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Train Me Jijaji Se Chudai Family Sex Stories 2

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जीजाजीने मेरे हाथ सर के ऊपर कर दिए और बोले- अगर गुदगुदी हो तो जोर से तकिया पकड़ लेना.. पर हाथ मत रोकना। यह कह कर जीजाजीने धीरे से मेरे गालों.. मेरे होंठों पर हाथ फेरा और बोले- तुम बहुत सुन्दर हो दीपिका.. एकदम गोरी और चिकनी.. फिर जीजाजीने मेरे कानों के पीछे हाथ फेरा.. मुझे अच्छा लगने लगा। फिर एकदम से जीजाजीने मेरे मम्मों को अपने हाथ में ले लिया.. तो मेरे पूरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैंने कहा- जीजाजीबड़ा अजीब फील हो रहा है।. जीजाजीबोले- होगा ही.. यह तो सबसे ज्यादा मजेदार गेम है.. पता है तेरी दीदी के साथ इस खेल को खेले हुए मुझे पूरे 5 महीने हो गए हैं और मैं बेहद भूखा हूँ। फिर जीजाजीने मेरे निप्पलों को हल्के-हल्के मसला.. तो मैं तकिया दबा कर पैर पटकने लगी। फिर उन्होंने धीरे से मेरे पेट की नाभि में उंगली डाल दी.. मुझे मज़ा आ रहा था। फिर जीजाजीमेरे पैरों के पास आकर लेट गए और मेरे पैरों पर गुदगुदी करके चूमने लगे। तभी मैंने अपनी चूत में से कुछ निकलता हुआ महसूस किया और जीजाजीको ये बताया.. तो उन्होंने कहा- ये नार्मल बात है और इसका मतलब ये है कि तुम चुदने के लिए तैयार हो रही हो। जीजाजीके मुँह से ‘चुदने’ का शब्द सुन कर मैं तो और ज्यादा मदहोश हो गई।. अब जीजाजीने बनियान और निक्कर उतार दी.. वो केवल जॉकी की छोटी अंडरवियर में थे। उनकी मोटी-मोटी जांघें और तगड़ा जिस्म देख कर मैं हैरान रह गई। वो मेरे पैरों के साइड में लेट गए। उन्होंने मेरी नाइटी ऊपर तक उठा दी और पेट पर इकट्ठी कर दी। मेरी गोरी-गोरी जांघें देख कर वे खुश हो गए और उन्हें जी भर के चूमने और चाटने लगे।. मैंने भी अपना हाथ बढ़ा कर उनकी अंडरवियर को उतार दिया और उनके लण्ड को हाथ में लेकर खेलने लगी।. तभी जीजाजीने मेरी जाँघें फैला दीं और आकर मेरे ऊपर लेट गए।. अब वे मेरे होंठों को चूमने लगे.. कभी मेरे होंठ चूमते.. तो कभी मेरी गर्दन को.. तो कभी मेरे मम्मों को.. मेरे निप्पल को मुँह में लेकर काटते। मैंने जीजाजीसे कहा- एक बार जोर से मेरे मम्मों को दबाओ न.. तो उन्होंने अपने सख्त हाथों से मेरे निप्पलों और मम्मों को जोर से दबा दिया.. मुझे मजा आने लगा। फिर वे मेरे चूचों को दबाते-दबाते उन्हें नाइटी के ऊपर से ही चूमने लगे और कहने लगे- दीपिका तू तो एकदम चिकनी आइटम है।. फिर जीजाजीने मेरी नाइटी उतार दी.. और मुझे ब्रा उतारने को कहा। जब मैं ब्रा उतारने लगी.. तो जीजाजीने मेरी पैन्टी पकड़ कर खींच दी और मेरी चूत पर उंगली फिराने लगे। फिर एक उंगली अन्दर मेरी रसीली चूत में डाल दी। मुझे सिहरन सी हो उठी.. उन्होंने अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटना चालू कर दिया। मेरा बुरा हाल हो उठा था.. पर मज़ा भी बहुत आ रहा था। मैं जीजाजीको कहने लगी- आह्ह.. और करो जीजू.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.. मेरी चूत में कुछ-कुछ हो रहा है.. मैं तड़प रही हूँ। कुछ देर बाद जीजाजीने कहा- अब मुझे नीचे लेटने दो.. तुम ऊपर आकर मेरे लण्ड से खेलो। तो मैंने घुटनों पर बैठ कर उनके लण्ड से खेलना शुरू दिया।. जीजाजीने इशारा किया मैंने समझते हुए अपना सर नीचे किया और जीजाजीने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और उसे चूसने को बोले।. मैं भी मज़ा लेकर लण्ड चूसने लगी।. काफी देर चूसने के बाद जीजाजीने मुझे लिटा दिया। मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर आगे-पीछे करने लगे।. मैंने अपने पैर उनकी कमर में लपेट लिए और जोर से चिल्लाई- जीजाजीप्लीज़ धीरे-धीरे करो ना.. आाह्ह्ह्ह्.. ऊऊह्ह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है। मैं अपना सब कुछ जीजाजीपर लुटा रही थी, हर तरह से उन्हें खुश कर देना चाहती थी, जीजाजीभी मुझे पूरी तरह खुश कर रहे थे। जब मेरी चूत एकदम चिकनी हो गई.. तब जीजाजीने अपना लण्ड मेरी चूत के ऊपर रखा.. तो ऐसा लगा जैसे किसी न गरम सरिया रख दिया हो। मैंने आँख बंद कर ली और मज़ा लेने लगी।. जीजाजीने हल्के-हल्के से धक्का मारना शुरू किया और अपना लण्ड मेरी चूत में डालने लगे। मेरा दर्द से बुरा हाल होने लगा.. मैं चिल्लाने लगी- धीरे-धीरे करो जीजू.. बहुत दर्द हो रहा है.. जीजाजीकहाँ मानने वाले थे.. उनके अन्दर का सांड जाग चुका था। उन्होंने जानवरों की तरह मुझे चोदना शुरू कर दिया। उन्होंने अब अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया था और जोर-जोर से मुझे चोदने लगे। वे साथ में मेरे मम्मों को भी मसल रहे थे और उंगली से निप्पल को भी मींज रहे थे।. जीजाजीने मुझे लाइफ टाइम का आनन्द दे दिया था।. काफी देर तक जीजाजीमुझे जानवरों की तरह चोदते रहे।. मुझे भी मज़ा आ रहा था.. इसलिए मैं उनकी इन हरकतों का विरोध भी नहीं कर रही थी.. बल्कि मज़ा ले रही थी। फिर कुछ देर बाद जीजाजीभी जोर से ‘आआह्ह्ह.. आआह्ह्ह..’ करने लगे। तभी मैं एकदम से पिंघल गई तो उन्होंने भी लण्ड को चूत से निकाल लिया.. और मेरी चूत के ऊपर अपना सारा पानी छोड़ दिया। हम दोनों बुरी तरह थक चुके थे। कुछ देर आराम करने के बाद वे मुझे 69 की पोजीशन में ले आए। मैं जीजाजीका लण्ड जो कि अब छोटा हो चुका था.. उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और जीजाजीने अपने अंडरवियर को उठाया और मेरी चूत को साफ करने के बाद चूत को चूमने लगे।. कुछ देर के बाद जीजाजीने मुझे घोड़ी बनने को कहा.. तो मैं झट से बन गई। तब जीजाजीने एक जोर का थप्पड़ मेरे चूतड़ पर मारा.. मैं जोर से चिल्लाई और बोली- ये क्या कर रहे हो जीजू.. मार क्यों रहे हो? तब जीजाजीने कहा- इसमें भी तुमको मजा आएगा.. मैं तुम्हारी दीदी को भी इसी तरह मारता हूँ.. उसे बहुत मजा आता है। मैंने उनका लण्ड चूस लिया था.. तो उनका लण्ड फिर से खड़ा हो गया था। जीजाजीने मेरी कमर को पकड़ा और अपना लण्ड एक बार फिर से मेरी चूत में घुसा दिया। फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़े और जोर-जोर से मुझे चोदने लगे।. मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती।. यह लिखते हुए भी मेरी चूत बिल्कुल भीग चुकी है और मैं अपनी चूत को सहला रही हूँ।. उधर मेरी चूत ने भी अब जवाब दे दिया था.. और जीजाजीभी झड़ने वाले थे। अबकी बार उन्होंने अपना सारा पानी मेरी कमर के ऊपर निकाल दिया और मैं औंधी ही लेट गई। जीजाजीभी मेरे पास लेट कर मुझे बेतहाशा चूमने लगे।. फिर अपनी अंडरवियर से मेरी कमर पर गिरे उनके वीर्य को साफ किया और चूत को चूमा.. चाटा.. सहलाया और बोले- तुम अब तुम सो जाओ। मैं करवट लेकर सो गई.. पर मुझे लगातार जीजाजीके होंठ अपनी चिकनी पिंडलियों महसूस हो रहे थे। तो यह थी दोस्तो, मेरी आज की कहानी। आप सभी को कैसी लगी.. मुझे मेल कर के जरूर बताना। मैं आप सभी के मेल का इंतजार करूँगी।. दोस्तों केसी लगी आपको मेरी चुदाई की family sex stories बताना जरुर. और भी के लिए आते रहिये  my hindi sex stories पर.
स्रोत:इंटरनेट