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Thakurain Ka Insaaf Shemale Chudai Ki Kahani 3

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ज्वाला देवी तो बस आँखें बंद किये आनंद में सीत्कार किये जा रही थी । बेला ने अपना हाथ रोक लिया ।. “ओह … बेला, अबह रुक मत जोर -जोर से कर… जल्दी …हईई ।… ओह …”. “क्यों मालकीन… मज़ा आया ना.. ?” बेला की आँखों में भी एक अनोखी चमक थी । “हाँ … बहुत मज़ा …..आ रहा है रुक मत !!!!! ।” बेला फिर शुरु हो गई । ठकुराइन की मूषल लंड तो झटके पर झटके खा रहा था । बेला ने अब ढेर सारा तेल लगा दी, ठकुराइन की लंड को जैसे नहला ही दिया । अब एक हाथ से बेला ने ठकुराइन की अंडकोष पकड़ लिए और दूसरे हाथ से लंड को मुठियाने लगी । ज्वाला देवी तो –. “आ … उन्ह … ओईईइ … करती मीठी सित्कारें मारने लगी और चुचीयों को मसलने लगी ।. बेला तेजी से हाथ चलाने लगी और ठकुराइन की अंडकोष जल्दी-जल्दी हाथ से मसलते हुए लंड को ऊपर नीचे करने लगी । ठकुराइन जोर से अपनी चौडी गांड. उछली और उसके साथ ही उनकी लंड से पिचकारी फूट गई । सारा वीर्य बेला के हाथों और जाँघों और उनकी पेट पर फ़ैल गया ।. कुछ देर तक आंख बंद किए ज्वाला देवी आराम से लेटी रही और फिर बेला से पूछा-. “तु जो कुछ भी मुझे बता रही है क्या व हो सकता हौ.. पंडिताईन मान जाएगी ?” बला ने पास पडे तौलिए से उनकी लंड और अंडकोषों पर लगे वीर्य को साफ करती हुई बोली-. “हां मालकिन, एक बार आपकी लंड लेगी तो… फिर आपकी लंड की दिवानी बन जाएगी । ईनकार तो तब करती न जब पराई मर्द हो, आप थोडे न मर्द हो । आप तो हम सब की मालकीन हैं….
हमारी मां हैं ….
फिर आपकी औरती लंड से चुदने में भला कैसी बदनामी । एक औरत दुसरी औरत ती चोदाई करेगी । क्या उसे सन्तुष्टी देना आपकी जिम्मेदारी नहीं बनती ।”. ठकुराइन कुछ सोचने सी लगी और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया । चालाक बेला समझ गई कि लोहा गरम है. तो उसने आखरी चोट की-. “हाय मालकिन जब मैं रात में बिस्तर पर लेट, पंडिताईन की लाल चुत में घुसते आपके इस मूसल लंड की कल्पना करती हूँ तो मेरी चूत पनिया जाती है ।” अब ठकुराइन चौंकी उन्होंने बेला से पूछा-. “तेरी पनिया जाती है ! अच्छा एक बात बता तू मुझे ये सब करने के लिए क्यों उकसा रही है इसमें तेरा क्या फ़ायदा है !”. “पंडिताईन अगर आपके लंड के आकर्षण में फ़ंस यहाँ आने लगे तो कभी-कभी मुझे भी आप की जूठन मिल. जाया करेगी ।”. अपनी बात का असर होते देख बेला झोंक में बोल गई फ़िर सकपका के बात सम्हालने कि कोशिश करने लगी –. “मेरा मतलब है…………।”. तब तक ठकुराइन ने हँसते हुए लात जमायी और बेला हँसते हुए वहाँ से भाग गई । पर बेला की बात थोड़ी बहुत. ठकुराइन के भेजे में भी घुस गई थी । और शायद दिल के किसी कोने में पंडिताईन की चुत चोदने की उत्सुकता भी पैदा हो गई थी ।. ठकुराइन कुछ देर तक सोचती रही कैसे सतनाम की पत्नी को अपनी पकड़ में लाया जाये । प्यासी औरत. की खोपड़ी तो शैतानी थी ही । तरकीब सुझ गई। सबेरे उठ कर सीधी आम के बगीचे की ओर चल दीं ।. ठकुराइन जानती थीं कि उनके जितने भी बगीचे हैं, सब जगह थोड़ी बहुत चोरी तो सारे मैंनेजर करते ही हैं, पर अनदेखा करती थीं क्योंकि अन्य बड़े आदमियों कि तरह. वो भी सोचती थीं कि ठाकुर की इतनी जमीन जायदाद है गरीब थोड़ा बहुत चुरा भी लेंगे तो कौन सा फ़रक पड़. जायेगा । आम के बगीचे में तो कोई झांकने भी नहीं जाता । जब फल पक जाते तभी ठकुराइन एक बार चक्कर. लगाती थी।. मई महीने का पहला हफ़्ता चल रहा था । बगीचे में एक जगह खाट डाल कर मैंनेजर बैठा हुआ, दो लड़कियों की टोकरियों में अधपके और कच्चे आम गिन-गिन कर रख रहे थे । ठकुराइन एकदम से उसके सामने जा कर. खड़ी हो गयी । मैंनेजर हडबड़ा गया और जल्दी से उठ कर खड़ा हो गया ।. “क्या हो रहा है, ?,,,ये अधपके आम क्यों बेच रहे हो ।” मैंनेजर की तो घिग्घी बन्ध गई, समझ में नही आ रहा था क्या बोले । “ऐसे ही हर रोज एक दो टोकरी बेच देते हो क्या,,,,,,,,,।” “मालकिन,,,,मालकिन,,,वो तो ये बेचारी ऐसे ही,,,,,बड़ी गरीब बच्चीयां है.
अचार बनाने के लिये मांग रही थी ,,।” दोनो लड़कियां तब तक भाग चुकी थी।. “खूब अचार बना रहे हो ।”. मैंनेजर झुक कर पैर पकड़ने लगा । ठकुराइन ने अपने पैर पीछे खींच लिए, और वहाँ ज्यादा बात न कर तेजी से घर आ गयीं । घर आ कर ठकुराइन ने तुरन्त मैंनेजर और रखवाले को बुलवा भेजा, खूब झाड़ लगाई और बगीचे से उनकी ड्युटी हटा दी और ठाकुर को बोला कि उसने बगीचे से मैंनेजर और रखवाले की ड्युटी हटा दी है. । दीनू को रखवाली के लिये बगीचे में भेज दे और पंडित सतनाम से आग्रह करके पंडिताईन शारदा देवी को दीनू और बाकी रखवालों की निगरानी करने के लिये भेज दें । नहीं तो खुद जाकर देखभाल करें ।. दोपहर को अपने सतनाम भाई से उनकी पत्नी शारदा को बगीचे का काम देखने के लिए पूछी तो उनकी एहसानों के तले डूबे सतनाम ने तुरन्त हाँ कर दी, कि पंडिताईन कुछ सीखेगी और उसका बोर होना भी खत्म हो जायेगी । आम के बगीचे में खलिहान के साथ जो मकान बना था वो वास्तव में ठाकुर पहले की ऐशगाह थी । वहां वो रण्डियां नचवाता और मौज- मस्ती करता था । जब ठकुराइन की नजर उस मकान पर पडी । ठाकुर घबड़ाया कि ऐसे तो उसकी सारी. आजादी खत्म हो जायेगी सो उसने दूसरे दिन सुबह सुबह ही सतनाम के घर जा पंडिताईन को बड़े प्यार मनुहार से इस काम के लिये राजी कर लिया और सब रखवालों को हिदायत कर दी कि पंडिताईन के आदेश पर काम करें और. पंडिताईन कहीं इनकार न कर दे इस डर से गाहे बगाहे आराम के लिये बगीचे वाले मकान की चाबी भी उन्हें दे दी ।. ज्वाला देवी कमरे में वापस आ कर, आंखो को बन्द कर बिस्तर पर लेट गई । पंडिताईन के बारे में सोचते ही उसके दिमाग में एक नंग्धड़ंग औरत की तसवीर उभर आती थी । उसकी कल्पना में पंडिताईन एक नंगी औरत के रुप में नजर आ रहा था । शरीर में लंड आने के बाद व एकदम से औरतों के नंगी बदन की शौकीन बन गईं था । और अपनी ईस. मर्दानी हवस को पुरा करने में बेला उन्हें भरपूर सहयोग दे रही थी ।. ज्वाला देवी बेचैनी से करवटे बदल रही थी । बेला ठीक कहती है पंडिताईन को फ़ाँस लेने से किसी को शक तक नहीं होगा, क्योंकि दो औरतों को भला कौन शक करेगा । अपना काम भी हो जायेगा और पंडिताईन की इज्जत भी बची रहेगी । इस तरह विचार कर ठकुराइन ने पंडिताईन की शिकार करने का पक्का फ़ैसला कर लिया ।. मिलेंगी आपको My पर.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3.
स्रोत:इंटरनेट