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Train Me Akeli Rail Sex Story 2

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जिसे अब ब्रा में हाथ डाल कर ही निकाला जा सकता था.
वो बेचारा मेरी ब्रा में हाथ डालने में डर रहा था इसलिए मैंने उसको इशारा किया और बोली “हाँ.
हाँ.. तू ब्रा के अन्दर हाथ डाल कर निकाल ले न प्लीज़ !!” मेरी बात सुनते ही उसके होंसले बुलंद हो गए और उसने अपना पूरा हाथ मेरी ब्रा के अन्दर घुसा दिया.
हाथ अन्दर डालते ही उसको टिकेट तो मिल गया लेकिन साथ में वो भी मिल गया जिसके लिए नौजवान पागल हो जाया करते हैं.
मेरी एक चूची उसके हाथ में आते ही वो बदामा श हो गया  और उसने मेरी चूची को अपने हाथ से सहलाना और मसलना शुरू कर किया.
मैं तो यही चाहती थी इसलिए मैं उसकी तरफ़ देख कर मुस्कुराने लगी.
मुझे मुस्कुराता देख कर वो खुश हो गया और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूची दबा डाली.
उसके बाद उसने टिकेट  निकाल कर चेके किया और मेरी तरफ़ आँख मौसी रते हुए बोला “आप खाना खा लीजिये..मैं बाकी  सवारियों को चेके कर के अभी आता हूँ.
” मैंने भी उसको खुला निमंत्रण देते हुए कहा “ज़ल्दी आना..!!” वो मुस्कुराता हुआ ज़ल्दी से बाहर निकल  गया.
मैंने भी ज़ल्दी ज़ल्दी अपना खाना खाया और बड़ी बेसब्री से उसका इंतज़ार करने लगी.
जितनी ज़ल्दी मुझे थी उतनी ही उसे भी थी इसीलिए वो भी पाँच-सात मिनट में ही वापस आ गया.
अन्दर आते ही उसने कूप अन्दर से लाके कर लिया और मेरे करीब आ कर मुझे अपनी सुडौल बाँहों में भरता हुआ बोला “आओ..मैडम..आज आपको फर्स्ट एसी का पूरा मज़ा दिलवाऊंगा”.
मैंने भी उसकी गर्दन में हाथ डालते हुए उसके होठों पर अपने होठ रख दिए.
अगले ही पल वो मेरे नीचे वाला होंठ चूस रहा था और मैं उसके ऊपर वाले होंठ को चूसने लगी.
इस चूमौसी  चाटी से वासना की आग भड़के उठी थी और ना जाने केब मेरी जीभ उसके मुंह में चली गई और वो मेरी जीभ को बड़े प्यार से चूसने लगा.
उसके हाथ भी अब हरकत करने लगे थे और उसका दायाँ हाथ मेरी बायीं चूची को दबा रहा था.
मुझे मज़ा आने लगा था और वो टी टी भी मस्त हो गया था.
करीब दो-तीन मिनट की चूमौसी  चाटी के बाद वो अलग हुआ और लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला “मैडम, एक प्रॉब्लम है !” मैंने पूछा “क्यूँ क्या हुआ ?”. “मैडम मेरे साथ मेरा एक साथी और है इसी कोच में, अगर मैं उसको ज्यादा देर दिखाई नहीं दूँगा तो वो मुझे ढूँढता हुआ यहाँ आ जाएगा.
” वो बोला। “अगर आप इजाज़त दें तो क्या उसको भी बुला….
”.
उसके बात सुनते ही मेरी खुशी ये सोचकर दोगुनी हो गई चलो आज. बहुत दिनों बाद एक साथ दो लण्ड मिलने वाले हैं.
इसलिए मैंने तुंरत अहसान सा जाताते हुए जवाब दिया ” अच्छा चलो.. बुला लो उसको भी लेकिन ध्यान रखना किसी और को पता नहीं चलना चाहिए.
जाओ जल्दी से बुला लाओ.
” मेरी बात सुनते ही वो दरवाजा खोल कर बाहर चला गया और तीन-चार मिनट बाद ही वापस आ गया.
उसके साथ एक आदमी और था.
ये नया बन्दा करीब पैंतीस साल की उम्र का था.
रंग काला लेकिन शकल  सूरत से ठीक ठाक था बस थोड़ा मोटा ज़्यादा था.
मैंने मन ही मन सोचा चलो दो लण्ड से तो मेरी प्यास बुझ ही जायेगी भले ही दोनों में ताकेत कम ही क्यों ना हो.
उन दोनों ने अन्दर आते ही कूपे को अन्दर से लाके कर लिया और दोनों मेरे पास आ कर खड़े हो गए.
पुराने वाले टीटी जिसका नाम मुझे अभी तक पता नहीं था उसने अपने साथी से मुझे मिलवाया “मैडम ये है मेरा दोस्त वी वीनू.
” मैंने खड़े होते हुए उससे हाथ मिलाया और पुराने वाले से बोली “ये तो ठीक है पर तुमने अभी तक अपना नाम तो बताया ही नहीं.
” मेरी बात पर मुस्कुराते हुए वो बोला “मैडम मुझे मनोज कहते हैं.
वैसे आप मुझे मनु भी बुला सकती हो.
” मैंने उन दोनों से कहा “मनु!! तुम्हारा नाम तो अच्छा है लेकिन यार तुम लोगों ने ये मैडम मैडम क्या लगा रखा है.
मेरा नाम शिवानी है.
वैसे तुम लोग मुझे किसी भी सेक्सी नाम से बुला सकते हो.
” आपस में परिचय पूरा होने के बाद हम लोग थोड़ा खुल गए थे.
लेकिन वो दोनों कुछ शरमौसी  रहे थे इसलिए पहल मुझे ही करनी पड़ी और मैंने मनु के गले में हाथ डाल कर उसके होंठ चूसना चालू कर दिए.
मनु भी मेरी कमर को अपने हाथों से पकेड़ते हुए मुझे चिपका कर चूमने लगा.
उसका साथी वीनू अभी तक खड़ा हुआ था.
उस बेचारे की हिम्मत नहीं हो रही थी कि कुछ कर सके.
उसको अपने करीब बुलाते हुए मैंने ही उससे  कहा “तू क्या लाइव शो देखने आया है।”. ऐसा कहकर मैं उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके लण्ड पर हाथ फेरना. चालू कर दिया.
अब कभी मनु मुझे चूमता तो कभी वीनू मेरी गर्दन पर अपने दांत गड़ा देता.
कुछ देर तक हम लोग खड़े खड़े ही चूमौसी  चाटी करते रहे लगे.
उन दोनों को उकेसाने के लिए मैंने उन दोनों के लंडों की नाप तौल शुरू कर दी थी.
जैसे ही वो दोनों अपने रंग में आए तो उन्होंने मुझे उठा कर सीट पर लेटा दिया और फिर अपना अपना काम बाँट लिया.
मनु मेरे होठों को चूसते हुए मेरी छातियों से खेलने लगा और उधर वीनू ने मेरी पेंटी निकाल कर चूत का रास्ता ढूँढ लिया.
मनु मेरी एक एक चूची को बारी बारी से दबा और मसल रहा था साथ में मेरे मुंह में अपनी स्वादिष्ट जीभ भी डाल चुका था.
नीचे वीनू चूत के आस पास और नीचे वाले होठों को चूसने में मगन था.
मुझे ज़न्नत का मिलना चालू हो गया था लेकिन अभी तक उन दोनों ने अपने कपड़े नहीं उतारे थे इसलिए मैं अभी तक अपने असली हीरो के दर्शन नहीं कर पायी थी.
मैंने उन दोनों को रोकते हुए कहा “रुको..मेरे यारों..केवल मेरे ही कपड़े उतारोगे तो कैसे काम चलेगा तुम लोग भी तो अपने अपने हथियार निकालो.
” मेरी बात सुनकर वीनू ने अपने कपड़े खोलना चालू कर दिया लेकिन मनु मेरी चूत का दीवाना हो गया था और चूत छोड़ने के लिए राजी नहीं था.
मुझे ज़बरदस्ती उसका मुंह हटाना पड़ा तो वो बोला “मेरी जान पहले तुम भी अपने सारे कपड़े निकालो!”. “क्यूँ नहीं जानू मैं भी निकालती हूँ तभी तो असली मज़ा आएगा..!” मैंने जवाब दिया और अपने बदन से गाउन और ब्रा, पेंटी निकाल कर एक तरफ़ रख दी.
इसी बीच वीनू अपने कपड़े खोल चुका था.
वोह अपना लण्ड हाथ में लेकर मेरे मुंह की तरफ़ बड़ा.
उसके लण्ड की शेप बड़ी अजीब थी.
उसके लण्ड का रंग बिल्कुल स्याह काला था और लम्बाई करीब छः इंच थी लेकिन मोटाई काफी ज्यादा थी करीब तीन इंच मोटा था.
मैं उसके लण्ड की बनावट देखते ही सोचने लगी कि ये तो मेरी भारी चूतड़ के लिए बिल्कुल फिट रहेगा.
ये सोचते हुए मैं उसका मोटा लण्ड अपने हाथ में ले सहलाने लगी.. ट्रेन में अपने कम्पार्टमेंट में 2 दमदार लौड़े लेने जा रही हूँ पर आज मुझे अपनी ये भूख देखके लग रहा है कि सिर्फ 2 से काम नहीं चलने वाला.. इस rail sex story का  लास्ट पार्ट जल्द ही.. और भी मजेदार पढ़िए My Hindi Sex Stories पर.. Hindi Sex Story के अन्य भाग –. पार्ट 1. पार्ट 2.
स्रोत:इंटरनेट