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Thakurain Ka Insaaf Hindi Shemale Story 3

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अब ठकुराइन ने पूछा-. “मज़ा आ रहा है राजो….
? “कभी-कभी आ रहा है, जब व अन्दर टकरा रहा है !” पंडिताईन ने कहा । ठकुराइन का पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही शारदा की मुँह से स्स्सीईईईईई.
हा….
आआ निकल जाता । हर धक्के के साथ उसकी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर ररररर की आवाज भी निकलने लगी । लगातार आधा घन्टे की चोदाई में इतना जबरदस्त मज़ा आने के बाद भी ठकुराइन झड़ी नहीं ।. तभी ठकुराइन शारदा को बेड से उतारकर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुकाकर खड़ा किया । उसकी एक पैर उठाकर बेड पर रखा और उसके पीछे से उसकी टांगों के नीचे आकर पहले तो ठकुराइन आठ-दस. बार पंडिताइन की चूत को चाटा……। फ़िर उसके पीछे खड़ी होकर ज्वाला देवी ने पंडिताईन की चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात. मिनट तक चोदने के बाद उन्होने पंडिताईन को और झुकाकर उसकी कमर पकड़कर सटासट सटासट चोदने लगी ।. ठकुराइन की भारी उभरी चुतड हवा में उछल रहा था । जैसे ही ठकुराइन की लण्ड उसकी चूत से बाहर आता..इससे पहले कि व धक्का मारकर अन्दर करती…मदहोशी में पंडिताईन ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई ह… … आ….
करते हुये अन्दर लेने लगी । ठकुराइन झड़ने वाली थी….
उनका एक हाथ अपने आप उसकी उभारों पर गया और पकड़कर मसलती और पीछे से चुत पर धक्का मारती….
। उसकी चूत ने पानी फेंकना शुरु कर दिया था । तभी ठकुराइन ने भी हवा में जोर-जोर अपनी उभरी गांड उछाली और तेजी से शारदा की बुर में लन्ड अंदर-बाहर करने लगी । शारदा ने भी नीचे से पुरा साथ दे रही थी । इतने में. ठकुराइन ने एक जोरदार धक्का लगाई और पंडिताईन की बुर में जड तक लन्ड पेल कर झडने लगी । ठकुराइन की लण्ड से तेज फौवारे के साथ पानी निकलना शुरु हो गया था ।. चरम आनंद में दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लुढक गईं । ठकुराइन के होठों शारदा के होंठ से चिपके हुए थे, दोनो का पूरा बदन अकड़ गया था । दोनो आपस में ऐसे चिपक गये थे की तिल रखने की जगह भी नही थी। पसीने से लथ-पथ गहरी सांस लेते हुए। जब ठकुराइन की लण्ड का पानी शारदा की चूत में गिरा, तो उसे ऐसा लगा जैसे उसकी बरसों की प्यास बुझ गई हो । तपते रेगीस्तान पर ठकुराइन की लण्ड बारिश कर रहा था और बहुत ज्यादा कर रहा था, आखिर उसने अपनी पंडित की धर्मपत्नी की रसीली बुर को चोद ही डाली । करीब आधे घन्टे तक दोनो महिलाएं एक दूसरे से चिपके, बेसुध हो कर वैसे ही नंगे लेटे रहे । शारदा अब ठकुराइन बगल में लेटी हुई थी । ठकुराइन आंखे बन्द किये टांगे फैलाये बेसुध लेटी हुई थी, । आधे घन्टे बाद जब पंडिताईन को होश आया, तो खुद को नंगी लेटी देख हडबड़ा कर उठ गई । बाहर बारिश अपने पूरे शबाब पर थी। बगल में ठकुराइन भी नंगी लेटी हुई थी । ठकुराइन की लटकी हुई बडा लण्ड और उसका लाल सुपाड़ा, उसके मन में फिर से गुद-गुदी पैदा कर गया और हाथ बढा कर ठकुराइन की मुरझे हुए लन्ड को मुठ्ठी में भर कर हिलाने लगी ।. लन्ड पर दबाव पडने पर ठकुराइन की आंखें खुल गई । पंडिताईन को लन्ड मसलते देख ठकुराइन मन ही मन बोली लो पंडित सतनाम आज मैंने तेरे पत्नी की टाईट चुत को भी निबटा दी , देख बारिश भी हमारी चुदाई की खुशी मना रही आज से गाँव के पण्डिताईन भी मेरी लन्ड से बंधे गई । मन ही मन ऐसी ऊल जलूल बातें सोचती मुस्कुराती ठकुराइन ने आहिस्ते से शारदा की हाथ से अपनी लन्ड छुडा कर बिस्तर से उतर अपने पेटिकोट और ब्लाउज को फिर से पहन. लिया और शारदा की नंगी चुत के ऊपर पेटीकोट डाल दी ।. जैसे ही ठकुराइन फिर से लेटने को हुई की शारदा अपने ऊपर रखी पेटीकोट को ठीक से पहन ली । थोड़ी देर तक तो दोनो में से कोई नही बोली पर, फिर पंडिताईन धीरे से सरक कर ज्वाला देवी की ओर घुम गयी, और उसके पेट पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे हाथ चला कर सहलाने लगी । फिर धीरे से बोली-. “कैसी हो ठकुराइन ,,,,, ,,,,? ठकुराइन– “एक एक जोड़ दुख रहा है ।”. “इधर देखो ना…।”. ज्वाला देवी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ घुम गई। शारदा उसके पेट को हल्के-हल्के सहलाते हुए, धीरे से उसके पेटिकोट के लटके हुए नाड़े के साथ खेलने लगी । नाड़ा जहां पर बांधा जाता है, वहां पर पेटिकोट आम तौर पर थोड़ा सा फटा हुआ होता है । नाड़े से खेलते-खेलते पंडिताईन ने अपना हाथ धीरे से अन्दर सरकाकर. उनकी मुरझी लन्ड जो अभी घिरे-घिरे तन रही थी हाथ फ़ेर दिया, तो ठकुराइन गुदगुदी होने पर उसके हाथ को हटाती बोली-. “क्या करती है,,,,,? हाथ हटा…” शारदा ने हाथ वहां से हटा, कमर पर रख दी और थोड़ा और उपर सरका कर उभारों को मसलते हुए उनकी आंखो में झांकते हुए बोली- “,,,,,,मजा आया…!!!???” झेंप से ठकुराइन का चेहरा लाल हो गया … और बोली-. “मुझे तो बहुत मजा,,,,,,,आया… बता ना, तुझे कैसा लगा…?” “हाय, मालकिन … पहली बार इतनी बडी लन्ड से चुदी हुं…” -कहते हुए, उनके होठों को हल्के से चुम लिया । ज्वाला देवी पंडिताईन की कमर पकड़ अपनी तरफ खींचते हुए उसको कमर से पकड़ कस कर भींचा । ठकुराइन की खड़ी हो चुकी लण्ड, सीधा पंडिताईन की जांघो के बीच दस्तक देने लगा । पंडिताईन उनकी बाहों से छुटने का असफल प्रायास करती, पंडिताईन गरम तो थी हीं ठकुराइन की लण्डअपनी दोनों माँसल रेशमी जाँघों के बीच दबा के मसलते हुए बोलीं – “मालकीन एक बात पूछुं आपसे.. ।” “एक नहीं सौ बात पूछ ।”. “आप हमारी मालकीन हो, हमारी ठाकुर साहव की धर्मपत्नी, फिर ये लंड आपकी शरीर में कै… से… क्या आप पुरूष हैं …..?” “अरे… नहीं.. रे पगली, मैं पहले भी औरत थी..आज भी हुं और आगे भी औरत ही रहुंगी । अपनी इस बदनसीबी पे रोऊं या खुशीयां मनाऊं मैं… पहले तो बहुत रोने को मन किया, फिर धीरे-धीरे सब खुशीयों में बदलने लगे । मेरी शरीर में लंड के उगने से मेरी जिस्मानी ख्वाईशें जरुर बदल गईं हैं…….
फिर भी मैं तुम लोग जैसी तन और मन से पूरी तरह औरत ही हुं और अब मैं अपनी बदकिस्मती की खुशीयां मना रही हुं, बस्… किसी और दिन मैं तुझे अपनी पूरी कहानी बताऊंगी ।”. कहने के साथ ज्वाला देवी पंडिताईन को आगोश में भर लिया और पागलों की तरह उसे चुमने लगीं ।. हाँ तो दोस्तों, कैसी लगी ये hindi shemale story आप लोगो को? कमेंट्स करके बताओ.. और भी मस्त मस्त पढने के लिए आते रहिये My पर.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4.
स्रोत:इंटरनेट