइन की पीठ में गड़ा दिये।
“बहुत,,,,, टाईट…है…तेरा,,,,छेद…”
चूत के पानी में फिसलता हुआ, ठकुराइन की पूरी लण्ड उसकी चूत की जड़ तक उतरता चला गया।
“बहुत बड़ा…है,,,,आपकी,,,,लन्ड…उफफफ्…। मेरे,,,,,,चुची चूसते हुए,,,,,चोदो ….
शाबाश ।”
ठकुराइन ने एक चूची को अपनी मुठ्ठी में जकड़ मसलते हुए, दूसरी चूची पर मुंह लगा कर चूसते हुए, धीरे-धीरे एक-
चौथाई लण्ड खींच कर धक्के लगाती पुछी-. “पेलवाती,,,, नही… थी…???”
“नही,,,। किस से पेलवाती,,,,,,?”
“क्यों,,,,?…पंडित…!!!।”
“उसका मूड…बहुत कम… कभी-कभी ही बनता है।”. “दूसरा…कोई…”. ये सुनकर पंडिताईन ताव में आकर झल्लाते हुए चार-पांच तगडे धक्के नीचे से लगा दी । तगडे धक्को ने ठकुराइन को पूरा हिला दिया। चूचियाँ थिरक उठीं । मोटी जांघो में दलकन पैदा हो गई । लन्ड में थोड़ा दर्द हुआ, मगर मजा भी आया, क्योंकि चूत पूरी तरह से पनिया गई थी और लण्ड गच-गच फिसलता हुआ अन्दर- बाहर हुआ था । अपने पैरों को ठकुराइन की उभरी हुई भारी चुतडों के उपर कमर से लपेट उनको भींचती सिसयाती हुई बोली-
“उफफफ्,,,,,,,, सीईई दुखा दिया आरम,,….
।”
ठकुराइन कुछ नही बोली । लण्ड अब चुंकी आराम से फिसलता हुआ अन्दर-बाहर हो रहा था, इसलिये व पंडिताईन कि टाईट, गद्देदार, रसिली चूत का रस अपने लण्ड की पाईप से चूसते हुए, गचा-गच धक्केलगा रही थी । शारदा को भी अब पूरा मजा आ रहा था । ठकुराइन की तग़डी लण्ड सीधा उसकी चूत के अखिरी किनारे तक पहुंच कर ठोकर मार रहा था । धीरे-धीरे चूतड़ों उंचकाते हुए सिसयाती हुई बोली-. “बोलोना,,,,,तो, जो बोल…रही…”
“मैं तो…बोल रही थी,,,,,, की अच्छा हुआ…जो किसी और से…नही… करवाया …नही तो,,,,,,,,मुझे…तेरी
टाईट…छेद की जगह…ढीला…छेद में लन्ड डालनी पडती ।”- शारदा की चुत पर धक्के तेज करती हुई ठकुराइन बोली।. “हाय…आपको,,,,छेद की…पड़ी है…इस बात की नही, की मैं दूसरे आदमी …..।”
“हाय,,,, अब…आदमीयों को छोड़…अब तो बस तेरी… ही…सीईईइ…..उफफ्… बहुत मजेदार छेद है…”,
गपा-गप लण्ड पेलता हुई ठकुराइन सिसयाते हुई बोली ।. अब ठकुराइन की लण्ड शारदा की बुर की दिवारों को बुरी तरह से कुचलता हुआ, अन्दर घुसते समय चूत के धधकते छेद को पूरा चौड़ा कर देता था, और फिर जब बाहर निकलता था तो चूत के मोटे होठ और पुत्तियां अपने आप करीब आ छेद को फिर से छोटा बना देती थी । मोटी जाँघों और बड़े होठों वाली, फ़ूली पावरोटी सी
गुदाज चूत होने का यही फायदा था । हंमेशा गद्देदार और टाईट रहती थी, ये बात ठकुराइन को भली-भांती मालुम थी और खास इसी वजह से ही तो उनकी नजर पंडिताईन की भारी गठीले वदन पर थी ।
शारदा ने भी ठकुराइन की उरोजों को मसलते हुए निपलों को मुंह में भर चुसने लगी । शारदा के रसीले होठों को चूसते हुए, नीचे के होठों में लण्ड धंसाते हुए ठकुराइन तेजी से अपनी उभरी चूतड़ों उछाल कर उसके
ऊपर कुद रही थी ।. “हाय,,,मालकीन… आपकी लन्ड भी…!! बहुत मजेदार…है, मैंने आजतक इतना लम्बा..और मोटा लन्ड …सीसीसीईईईईईईई…हाय डालती रहो…। ऐसे ही…उफफ्…पहले दर्द किया,,,,,मगर…अब…। आराम
से…। हाय…। अब फ़ाड़ दो…। सीईईईई…पूरा डाल… कर…। हायमादर,,,,,चोद…बहुत पानी फेंक रही…
है मेरी …चु…त…।”. नीचे से चूतड़ों उछालती, ठकुराइन की चौडी उभरी गांड को दोनो हाथों से पकड़ अपनी चूत के ऊपर दबाती, गप गप लण्ड खा रही थी शारदा ।
कमरे में बारिश की आवाज के साथ पंडिपाईन की चूत की पानी में फच-फच करते हुए ठकुराइन की लण्ड के अन्दर-बाहर होने की आवाज भी गुंज रही थी । इस सुहाने मौसम में खलिहान के विराने में दोनो चोदाई का मजा लूट रहे. थे ।. कहाँ ठकुराइन अपनी गुप्त रहस्य पकड़े जाने पर अफसोस मना रही थी वहीं अभी खुशी से अपनी भारी चूतड़ों कुदाते हुए, अपनी पंडिताईन की टाईट पावरोटी जैसी फुली चूत में लण्ड पेल रही थी । उधर पंडिताईन जो सोच रही थी की मालकीन आखिर मर्द बनी कैसी ! ईतना ब़ा लन्ड … अब नंगी अपने ठकुराइन के नीचे लेट कर, उनकी तीन इंच मोटे और दस इंच लम्बे लण्ड को कच-कच खाते हुए खुशियां मना रही थी ।
“हाय,,,, बहुत…। मजेदार है, तेरी चुची….. तेरी …छेद…उफफ्…हाय,,,, अब तो…हाय,,,, मजा आ रहा है,
इस ठकुराइन की लन्ड बुर में घुसवाने में ???…। सीएएएएएए…। हाय, पहले ही बता दिया होता …तेरी सिकुड़ी चूत फ़ाड़ के भोसड़ा बना देती …सीईईईई ले अपनी मालकीन की…। लण्ड….
हाय…बहुत मजा,, हाय,,…तूने तो खेल-खेल कर इतना… तड़पा दिया है…अब बरदाश्त नहीं हो रहा…मेरी तो निकल जायेगी. ……सीईईईईई… तेरी … चु…तमें,,,….
,???।,” सिसयाते हुए ठकुराइन बोली ।
नीचे से धक्का मारती, धका-धक लण्ड लेती, शारदा भी अब चरम-सीमा पर पहुंच चुकी थी । चूतड़ों को
उछालती हुई, अपनी टांगो को ठकुराइन की कमर पर कस ली और उनकी उभारों को मसलती हुई चिल्लाई-
”मार,,,,,मार ना,,,, … ठकुराइन….. हाय… सीईईईई,,,, अपने घोड़े जैसे लण्ड से,,,…मार… मेरी…चूत…फ़ाड़ दे…। हाय,,, …मालकीन, मेरा भी अब झड़ेगा…पूरा लण्ड…डाल के चोद दो …मेरी चूत…। पेल दो… । ठकुराइन की लण्ड चोद्द्द्द्…मेरी चूऊत में…।”. यही सब बकते हुए उसने ठकुराइन को अपनी बाहों में कस कर उनकी चुचीयों पर मुंह रगडने लगी ।.
स्रोत:इंटरनेट