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Train Mein Akeli Hindi Train Sex Stories

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ट्रेन में अपने कम्पार्टमेंट में 2 दमदार लौड़े लेने जा रही हूँ पर आज मुझे अपनी ये भूख देखके लग रहा है कि सिर्फ 2 से काम नहीं चलने वाला.. इन hindi train sex stories का धमाकेदार लास्ट पार्ट.. Hindi Sex Story के अन्य भाग –. पार्ट 1. पार्ट 2. मैंने जवाब दिया और अपने बदन से गाउन और ब्रा, पेंटी निकाल कर एक तरफ़ रख दी.
इसी बीच वीनू अपने कपड़े खोल चुका था.
वोह अपना लण्ड हाथ में लेकर मेरे मुंह की तरफ़ बड़ा.
उसके लण्ड की शेप बड़ी अजीब थी.
उसके लण्ड का रंग बिल्कुल स्याह काला था और लम्बाई करीब छः इंच थी लेकिन मोटाई काफी ज्यादा थी करीब तीन इंच मोटा था.
मैं उसके लण्ड की बनावट देखते ही सोचने लगी कि ये तो मेरी भारी चूतड़ के लिए बिल्कुल फिट रहेगा.
ये सोचते हुए मैं उसका मोटा लण्ड अपने हाथ में ले सहलाने लगी.. लेकिन मोटाई इतनी ज्यादा थी कि मेरे हाथ में आ रहा था.
मुझे लण्ड सहलाने में मज़ा आ रहा था इसी बीच में मनु ने भी अपने कपड़े खोल दिए और मेरे पास आ कर मुझे लण्ड सहलाते हुए देखने लगा.
मैंने वीनू का लण्ड एक हाथ में और मनु का लण्ड दूसरे हाथ में ले थाम लिया.
उसका लण्ड मेरी उम्मीद से ज्यादा लंबा था.
करीब सात इंच लंबा और दो इंच मोटा बिल्कुल गोरा बहुत खूबसूरत लौड़ा था मनु का.
मैंने ज़ल्दी से ट्रेन की सीट पर अधलेटते हुए मनु का लण्ड अपने उरोजों के बीच दबा लिया.
उधर वीनू मेरी टांगों के बीच में बैठकर मेरी चूत चाटने लगा.
उसने मेरी चूत में अपने पूरी जीभ डाल दी.
अचानक जीभ अन्दर डालने से मेरी सिसकारी निकल  गई.
“आह..औ..आ..ह.
ह..मेरे..पहलवान…मज़ा आ गया…ऐसे ही चोदो आ.
ह..आ.
अ..हह..मुझे..जीभ सी…से.
मेरी दाना….
रगड़ो..उधर…हाँ…ऐसे..ही…करते..रहो…शाबाश…वीनू..वाह….
” मैं मस्त होने लगी थी.
मैंने फ़िर एक बार मनु का पूरा लण्ड अपनी बड़ी बड़ी चूचियों के बीच दबाकर अन्दर बाहर करते हुए अपनी चूचियों की चुदाई करवाने लगी.
वीनू अपनी खुरदरी जीभ से मेरी चिकनी चूत चाट रहा था और ट्रेन अपनी फुल स्पीड पर चल रही थी.
मिली जुली आवाजें आ रहीं थीं. “धडके..धडके..खटाके..ख़त..चड़प..चाप..औयो..औ..थाधके…….
” मनु के मुंह से भी आवाजें आने लगीं थीं.
“आह…ये…या.
इस …वाह…मेरी…जान…चूस…चूसले..ले…और अन्दर…और आदर ले…भोसड़ी…की..और जोर..से..ले..और ले..ले…वाह…” अब उसने मेरी चूचियों में धक्के मौसी रना चालू कर दिया था.
मुझे लगा कि उसे मज़ा आ रहा है तो कुछ देर और करने देती हूँ क्यूँकि उधर मुझे भी चूत चटवाने में मज़ा आ रहा था.
लेकिन अचानक मनु ने मेरी चूचियों पर धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ पकड़कर अपना. पूरा लण्ड उनमें धांसकर अन्दर बाहर करते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा “आ…..ह….
.
ह….
आ…ले…कॉम…ओं…नं….
मेरी…जान…ले..ले…पूरा….
ले..मौसी…..चोद….
ले….
” अचानक पिचकारी चल गई.
मैं समझ गई एक तो बिना चूत का स्वाद चखे ही चल बसा.
झड़ने के बाद उसने अपने लण्ड बाहर निकाल लिया और हंसने लगा.
उधर शायद वीनू भी चूत चूस चूस कर थक गया था इसलिए वो भी उठ कर खड़ा हो गया और मेरे मुंह के पास लण्ड ला कर बोला “प्लीज़ जान मेरा भी अपनी बड़ी बड़ी चूचियों में दबाओ न..” मैंने हँसते हुए उससे कहा “तुम दोनों अगर बिना चोदे ही उलटी करके चले जाओगे तो मैं क्या करूंगी..” “नहीं मेरी जान, मैं तो तुम्हारी चूत में ही पानी डालूँगा चिंता मत करो.
” वीनू ने जवाब दिया.
मैंने वीनू का लण्ड अपनी बड़ी बड़ी चूचियों के बीच दबाकर अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
थोडी देर तक लण्ड अन्दर बाहर केर्ने के बाद उसने अपना लण्ड निकाल लिया और मुझसे बोला.
“चल..मेरी रानी..अब..कुतिया..बन जा…आज तेरी चूत का बाजा बजाऊंगा.
” मैंने फ़ौरन उसका आदेश माना और उलटी हो कर चूत को उसकी तरफ़ कर दिया.
उसने भी आसन लगा कर मेरी चूत की छेद पर लण्ड लगाया और एक केरारा धक्का दिया.
” आ.
इ.
ई.
गई….
आ..आ गया…आ.
गया..मेरे राजा..पूरा..अन्दर..आ..गया..” मैं चिल्लाने लगी.
हमारी चुदाई चालू हो गई थी और उधर इस बीच मनु ने ज़ल्दी ज़ल्दी अपने कपड़े पहन लिए थे.
जब मैंने मनु को कपड़े पहने हुए देखा तो चुदवाते हुए ही बोली “क्या..आ.
अ.
हुआ..मनु…तुम..नहीं..आ.
आ..हह..डालोगे…क्या..आ..हह…एक…ही..बार…में…ठंडा..पड़.
आ.
ह.. ह..गया…क्या ?” मनु ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुझे चोद रहे वीनू के कान में आ कर कुछ बोला और कूपे से बाहर निकल  गया.
मुझे चुदाई में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और ट्रेन के हिलने की गति के साथ ही हिल हिल कर लण्ड लेने लगी.
अब वीनू की धक्को की स्पीड बढ़ने लगी थी और ट्रेन के हिलने की वजह से मुझे भी दोगुना मज़ा आ रहा था.
वीनू अब बड़बड़ाने लगा “या..ले…मेरी….
जान..ले… पूरा…ले…..ले… मेरा..लण्ड..तेरी…चूत फाड़ डालूँगा…बहन…चोद…ले..” मुझे भी उसकी बातें सुन सुन आकर जोश आने लगा था इसलिए मैं भी बोलने लगी,”चल..और…ज़ोर..से..दे… हाँ..कर…मेरे..राजा.. कर..ले… च.
चल..अगर..तेरे..लण्ड..में..दम..है ..तो.. मेरी..भारी चूतड़…में..डाल.. डाल..न..गांडू…भारी चूतड़..में…डाल…” मेरी बात सुन कर उसने चूत में से अपना लण्ड निकाल लिया और मेरे गाण्ड के छेद पर लगाने लगा.
मैंने भी अपनी पोज़िशन ठीक की और भारी चूतड़ का छेद ऊपर की तरफ़ निकाल कर झुक गई और बोली “चल.. आ.
जा.
ज़ल्दी….. डाल..दे… भारी चूतड़…में… धीरे….
धीरे.
डालना…” वीनू ने भारी चूतड़ के छेद पर निशाना लगाया और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया लेकिन उसका लण्ड मेरी चूत के पानी से चिकेना हो रहा था इसलिए फिसल गया और नीचे चला गया.
उसने दुबारा कोशिश की और इस बार पहले से भी ज़ोर से धक्का लगाया.
इस बार लण्ड ने भारी चूतड़ की पटरी पकड़ ली और मेरी भारी चूतड़ को चीरता हुआ अन्दर चला गया.
और मेरी जैसी चुदक्कड़ औरत की भी चीख निकल  गई “आ….
अ.
अ.. आ..ईई.
ई.
ई.
इ.
ई.
मार  डाला मौसी दरचोद… ऐसे…डालते..हैं..क्या.. फाड़ डाली..मेरी..भारी चूतड़.. गांडू… मुझे एक बार थोड़ा मरवानी है… आ..ई.
ई.
ई…” लेकिन उसने मुझे पीछे से पकड़ रखा था इसलिए मैं उसका लण्ड निकाल नहीं पायी और उसने धक्के लगाने चालू कर दिए.
वाकई उसका लण्ड गज़ब का मोटा था मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने मेरी एक भी नहीं सुनी और धक्का लगाना चालू रखा.
आठ दस धक्कों के बाद मुझे भी दर्द कम हुआ और मज़ा आने लगा.
अब मैंने नीचे से हाथ डाल कर अपनी चूत को मसलना चालू कर दिया था.
मेरी इच्छा हो रही थी की मेरी चूत में भी कोई चीज डाल लूँ लेकिन वो मनु का बच्चा तो खेल बीच में ही छोड़ कर चला गया था.
तभी अचानक कूपे का दरवाजा खुला और तीन आदमी एक साथ अन्दर आ गए.
ट्रेन किसी बड़े स्टेशन पर रुकी हुई थी.
अचानक उन लोगों के अन्दर आने से मैं चौंक गई और जल्दी से अलग होकर अपने कपड़े उठा कर अपना बदन छुपाने की कोशिश करने लगी.
उन तीन लोगों के अन्दर आते ही वीनू ज़ोर से चहके कर बोला “आओ बॉस !! मैं आप लोगों का ही इंतज़ार कर रहा था.
उसने ज़ल्दी से कूपे का दरवाजा अन्दर से लॉके कर लिया और मेरी तरफ़ मुड कर बोला ” चिंता मत करो मैडम ये लोग भी अपने दोस्त हैं, अभी तुम्हारी इच्छा चूत में कुछ डलवाने की हो रही थी ना इसलिए इन लोगों को बुलवाया है.
चलो शुरू करते हैं.
” मुझे इस तरह से उन लोगों का अन्दर आना अच्छा नहीं लगा.
मैंने नाराज होते हुए कहा “चुप रहो तुम !! मुझे क्या तुम लोगों ने रंडी समझ रखा है.
जो भी आएगा मैं उससे चुदवा लूंगी.
तुम लोग अभी मेरे कूपे से बाहर चले जाओ नहीं तो मैं शोर मचा दूंगी.
” मेरे इस तरह नाराज होने से वो लोग डर गए और मुझे मनाते हुए वीनू ने कहा ” नहीं मैडम ऐसा नहीं है अगर आप नहीं चाहोगी तो कुछ भी नहीं करेंगे.

स्रोत:इंटरनेट