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Zahreen Ka Pyasa Safar Bus Sex Story

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जहरीन अपनी नीरस सेक्स लाइफ से बोर हो चुकी थी। उसका शौहर उसको हमेशा प्यासा छोड़ जाता था। वो अपनी प्यास बुझाने के लिए दर दर भटकती थी। उसके इस सेक्स सफ़र की शुरुआत एक bus sex story के किस्से से होती है।. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. सुबह के आठ बज रहे थे। युसूफ ने जल्दी से अपना पायजामा पहना और बाहर निकल गया। जहरीन अभी बिस्तर पर ही लेटी हुई थी, बिल्कुल नंगी। उसकी चूत पर अब भी पठान का पानी नज़र आ रहा था,  और टाँगें और जाँघें फैली हुई थी। आज फिर पठान उसे प्यासा छोड़ कर चला गया था।. “हरामज़ादा छक्का!” पठान को गाली देते हुए जहरीन ने अपनी चूत में उंगली डाली और जोर-जोर से अंदर बाहर करने लगी। फिर एक भारी सिसकरी के साथ वो शिथिल पड़ने लगी। उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लेकिन चूत में अब भी. आग लगी हुई थी। लण्ड की प्यासी चूत को उंगली से शाँत करना मुश्किल था।. नहाने के बाद अपना जिस्म पोंछ कर वो बाथरूम से बाहर निकाली और नंगी ही आईने के सामने खड़ी हो गयी। आईने में अपने जिस्म को देखकर वो मुस्कुराने लगी। उसे खुद अपनी जवानी से जलन हो रही थी। शानदार गुलाबी निप्पल, भरे हुए मम्मे, पतली कमर, क्लीन शेव चूत के गुलाबी होंठ… जैसे रास्ता बता रहे हों – जन्नत का। उसने एक ठंडी आह भरी, अपनी चूत को थपथपाया और थाँग पैंटी पहन ली। फिर अपने गदराये हुए एक दम गोल और कसे हुए मम्मों को ब्रा में ठूँस कर उसने हुक बंद कर ली और अपने उरोज़ों को ठीक से सेट किया। वो तो जैसे उछल कर ब्रा से बाहर आ रहे थे। ब्रा का हुक बंद करने के बाद उसने अलमारी खोली और सलवार कमीज़ निकाली, लेकिन फिर कुछ सोचकर उसने कपड़े वापस अलमारी में रख दिये और बुरक़ा निकाल लिया। फिर उसने ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ कर थोड़ा मेक-अप किया और इंपोर्टेड परफ्यूम लगाया। उसके बाद उसने ऊँची पेन्सिल ऐड़ी के सैंडल पहने। अब वो बिल्कुल तैयार थी। सिर्फ़ एक ही फ़र्क था, आज उसने बुऱके में सिर्फ़ पैंटी और ब्रा पहनी थी। फिर अपना छोटा सा ‘क्लच पर्स’जो कि मुठ्ठी में आ सके और जिसमें कुछ रुपये और घर की चाबी वगैरह रख सके, लेकर निकल गयी। अब वो बस स्टॉप पर आकर बस का इंतज़ार करने लगी। उसे पता था इस वक्त बस में भीड़ होगी और उसे बैठने की तो क्या, खड़े होने की भी जगह नहीं मिलेगी। यही तो मक्सद था उसका। जहरीन सर से पैर तक बुरक़े में ढकी हुई थी। सिर्फ़ उसकी आँखें और ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल में उसके गोरे-गोरे पैर नज़र आ रहे थे। किसी के भी उसे पहचान पाने कि कोई गुंजाइश नहीं थी।. जैसे ही बस आयी, वो धक्का मुक्की करके चढ़ गयी। किसी तरह टिकट ली और बीच में पहुँच गयी और इंतज़ार करने लगी – किसी मर्द का जो उसे छुए,  उसके प्यासे जिस्म के साथ छेड़छाड़ करे और उसे राहत पहुँचाये। उसे ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा। उसकी जाँघ पर कुछ गरम-गरम महसूस हुआ। वो समझ गयी कि ये लण्ड है। सोचते ही उसकी धड़कनें तेज़ हो गयी और उसने खुद को थोड़ा एडजस्ट किया। अब वो लण्ड बिल्कुल उसकी गाँड में सेट हो चुका. था। उसने धीरे से अपनी गाँड को पीछे की तरफ़ दबाया। उसके पीछे खड़ा था ‘विक्रम सिंह’, जो बस में ऐसे ही मौकों की तालाश में रहता था। विक्रम समझ गया कि लाइन साफ है। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लण्ड को सीधा करके जहरीन की गाँड पर फ़िट कर दिया। जहरीन ने ऊँची ऐड़ी की सैंडल पहनी थी जिससे उसकी गाँड ठीक विक्रम के लण्ड के लेवल पर थी। अब विक्रम ने अपना हाथ जहरीन की गाँड पर रखा और दबाने लगा।. हाथ लगते ही विक्रम चौंक गया। वो समझ गया कि बुरक़े के नीचे सिर्फ़ पैंटी है। उसने धीरे-धीरे जहरीन की मुलायम लेकिन ठोस और गोल-गोल उठी हुई गाँड की मालिश करना शुरू कर दिया। अब जहरीन एक दम गरम होने लगी थी।. विक्रम ने अपना हाथ अब ऊपर किया और जहरीन की कमर पर से होता हुआ उसका हाथ उसकी बगल में पहुँच गया। वो जहरीन की हल्की हल्की मालिश कर रहा था। उसका हाथ जहरीन की कमर और गाँड को लगातार दबा रहा था और नीचे. विक्रम का लण्ड जहरीन की गाँड की दरार में धंसा हुआ धक्के लगा रहा था। फिर विक्रम ने हाथ नीचे लिया और उसके बुरक़े को पीछे से उठाने लगा। जहरीन ने कोई ऐतराज़ नहीं किया और अब विक्रम का हाथ जहरीन की पैंटी पर. था। वो उसकी जाँघों और गाँड को अपने हाथों से आटे की तरह गूँथ रहा था। थाँग पैंटी की वजह से गाँड तो बिल्कुल नंगी ही थी। फिर विक्रम ने जहरीन की दोनों जाँघों के बीच हाथ डाला और उंगलियों से दबाया। जहरीन समझ. गयी और उसने अपनी टाँगें फैला दीं। अब विक्रम ने बड़े आराम से अपनी उंगलियाँ जहरीन की चूत पर रखी और उसे पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा।. जहरीन मस्त हो चुकी थी और उसकी साँसें तेज़ चलने लगी थीं। उसने नज़रें उठायीं और इत्मीनान किया कि उनपर किसी की नज़र तो नहीं। यकीन होने के बाद उसने अपनी आँखें बंद की और मज़े लेने लगी। अब विक्रम की उंगलियाँ. चूत के ऊपर से थाँग पैंटी की पट्टी को एक तरफ खिसका कर चूत पर चली गयी थीं। जहरीन कि भीगी हुई चूत पर विक्रम की उंगलियाँ जैसे कहर बरपा रही थीं। ऊपर नीचे,  अंदर-बाहर – जहरीन की चूत जैसे तार-तार हो रही थी और विक्रम की उंगलियाँ खेत में चल रहे हल की तरह उसकी लम्बाई,  चौड़ाई और गहरायी नाप रही थी। विक्रम का पूरा हाथ जहरीन की चूत के पानी से भीग चुका था। फिर उसने अपनी दो उंगलियाँ एक साथ चूत में घुसायी और दो-तीन ज़ोर के झटके दिये। जहरीन ऊपर से नीचे तक हिल गयी और उसके पैर उखड़ गये। एक दम से निढाल होकर वो विक्रम पर गिर पड़ी। वो झड़ चुकी थी। आज तक इतना शानदार स्खलन नहीं हुआ था उसका। उसने अपना हाथ पीछे किया. और विक्रम के लण्ड को पकड़ लिया। इतने में झटके के साथ बस रुकी और बहुत से लोग उतार गये। बस तकरीबन खाली हो गयी। जहरीन ने अपना बुरक़ा झट से नीचे किया और सीधी नीचे उतार गयी। आज उसे भरपूर मज़ा मिला था। आज तक. तो रोज़ ही लोग सिर्फ़ पीछे से लण्ड रगड़ कर छोड़ देते थे। आज जो हुआ वो पहले कभी नहीं हुआ था। आप ठीक समझे – जहरीन यही करके आज तक मज़े लूट रही थी क्योंकि पठान उसे कभी खुश नहीं कर पाया था।. उसने नीचे उतरकर सड़क क्रॉस की और रिक्शा पकड़ ली। ऐसा मज़ा ज़िंदगी में पहली बार आया था। वो बार-बार अपना हाथ देख रही थी और उसकी मुठ्ठी बनाकर विक्रम के लण्ड के बारे में सोच रही थी। उसने घर से थोड़ी दूर ही. रिक्शा छोड़ दिया ताकि किसी को पता ना चले कि वो रिक्शा से आयी है। वो ऊँची पेन्सिल हील की सैंडल में मटकते हुए पैदल चलकर अपने घर पहुँची और ताला खोलकर अंदर चली गयी।. अभी उसने दरवाज़ा बंद किया ही था कि घंटी की आवाज़ सुनकर उसने फिर दरवाज़ा खोला। सामने विक्रम खड़ा था। वो समझ गयी कि विक्रम उसका पीछा कर रहा था। इस डर से कि कोई और ना देख ले उसने विक्रम का हाथ पकड़ कर उसे. अंदर खींच लिया। दरवाज़ा बंद करके उसने विक्रम की तरफ़ देखा। वो हैरान थी विक्रम की इस हरकत से।.
स्रोत:इंटरनेट