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Train Me Jijaji Se Chudai Family Sex Stories

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मैं दीपिका, फिर से एक कहानी लेकर आई हूँ। आज की यह कहानी मेरी और मेरे जीजाजी की है। आशा करती हूँ आपको family sex stories पसंद आएगी।.  . मैंने सेकंड ईयर की परीक्षा दे दी थी.. और परीक्षा के बाद मैं घर पर ही रहती थी। मेरी एक बड़ी बहन जिसकी शादी को एक साल हो गया था और वो प्रेगनेंट थी। मेरी दीदी का नाम वसुधा है और जीजाजीका नाम मनीष है। उनकी ये लव-मैरिज थी।. मेरी दीदी और जीजाजी दोनों अकेले रहते हैं। जीजाजीएक बड़ी कम्पनी में काम करते हैं.. जिसकी वजह से वो दीदी को प्रेगनेंसी की हालत में टाइम नहीं दे पा रहे थे। एक दिन दीदी का मम्मी के पास फ़ोन आया और दीदी ने मम्मी से कहा- दीपिका की परीक्षा खत्म हो गई हैं और वो अब घर में ही है.. तो आप उसे कुछ दिन के लिए मेरे पास भिजवा दो। मनीष ऑफिस के काम में बिजी रहते हैं और मैं सारा दिन घर में अकेली रहती हूँ। घर के कुछ काम भी नहीं कर पाती हूँ। अगर दीपिका आ जाएगी.. तो मुझे कुछ आराम हो जाएगा। मैंने यह बात सुनी तो मैं भी जाने के लिए तैयार हो गई।. रविवार को जीजाजीमुझे लेने के लिए आए, रात में ही हमारा ट्रेन से रिजर्वेशन था.. क्योंकि गर्मी की छुट्टियाँ थीं.. तो ट्रेन में हमें एक ही सीट मिली थी और एक सीट RAC में थी। रात का टाइम था और सीट एक ही थी। मैं और जीजाजीसीट पर काफी देर तक बैठे रहे. फिर मुझे नींद आने लगी.. तो जीजाजीबोले- दीपिका जब तक कोई और सीट नहीं मिल जाती.. तुम मेरी गोदी में सर रख कर सो जाओ। मैं अपना सर उनकी गोदी में रख कर लेट गई और आँखें बंद कर लीं। मेरा चेहरा उनके पेट की तरफ था। थोड़ी देर में मुझे अपने सर के नीचे उनके लण्ड का एहसास हुआ। मैंने नींद की एक्टिंग करते हुए अपना सर थोड़ा हिलाया. और हल्की सी ‘ऊँह’ करके फिर सोने लगी।. मुझे लगा कि लण्ड में कुछ हलचल हुई।. कुछ मिनट बाद मैंने फिर से ऐसा किया। अब मुझे यकीन हो गया कि उन्हें भी अहसास हो रहा है।. उन्होंने बैग से एक चादर निकाली और मुझ पर डाल दी और मेरा सर भी ढक दिया। उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया।. मैंने फिर हल्के-हल्के अपना सर उनके लण्ड पर रगड़ना शुरू कर दिया।. उनका लण्ड खड़ा हो गया था और पैंट से निकलने को मचल रहा था।. उनका हाथ हल्के-हल्के मेरी कमर को सहला रहा था, मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। जीजाजीसे अब कंट्रोल नहीं हो रहा था, उनका हाथ अब धीरे-धीरे मेरे मम्मों पर आ गया था और वो मेरे मम्मों को सहलाने लगे थे। मैं भी इसके मजे ले रही थी।. तभी TC आ गया और उसने हम दोनों एक सीट और दे दी।. तब जीजाजीने कहा- दीपिका तुम यहाँ अब आराम से सो जाओ.. मैं दूसरी सीट पर चला जाता हूँ। रात बीत गई और सुबह हम घर पहुँच गए।. घर पहुँच कर दीदी से मिल कर मुझे बहुत अच्छा लगा।. घर पहुँच कर जीजाजीतो सो गए और मैं दीदी से बातें करने लगी।. दोपहर हो गई.. तो मैं खाना बनाने लगी। दीदी ने जीजाजीको जगाया कि खाना खा लो।. तब जीजाजीआए और उन्होंने मुझे खाना बनाते देखा तो बोले- क्या बात है.. दीपिका तो बड़ी हो गई है.. अब खाना भी बना लेती है। मैंने हँस कर कहा- और क्या.. आप मुझे स्टुपिड समझते हो? अगले दिन मैं नहाने जाने लगी.. तो जीजाजीने कहा- दीपिका गेस्ट-रूम के बाथरूम का शावर नहीं चल रहा है.. तुम हमारे कमरे के बाथरूम में नहा लेना। यह कह कर जीजाजीऑफिस चले गए।. मैंने उनके कमरे के बाथरूम में जाके नहाने के बाद अपनी ब्रा और पैन्टी को वहीं पर धोने के लिए डाल दिया। शाम को जीजाजीके ऑफिस से आने के बाद एक और अजीब वाकिया हुआ।. मैं अचानक दीदी के कमरे में गई तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा खुला था और अन्दर जीजाजीसिर्फ जॉकी की छोटी अंडरवियर में थे और मेरी पैन्टी को अपने अंडरवियर के ऊपर रगड़ रहे थे.. कभी पैन्टी को सूंघ रहे थे। मैं वहाँ से भाग कर अपने कमरे में आ गई।. कुछ दिन बीते मेरी और जीजाजीकी दोस्ती और बढ़ गई। वो मुझे घूर-घूर कर देखते थे.. तो मुझे भी अच्छा लगता था। फिर जीजाजीने मेरे साथ छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया, कई बार मेरे गालों को चूम भी लिया। एकाध बार तो उन्होंने दीदी के सामने ही मेरे मम्मे भी दबा दिए.. इस पर दीदी भी कुछ नहीं कहती थीं। हमारी मस्ती ऐसे ही चलने लगी, मुझे भी इसमें बड़ा मजा आता था। एक दिन दीदी के सामने ही जीजाजीने कहा- दीपिका अब तो तुम्हारी भी शादी होगी.. शादी के बाद क्या होना है.. तुझे पता है.. कोई एक्सपीरिएंस है तुझे? नहीं तो मुझ से सीख ले कुछ.. मेरा भी कुछ काम बन जाएगा.. क्योंकि तेरी दीदी तो इस हालत में मुझे हाथ भी लगाने नहीं देती.. तू ही कुछ मदद कर दे मेरी। इस पर दीदी भी जीजाजीको प्रोत्साहित करते हुए बोलीं- हाँ हाँ.. इसे भी सिखा दो। जीजाजीने उसी वक्त मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और यहाँ-वहाँ छूने लगे।. मैं ऊपरी मन से उनकी इन हरकतों का विरोध करती रही।. इसके बाद तो धीरे-धीरे जीजाजीकी हरकतें बढ़ने लगीं।. अब तो वो दीदी के सामने ही मेरे होंठ चूम लेते और मेरे मम्मों को भी अच्छी तरह से दबा देते।. एक दिन में जीजाजीके कमरे की सफाई कर रही थी कि तभी मुझे उनकी बुक  मिली। मैंने जब बुक पड़ी तो मेरी चूत में एक अजीब से गुदगुदी सी होने लगी।. जीजाजीने वो सारी बातें उसमें लिखी थीं.. जो वो इतने दिनों से मेरे साथ कर रहे थे। मेरी ख़ूबसूरती की ऐसी-ऐसी बातें लिखी थीं.. कि मुझे पढ़ कर शर्म आ गई। जीजाजीने तो यह तक लिखा था कि जब उन्होंने मेरी पैन्टी अपने लण्ड के ऊपर रगड़ी और सूंघी थी.. तभी उन्होंने फैसला कर लिया कि मेरे वापस घर जाने से पहले मुझे एक बार सर से पैरों तक चूमेंगे.. चाटेंगे.. सहलाएंगे और प्यार करेंगे।. यह पढ़ कर तो मैं घबरा गई.. फिर बाद में मुझे अच्छा लगा क्योंकि पहली बार लाइफ में किसी मर्द से अपनी तारीफ़ सुनी थी। शाम को ऑफिस से आने के बाद वो मेरे लिए आइसक्रीम लेकर आए।. मैंने पूछा- ये किस खुशी में?. तो वो बोले- जो खुशी मुझे तुम्हारे आने से हुई है.. उस खुशी में। उस रात जब मैं सोने के लिए अपने कमरे में आई.. तो करीब एक घंटे बाद जीजाजीमेरे कमरे में आए और बोले- वसु सो गई है (जीजाजीदीदी को प्यार से वसु बोलते हैं) और मुझे नींद नहीं आ रही थी.. तो तुम्हारे पास चला आया। तुम भी सो गई थीं क्या?. मैंने बोला- नहीं.. अभी नहीं सोई। जीजाजीमेरे बिस्तर पर बैठ गए और हम बातें करने लगे।.  . जीजाजीबोले- चलो एक गेम खेलते हैं।. मैंने भी ‘हाँ’ कर दी.. तो जीजाजीमेरे करीब आकर लेट गए और मेरे पेट पर हाथ रख लिया। जीजाजीबोले- तूने कभी गुदगुदी-गुदगुदी खेला है?. मैंने कहा- नहीं.. उस वक़्त जीजाजीने एक बनियान और निक्कर पहने हुए थे और मैंने नाइटी पहनी थी।. जीजाजीबोले- मैं तुझे गुदगुदी करूँगा.. अगर तूने सह लिया और हँसी भी नहीं.. तो मैं तुझे इनाम दूँगा। मैंने कहा- ठीक है।.
स्रोत:इंटरनेट