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Thakurain Ka Insaaf Shemale Story 2

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सुनकर ठकुराइन मुस्कुरायी उन्होंने एक भरपूर नज़र तीनों मर्दोंपर डालीऔर मुस्कुराते हुए बोली –. “ ठीक तुम लोग अभी काम से आये हो थके होगे नहाधो आओ तुम्हारा इन्साफ़ होगा।”. जब वे नहाधोकर आये तो देखा ठकुराइन के कमरे मे उनके पलंग से अलग एक बहुत बड़ा गददा बिछा है उसपर गाव तकिया लगाए ठकुराइन मुस्कुराते हुए अपनी पीठ के बल अधलेटी हैं उनके बदन पर कपड़ों के नामपर सिर्फ़ पेटीकोट. ब्लाउज थे। जिसमें से उनका गदराया गुलाबी बदन जगह जगह से झॉक रहा था। उनके बड़े गले के लोकट ब्लाउज में से उनके बड़े बड़े उरोज फ़टे पड़ रहे थे इन तीनों को देखकर मुस्कुराते हुए बोली –. “आओ आओ बैठो बैठो। अब मुझे विस्तार से बताओ कि ठाकुर साहब के कमरे मे तुमने क्या देखा।”. तीनो ने एक दूसरे की तरफ़ देखा फिर दीनू ने कहना शुरू किया –. “अब क्या बताये मालकिन मैने देखा चौघरी साहब की नंगी गोद में नीरा पेटीकोट ऊपर किये अपने बड़े बड़े गुदाज नंगे चूतड़ों के बीच में उनके साढे सात इंची हलव्वी लण्ड को दबाये बैठी थी।”. ठकुराइन मुस्कुराते हुए बोली –. “अरे तेरा हिसाब साफ़ करना तो बहुत ही आसान है।”. यह कहकर उन्होंने खीचकर उसे बगल में बैठा लिया और झटके से उसकी धोती खीचकर निकाल दी फिर अपने दोनों हाथों से धीरे धीरे अपना पेटीकोट ऊपर उठाने लगी पहले उनकी पिण्डलियाँ फिर मोटी मोटी चिकनी गोरी गुलाबी. जांघें बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ दिखे और फिर एक 8 इंच का लन्ड लहराता हुआ ठकुराइन की मांसल जांघों के मध्य से बाहर निकल आया । ठकुराइन की गदराई चुतडों के मघ्य से घने झांटों से भरा लन्ड देखकर तीनों दंग. रह गये । उनको समझ नहीं आया अब ठकुराइन के साथ किस तरह से पेश आएं ।. ठकुराइन अपनी पूरा पेटीकोट ऊपर समेट कर लंड को मुठ्ठी में भर दीनू की नंगी गोद में बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ों को रखकर बैठ गयीं। फिर बोली –. “अब बताओ फिर क्या हुआ।”. पहले तो ठकुराइन का यह बडा सा लंड देख कर सबके जोश ठंडा पड गया, पहली बार वे किसी औरत की लंड देख रहे थे । लेकिन उनकी यह दोहरी मस्ताना रूप देखकर कुछ ही पल में उनकी हिम्मत दुगनी जोश क साथ बढी और भूरा बोला –. “हमने देखा ठाकुर साहब के एक तरफ़ शीला और दूसरी तरफ़ बेला बैठी थी । साहब के हाथ उनकी गरदनों के पीछे से होकर उनके ब्लाउज में घुसे हुए थे और उनके उरोजों से खेल रहे थे।”. ठकुराइन चहकी –. “अरे ये तो और भी आसान है आ जाओ दोनों फ़टाफ़ट।”. इतना सुनना था कि दोनों ठकुराइन की तरफ झपटे । ठकुराइन के ब्लाउज में एक तरफ से भूरा ने हाथ डाला और दूसरी तरफ से बिल्लू ने । ठकुराइन के ब्लाउज के बटन सारे के सारे खुल गये और उनके बड़े बड़े खरबूजों जैसे. गुलाबी स्तन बाहर आ गये। भूरा और बिल्लू अपने दोनों हाथों से उनके एक एक विशाल स्तन को थाम कर उनके निप्पल को कभी चूसने लगते तो कभी अपने अंगूठो और अंगुलियो के बीच मसलने लगते।. उधर दीनू का लण्ड ठकुराइन के बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतडों के बीच साँप की तरह लम्बा होकर उनकी बडे-बडे अंडों तक फैल रहा था। व ठकुराइन की गोरी गदरायी कमर को सहलाते हुए उनके गुदगुदे चिकने पेट और नाभी को. टटोल रहा था और उनकी गोल नाभी में उंगली डाल रहा था । ठकुराइन सिसकारी भरते हुए बोली–. “आ.
हहहह… बताओ …….
आगे क्या हुआ ।” भूरा और बिल्लू ठकुराइन के बड़े बड़े स्तनों को मसलते हुए बोले–. “पता नहीं मालकिन क्योंकि फिर हम चले आये आपके पास फ़रियाद लेकर।”. ठकुराइन ने चुटकी ली –. “अभी तो कह रहे थे कि तुम भी मर्द हो क्या अन्दाज़ा नहीं लगा सकते।”. यह कहते हुए उन्होंने झटसे उनकी धोतियॉं खीचकर निकाल दी अब उनके नीचे के बदन बिलकुल नंगे हो गई. उन लोगों ने देखा कि ठकुराइन की लन्ड बार-बार हवा में ऊपर-नीचे हो रहा है । ठकुराइन की हवा में लहराते फौलादी लन्ड देखकर तीनों मस्त हो रहे थे । फिर ठकुराइन ने अपने दोनों हाथों में उनका एक एक लण्ड थाम लिया. और सहलाने लगी ।. ठकुराइन के ऐसा करने से वे और भी जोश में आ गये और उनकी बड़ी बड़ी चूचियॉं को जोर-जोर से दबाने और उनके निप्पल को कभी चूसने कभी चुभलाने लगे । तभी दीनू ने ठकुराइन की तनी लंड को मुठ्ठी में भर लिया और सुपाडी. पर अपनी अंगुली चलाने लगा, ठकुराइन के मुंह से एक सिसकारी सी निकली वो अपने होंठों को दांतों में दबाये थी । वह अपने आपको रोक नहीं पा रही थी। वह दीनू को उत्साहित कर रही थी । दीनू का लण्ड भी तन रहा था। अचानक ठकुराइन उठ गयी और पलट कर दीनू की तरफ घूम कर फिर से उसकी गोद में बैठ गयीं । ठकुराइन की मोटी-मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच में उनकी फौलादी लण्ड का सुपाड़ा की नन्दु की लंड की तरफ़ मुंह उठाये था ।. दीनू भी उत्तेजन में अपन आप से बाहर हो रहा था, उसने झपट़कर दोनों हाथों में ठकुराइन की बड़ी बड़ी चूचियों दबोच ली और उठकर उनपर मुंह मारने लगा । अब ठकुराइन ने दीनू के लण्ड को पकड़कर सुपाड़ा अपनी चौडी गांड के भूरे छेद पर धरा और धीरे-धीरे पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया फिर बरदास्त करने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी पहले. धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किये जब मजा बढ़ा तो उन्होंने अपने दोनों हाथों में भूरा और बिल्लू का एक एक लण्ड थाम लिया और वो सिसकारियॉं भरते हुए उछल-उछल कर धक्के पे धक्का लगाने लगी ।. ठकुराइन के बड़े-बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ दीनू के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे, साथ में ठकुराइन की बडी सी लंड नंदु के पेट में रगड खा रहे थे । करीब आधे घंटे तक की उठापटक में दीनू ने ठकुराइन की बड़ी-बड़ी चूचियां पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली और दुसरे हाथ से ठकुराइन की लंड को जोरों से मुठिया रहा था । तभी नंदु उनके चूतड़ों को दबोच कर अपने लण्ड. पर दबाते हुए गांड की जड़ तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला –. “उम्म्म्म्म्म्म्म्हहहहह…….
हह “हहह। ठकुराइन जोर से उछली और अपनी उभरी गांड में जड़ तक दीनू का लण्ड धॅंसा लिया और चुतड को लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए नंदु की लंड से निकले पानी का मजा लेने लगी ।. भूरा व बिल्लू के लण्ड अभी भी उन्होंने अपने हाथों में पकडे हुए थे जो बुरी तरह फनफना रहे थे । यह हालत देखकर ठकुराइन मुस्करायी और अपनी लंड को सहलाते हुए बोली–. “घबराओ नहीं मैं अभी झड़ी नहीं हूँ और एक रात में मैं कम से कम दो राउण्ड चोदाई तो करती ही हूँ , अभी मैं तुम दोनों की गांड मारुंगी ।” बिल्लू ने डरे हुए नजरों से भूरा और ठकुराइन की तरफ देखा और बोला-. “मालकीन मैं तो हम लोग तो कभी अपनी गांड नहीं मराई है हमसे गलती हो गई….
।” “साले गांड क्या मर्द ही मार सकते हैं !!! बडे आए थे मेरी चुत मारने !!! एक-एक की गांड मारके छोडुंगी मैं, बहुत दिन हो गए गांड छेद में लंड पेले हुए ।” गुस्से से ठकुराइन बोली । “तो फिर ठीक है मालकिन आप अभी आधे रास्ते पर हो सो अभी भूरा निपटा लो ।” बल्लु ने कहा ।.
स्रोत:इंटरनेट