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Zahreen Ka Pyasa Safar Bus Sex Story 2

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“क्यों आये हो यहाँ?”. “ये तो तुम अच्छी तरह जानती हो!”. “देखो कोई आ जायेगा!”. “कोई आने वाला होता तो तुम इस तरह बस में मज़े लेने के लिये नहीं घूम रही होती!”. “मैं तुम्हें जानती भी नहीं हूँ…!”. “मेरा नाम विक्रम है! अपना नाम तो बताओ!”. “मेरा नाम जहरीन है, अब तुम जाओ यहाँ से…” बातें करते-करते विक्रम बुरक़े के ऊपर से जहरीन के जिस्म पर हाथ फिरा रहा था। विक्रम के हाथ उसके मम्मों से लेकर उसकी कमर और पेट और जाँघों को सहला रहे थे। जहरीन बार-बार उसका हाथ झटक रही थी और विक्रम. बार-बार उन्हें फिर जहरीन के जिस्म पर रख रहा था। लेकिन विक्रम समझ गया था कि जहरीन की ‘ना’ में ‘हाँ’ है।. अब विक्रम ने जहरीन को अपनी बाँहों भर लिया और बुरक़े से झाँकती आँखों पर चुंबन जड़ दिया। जहरीन की आँखें बंद हो गयी और उसके हाथ अपने आप विक्रम के कंधों पर पहुँच गये। विक्रम ने उसके नकाब को ऐसे हटाया जैसे. कोई घूँघट उठा रहा हो। जहरीन का चेहरा देखकर विक्रम को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था। ग़ज़ब की खूबसूरत थी जहरीन – गुलाबी रंग के पतले होंठ,  बड़ी आँखें,  गोरा चिट्टा रंग और होंठों के ठीक नीचे दांयी तरफ़ एक छोटा सा तिल। विक्रम ने अब धीरे-धीरे उसके गालों को चूमना और चाटना शुरू कर दिया। जहरीन ने आँखें बंद कर लीं और विक्रम उसे चूमे जा रहा था। उसके गालों को चाट रहा था,  उसके होंठों को चूस रहा था। अब जहरीन भी बाकायदा साथ दे रही थी और उसकी जीभ विक्रम की जीभ से कुश्ती लड़ रही थी। विक्रम ने हाथ नीचे किया और उसके बुरक़े को उठा दिया। जहरीन ने अपनी दोनों बाँहें ऊफर कर दीं और विक्रम ने बुरक़ा उतार कर. फेंक दिया। विक्रम जहरीन को देखता रह गया। इतना शानदार जिस्म जैसे किसी ने बहुत ही फुर्सत में तराश कर बनाया हो। काले रंग की छोटी सी जालीदार ब्रा और थाँग पैंटी और काले ही रंग के ऊँची पेन्सिल हील के. सैंडलों में जहरीन जन्नत की हूर से कम नहीं लग रही थी।. “दरवाज़े पर ही करना है सब कुछ?” जहरीन ने कहा तो विक्रम मुस्कुरा दिया और उसने जहरीन को अपनी बाँहों में उठा लिया और गोद में लेकर बेडरूम की तरफ़ चल पड़ा। उसने जहरीन को बेड के पास ले जाकर गोद से उतार दिया और. बाँहों में भर लिया। जहरीन की ब्रा खोलते ही जैसे दो परिंदे पिंजरे से छूट कर उड़े हों। बड़े-बड़े मम्मे और उनपर छोटे-छोटे गुलाबी चुचक और तने हुए निप्पल। विक्रम तो देखता ही रह गया… जैसे कि हर कपड़ा. उतारने के बाद कोई खज़ाना सामने आ रहा था। विक्रम ने अपना मुँह नीचे लिया और जहरीन की चूचियों को चूसता चला गया और चूसते हुए ही उसने जहरीन को बिस्तर पर लिटा दिया। जहरीन के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी और. वो विक्रम के बालों में हाथ फिरा रही थी और अपनी चूचियाँ उसके मुँह में ढकेल रही थी। जहरीन मस्त हो चुकी थी। अब विक्रम उसके पेट को चूस रहा था और विक्रम का हाथ जहरीन की पैंटी पर से उसकी चूत की मालिश कर रहा. था। जहरीन बेहद मस्त हो चुकी थी और लण्ड के लिये उसकी चूत की प्यास उसे मदहोश कर रही थी। उसकी सिसकारियाँ बंद होने का नाम नहीं ले रही थी और टाँगें अपने आप फैलकर लण्ड को चूत में घुसने का निमंत्रण दे रही. थी। विक्रम उसके पेट को चूमते हुए उसकी जाँघों के बीच पहुँच चुका था। जहरीन बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसकी टाँगें बेड से नीचे लटक रही थी। विक्रम उसकी टाँगों के बीच बेड के नीचे बैठ गया और जहरीन की टाँगें. फैला दीं। वो जहरीन की गोरी-गोरी,  गदरायी हुई भरी भरी सुडौल जाँघों को बेतहाशा चूम रहा था और उसकी उंगलियाँ पैंटी पर से उसकी चूत सहला रही थी। विक्रम की नाक में जहरीन की चूत से रिसते हुए पानी की खुशबू आ रही थी और वो भी मदहोश हो रहा था। जहरीन पर तो जैसे नशा चढ़ गया था और वो अपनी गाँड उठा-उठा कर अपनी चूत को विक्रम की उंगलियों पर रगड़ रही थी।. अब विक्रम पैंटी के ऊपर से ही जहरीन की चूत को चूमने लगा। वो हल्के-हल्के दाँत गड़ा रहा था जहरीन की चूत पर और जहरीन विक्रम के सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा रही थी और गाँड उठा-उठा कर चूत को विक्रम के मुँह. में घुसा रही थी। फिर विक्रम ने जहरीन की पैंटी उतार दी। जहरीन अब ऊँची पेंसिल हील के सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी थी। विक्रम के सामने अब सबसे हसीन चूत थी… एक दम गुलाबी एक दम प्यारी। एक दम सफायी. से रखी हुई कोई सीप जैसी। विक्रम उसकी खुशबू से मदहोश हो रहा था और उसने अपनी जीभ जहरीन की चूत पर रख दी। जहरीन उछल पड़ी और उसके जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया। उसने विक्रम के सिर को पकड़ा और अपनी गाँड उचका कर. चूत विक्रम के मुँह पर रगड़ दी। विक्रम की जीभ जहरीन की चूत में धंस गयी और विक्रम ने अपने होंठों से जहरीन की चूत को ढक लिया और एक उंगली भी जहरीन की चूत में घुसा दी – अब जहरीन की चूत में विक्रम की. जीभ और उंगली घमासान मचा रही थी।. जहरीन रह-रह कर अपनी गाँड उठा-उठा कर विक्रम के मुँह में चूत दबा रही थी। उसकी चूत से निकल रहा पानी उसकी गाँड तक पहुँच गया था। विक्रम ने अब उंगली चूत से निकाली और जहरीन की गाँड पर उंगली फिराने लगा। चूत. के पानी की वजह से गाँड में उंगली फिसल कर जा रही थी। जहरीन को कुछ होश नहीं था – वो तो चुदाई के नशे से मदहोश हो चुकी थी। आज तक उसे इतना मज़ा नहीं आया था। उसकी सिसकारियाँ बंद नहीं हो रही थी। उसकी. गाँड में उंगली और चूत में जीभ घुसी हुई थी और वो नशे में धुत्त शराबी कि तरह बिस्तर पर इधर उधर हो रही थी। उसकी आँखें बंद थी और वो जन्नत की सैर कर रही थी। किसी तेज़ खुशबू की वजह से उसने आँखें खोली तो. सामने विक्रम का लण्ड था। उसे पता ही नहीं चला कब विक्रम ने अपने कपड़े उतार दिये और 69 की पोज़िशन में आ गया। जहरीन ने विक्रम के लण्ड को पकड़ा और उस पर अपना हाथ ऊपर-नीचे करने लगी। विक्रम के लण्ड से पानी गिर. रहा था और वो चिपचिपा हो रहा था। जहरीन ने लण्ड को अच्छी तरह सूँघा और उसे अपने चेहरे पर लगाया और फिर उसका अच्छी तरह जायज़ा लेने के बाद उसे चूम लिया। फिर उसने अपना मुँह खोला और लण्ड को मुँह में लेकर चूसना. शुरू कर दिया। वो लण्ड के सुपाड़े को अपने मुँह में लेकर अंदर ही उसे जीभ से लपेटकर अच्छी तरह एक लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और विक्रम अब भी उसकी चूत चूस रहा था।. अचानक जैसे ज्वालामुखी फटा और लावा बहने लगा। जहरीन का जिस्म बुरी तरह अकड़ गया और उसकी टाँगें सिकुड़ गयी। विक्रम का मुँह तो जैसे जहरीन की जाँघों में पिस रहा था। जहरीन बुरी तरह झड़ गयी और उसकी चूत ने एक दम. से पानी छोड़ दिया और वो एक दम निढाल गयी। आज एक घंटे में वो दो बार झड़ चुकी थी जबकि अब तक उसकी चूत में लण्ड गया भी नहीं था।. अब विक्रम ने अपना लण्ड जहरीन के मुँह से निकाला और जहरीन की चूत छोड़ कर उसके होंठों को चूमने लगा। जहरीन झड़ चुकी थी लेकिन लण्ड की प्यास उसे बाकायदा पागल किये हुए थी। अब वो बिल्कुल नंगी विक्रम के नीचे. लेटी हुई थी और विक्रम भी एक दम नंगा उसके ऊपर लेटा हुआ था। विक्रम का लण्ड उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था और जहरीन अपनी गाँड उठा-उठा कर विक्रम के लण्ड को खाने की फ़िराक में थी। विक्रम अब उसकी टाँगों के बीच. बैठ गया और उसकी टाँगों को उठा कर अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। जहरीन आहें भर रही थी और अपने सर के नीचे रखे तकिये को अपने हाथों में पकड़ कर मसल रही थी। विक्रम के लण्ड को खा जाने के लिये उसकी गाँड. रह-रह कर उठ जाती थी। मगर विक्रम तो जैसे उसे तड़पा-तड़पा कर चोदना चाहता था। वो उसकी चूत पर ऊपर से नीचे अपने लण्ड को रगड़े जा रहा था। अब जहरीन से रहा नहीं जा रहा था – बेहद मस्ती और मज़े की वजह से उसकी. आँखें बंद हो चुकी थी और मुँह से सिसकारियाँ छूट रही थी। विक्रम का लण्ड धीरे-धीरे फिसल रहा था और फिसलता हुआ वो जहरीन की चूत में घुस जाता और बाहर निकल जाता।.
स्रोत:इंटरनेट