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Thakurain Ka Insaaf Hindi Shemale Story

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 . आखिरकार पंडिताइन आ ही गयी ज्वाला देवी के लंड के नीचे। ठकुराइन को पहली बार कोई टक्कर का साथी मिला था। उन दोनों अनुभवी खिलाडियों की जबरदस्त चुदाई की Hindi shemale story का आखिरी पार्ट पेश है।. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. इस काम में पंडिताईन ने भी उसकी मदद की और सरसराते हुए पेटिकोट को उसके पैरों से खींच एक तरफ फेंकी, तो कमरे की रोशनी में ठकुराइन की दस इंच का तमतमाता हुआ लण्ड देख पंडिताईन को झुरझुरी आ गई । उठ कर बैठते हुए, हाथ बढ़ा उनकी लण्ड को फिर से पकड़ लिया और चमड़ी खींच उसके पहाड़ी आलु जैसे लाल सुपाड़े को देखती बोली- “हाय,,,,,,,बेला ठीक बोलती थी आपकी लन्ड तो वाकई बहुत बड़ा,,,,,है…मेरी…तो फ़ाड़ ही देगा……..।” ठकुराइन लेट गई, और अपनी दोनो टांगो को घुटनो के पास से मोड़ कर फैला दिया । दोनों अघेड औरतें अब जबर्दस्त उत्तेजना में थे । दोनो में से कोई भी अब रुकना नही चाह रहा था । कमरे की ट्यूबलाइट की रोशनी में ठकुराइन के भारी संगमरमरी गुदाज चूतड़, शानदार चमचमाती रेशमी मांसल जांघों के बिच आधे तनी मूषल लन्ड दख पंडिताईन की आंखें एक बार तो चौंधियागयी …..फ़िर फ़टी की फ़टी रह गईं। शारदा ने ठकुराइन की चमचमाती जांघो को अपने हाथ से पकड़, थोड़ा और फैलायी और उसके ऊपर हपक के मुँह मारकर चुमते हुए, फ़िर उसकी झाँटदार लन्ड के ऊपर एक जोरदार चुम्मा लिया, और लन्ड की चमडी को निचे सरका कर लाल सुपाडी की छेद में जीभ चलाते हुए, अंडकोष को झाँटों सहित मुठ्ठी में भर कर खींचा, तो ठकुराइन लहरा गई और सिसयाती हुई बोली-. “इसस्स्,,,!! क्या कर रही है…???” शारदा ने ठकुराइन की लन्ड पकड लिया । अब वो उनकी लन्ड से खेल रही थी । ठकुराइन की लन्ड फ़ूल कर मोटा और कडक हो गया था । उसने सुपाडे की चमडी खींच कर उसे खोल दिया । अब वो उसे उपर नीचे कर रही थी । ठकुराइन को. मीठी मीठी तेज गुदगुदी होने लगी । ठकुराइन उसका हाथ पकड़ना चाहा तो उसने प्यार से उनकी हाथ हटा दिया और उनकी लन्ड को पकड़ कर मुठ मारने लगी । ठकुराइन की सारे शरीर में सनसनाहट होने लगी, व अपनी चुचीयों को मसलते हुए बोली- “पंडिताईन…… हाय……… मजा आ रहा है … और मुठ मार …… हाय……आज तो बस ऐसे ही मेरा रस निकाल दे……।”. पंडिताईन ने ज्वाला देवी की लन्ड को मुठ मारते मारते अपने मुंह में सुपाडा ले लिया । उत्तेजना में ठकुराइन को सब अच्छा लग रहा था। उसके हाथ ठकुराइन की लन्ड पर और तेज चलने लगे… मुंह से लन्ड चूसने की मधुर. आवाजें आ रही थी, मुठ मारती जा रही थी… । तभी पंडिताईन लन्ड मुंह निकाल फिर ज्वाला देवी के पैरो के बीच में आ गई । ठकुराइन चित लेटी थी । शारदा के खुले बाल ठकुराइन की पेट और जाँघों पर गुदगुदी कर रहे थे और व ठकुराइन की लंड को गप्प से पूरा अन्दर. लेकर चूसने लगी । मस्ती में ठकुराइन अपनी भारी चुतड उछाल रही थी ।. कभी शारदा ठकुराइन की लंड को पूरा बाहर निकाल देती और उस पर जीभ फिराती कभी पूरा मुंह में ले लेती ।. कभी वो सुपाड़े को दांतों से दबाती और फिर उसे चूसने लगती । कभी व ठकुराइन की लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर उनकी अन्डकोशों को अपने मुंह में ले लेती और उन्हें चूम लेती और फिर दोनों अण्डों को पूरा मुंह. में लेकर चूसने लगती । साथ में ठकुराइन की लंड पर हाथ ऊपर नीचे फिराती । ठकुराइन की आनंद का पारावार ही नहीं था ।. पता नहीं इस चूसा चुसाई में कितना समय बीत गया। ज्वाला देवी भला कितनी देर ठहरती । उन्होंने पंडिताईन को कहा कि मैं अब जाने वाली हूँ तो वो एक ओर हट गई । ठकुराइन कुछ समझी नहीं । पंडिताईन झट से चित. लेट गई और ज्वाला देवी की लंड को अपने मुंह की ओर खींचने लगी । ठकुराइन उकडू होकर उसकी मुंह के. ऊपर आ गयी । ठकुराइन की भारी नितम्ब अब शारदा की स्तन पर थे और उसकी नाजुक उरोजों को दबा रहे थे । ठकुराइन शारदा के बालों को पकड़ लिया और और उसके सिर को दबाते हुए अपना लंड उसके मुंह में ठेलने की कोशिश करने. लगी । ठकुराइन की लंड उसके गले तक जा पंहुचा था ।. उसने ठकुराइन की लंड को अपने मुंह में समायोजित कर कर लिया और खूब जोर-जोर से उनकी आधे से अधिक लंड को अपने मुंह में भर कर अन्डकोशों की गोलियों के साथ खेलते हुए चूसने लगी। पंडिताईन कभी उन्हें सहलाती और. कभी जोर से भींच देती। ठकुराइन की मुंह से सीत्कार निकलने लगी थी-. “ऊईइ … मेरी जा… आ… न… मेरी रानी….
ईईइ….
और जोर से चूसो और जोर से ओईइ….. या आ …… ।” और लन्ड को पंडिताईन के मुँह में लगातार पेल रही थी । जब उन्हें लगी कि ऐसे ही पेलती रही तो उनकी पानी निकल जायेगी ।. झटके से ठकुराइन अपनी लन्ड बाहर निकल शारदा को बिस्तर पे चित लिटा दिया और उसकी मोटी जांघों के बीच बैठा कर पंडिताईन कि दोनों टाँगों को थोड़ा फैला दिया और अपनी जीभ दे दी उसकी चूत में । अपनी जीभ से. उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगी । चूत के दाने पर ठकुराइन कि जीभ के लगते ही सिसकारियों कि बाढ़. आई । ठकुराइन कि जीभ उसकी चूत में जाकर उसको पागल कर दी ।. “मालकीन….
ओह्ह्ह .
उफ्फ्फ्फ्फ्फ….
चाटो चूसो.. मेरी चूत….
चाटो इसे अपनी जीभ से…..अह्ह्ह .
उफ्फ्फ .
रगड़ों .
मेरे रज.
चूसो उफ्फूओ आह हाइ….
हाअन येआ… येअह….. ये…… अह चाट जाओ मुझे ।”. ऐसी सिसकारीयां लेती हुई पंडिताईन अपनी चूत को ठेलते हुए ठकुराइन को जमीन पर सुला दिया और उसके मुँह पर अपनी चूत रगड़ने लगी । अपनी चूत को जोर जोर से ठकुराइन की मुँह पर रगड़ रगड़ कर बोली-. “खा जाओ मेरी चूत को आअह्ह्ह्ह्ह. ….
आआअह्ह्ह्ह …..पीईईई…… जाआआअओ….
मेरी चू…ऊ….
त का….
अ….
रस ।” लेकिन ठकुराइन ने उसकी चूत को चूसना चालू रख । पंडिताईन ने बड़ी अदा से अपने दोनों घुटने ठकुराइन की सिर के दोनों ओर कर दिए और अपना मुंह उनकी लंड के ठीक ऊपर कर लिया । ठकुराइन की मोटी-मोटी संगेमरमर जैसी. कसी हुई जाँघों को कस कर पकड़ लिया और नीचे से ऊपर अपनी जीभ फिराई गांड के सुनहरे छेद तक और फिर ऊपर से नीचे तक।. ठकुराइन की लन्ड तो किसी चाबी वाले खिलौने की तरह उछल रहा था । उसने तो प्री-कम के टुपके छोड़ने शुरू कर दिए थे । पंडिताईन ने पहले ठकुराइन की लंड को अपने हाथ से पकड़ा और फिर अदा से अपने सिर के बालों को एक. झटका दिया । बाल एक ओर हो गए तो उन्होंने सुपाड़े पर आये प्री- कम पर अपनी जीभ टिकाई चाट लिया । फिर अपनी जीभ सुपाड़े पर फिराई लंड के ऊपर से नीचे तक । फिर जब उसने ठकुराइन की अन्डकोषों को चाटा तो ठकुराइन भी. उनकी गांड के सुनहरे छेद पर. अपनी जीभ की नोक लगा दी ।. अब ठकुराइन की जीभ शारदा की चूत को कुरेदने लगी और उसकी मुख से आनन्द भरी सिसकारियाँ फ़ूटने लगी। पंडिताईन की गाण्ड की छेद ज्वाला देवी की आँखों के सामने था । गांड का छेद तो कभी खुल रहा था कभी बंद हो रहा. था। ठकुराइन ने गांड को थूक से उसे तर कर दिया था। उन्होने अपनी एक अंगूठे पर थूक लगा कर गच्च से पंडिताईन की गांड के छेद में डाल दिया ।.
स्रोत:इंटरनेट